बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग क्यों जरूरी? महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताई अहमियत
सारांश
मुख्य बातें
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 मई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के ज़रिए अभिभावकों को सचेत किया कि बच्चों की नियमित ग्रोथ मॉनिटरिंग — यानी लंबाई, वजन और उम्र के अनुसार विकास की समय-समय पर निगरानी — उनके संपूर्ण विकास के लिए उतनी ही ज़रूरी है जितना पौष्टिक आहार। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रक्रिया से बच्चे में किसी भी विकास संबंधी कमी को शुरुआती अवस्था में ही पहचाना जा सकता है और समय रहते उचित उपाय किए जा सकते हैं।
ग्रोथ मॉनिटरिंग क्या है
ग्रोथ मॉनिटरिंग का अर्थ है बच्चे की लंबाई, वजन और उम्र के अनुपात को नियमित अंतराल पर मापना और उसका रिकॉर्ड रखना। इससे यह स्पष्ट होता है कि बच्चा अपनी आयु के अनुसार सही गति से बढ़ रहा है या नहीं। यदि किसी भी स्तर पर असंतुलन दिखे, तो उसे प्रारंभिक चरण में ही सुधारा जा सकता है।
पहले पाँच साल सबसे महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बच्चे के जीवन के पहले पाँच वर्ष शारीरिक और मानसिक विकास की दृष्टि से सर्वाधिक निर्णायक होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में अभी भी बड़ी संख्या में अभिभावक इस निगरानी प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ करते हैं। गौरतलब है कि इस अवधि में यदि विकास में कोई कमी रह जाए, तो उसका दीर्घकालिक प्रभाव बच्चे के संपूर्ण जीवन पर पड़ सकता है।
कुपोषण की पहचान में सहायक
मंत्रालय ने बताया कि ग्रोथ मॉनिटरिंग का एक प्रमुख लाभ कुपोषण की शीघ्र पहचान है। कई बार बच्चा बाहर से स्वस्थ दिखता है, लेकिन भीतर से कमज़ोर हो सकता है। ऐसे में ग्रोथ चार्ट के माध्यम से समय पर पहचान और उचित पोषण हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक हो जाता है। यदि बच्चे का वजन उम्र के अनुपात में कम बढ़ रहा है, तो यह आहार में सुधार की ज़रूरत का संकेत है।
आंगनवाड़ी और सरकारी केंद्रों की भूमिका
देशभर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। यहाँ स्वास्थ्य कार्यकर्ता नियमित रूप से बच्चों का वजन और लंबाई मापते हैं तथा माता-पिता को उचित आहार और पोषण संबंधी मार्गदर्शन भी देते हैं। यह प्रक्रिया अभिभावकों को जागरूक बनाती है और उन्हें यह समझने में मदद करती है कि बच्चे का विकास सही दिशा में हो रहा है या नहीं।
माता-पिता की जागरूकता ज़रूरी
मंत्रालय ने अपील की है कि हर माता-पिता अपने बच्चे की ग्रोथ चार्ट नियमित रूप से देखें और नज़दीकी आंगनवाड़ी या स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर समय-समय पर जाँच करवाएँ। आने वाले समय में इस दिशा में जन-जागरूकता अभियानों को और तेज़ किए जाने की उम्मीद है, ताकि देश के हर बच्चे को स्वस्थ और संतुलित विकास का अवसर मिल सके।