बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए पोषण और शारीरिक गतिविधि दोनों जरूरी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किया सचेत

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बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए पोषण और शारीरिक गतिविधि दोनों जरूरी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किया सचेत

सारांश

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चेताया है कि डिजिटल युग में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम और जंक फूड की लत उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है। रोज़ाना 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि और घर का संतुलित भोजन — ये दोनों मिलकर ही बच्चे का समग्र विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।

Key Takeaways

  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2026 को बच्चों के स्वास्थ्य पर जागरूकता पोस्ट साझा की।
  • विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि अनिवार्य है।
  • बढ़ता स्क्रीन टाइम और जंक फूड की आदत बच्चों में मोटापे और पोषण की कमी का प्रमुख कारण बन रही है।
  • बच्चों के आहार में मिलेट्स, हरी सब्जियाँ, दालें, दूध और मौसमी फल शामिल करने की सलाह दी गई।
  • कुछ स्कूलों में 'शुगर और ऑयल बोर्ड' जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक महत्वपूर्ण पोस्ट के माध्यम से अभिभावकों और शिक्षकों को सचेत किया कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए केवल संतुलित आहार पर्याप्त नहीं है — बल्कि प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि भी उतनी ही अनिवार्य है। मंत्रालय के अनुसार, जब पोषण और व्यायाम दोनों साथ चलते हैं, तभी बच्चे का समग्र विकास संभव होता है।

बढ़ता स्क्रीन टाइम और घटती शारीरिक सक्रियता

मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में रेखांकित किया कि आज की डिजिटल जीवनशैली में बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल, टीवी और टैबलेट की स्क्रीन के सामने बीत रहा है। पहले बच्चे खुले मैदानों में दौड़ते, कूदते और क्रिकेट जैसे आउटडोर खेल खेलते थे। अब खेलकूद में भारी कमी आई है और स्क्रीन टाइम तेज़ी से बढ़ा है। इसी कारण बच्चों में मोटापा, आलस और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएँ तेज़ी से उभर रही हैं।

विशेषज्ञों की सलाह — रोज़ाना 60 मिनट की एक्टिविटी

चिकित्सा विशेषज्ञों की सिफारिश है कि बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि अवश्य करनी चाहिए। इसमें दौड़ना, साइकिल चलाना, रस्सी कूदना, योग और किसी भी प्रकार का आउटडोर खेल शामिल हो सकता है। नियमित व्यायाम से शरीर मज़बूत बनता है, हड्डियाँ और मांसपेशियाँ सही तरीके से विकसित होती हैं और बच्चा शारीरिक रूप से सक्रिय रहता है।

जंक फूड की बढ़ती लत और उसके दुष्प्रभाव

मंत्रालय ने बच्चों के खानपान पर भी चिंता जताई। आजकल बड़ी संख्या में बच्चे चिप्स, बर्गर, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट और पैकेटबंद स्नैक्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ये खाद्य पदार्थ स्वाद में भले ही लुभावने हों, किंतु स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक हैं। लगातार ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से मोटापा बढ़ता है और शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की गंभीर कमी हो जाती है।

संतुलित और घर का ताज़ा भोजन — सही विकल्प

मंत्रालय ने अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों को मौसमी फल, हरी सब्जियाँ, दालें, मोटा अनाज (मिलेट्स), दूध और सूखे मेवे युक्त घर का बना ताज़ा और संतुलित भोजन दिया जाए। ये सभी खाद्य पदार्थ बच्चों को आवश्यक विटामिन, खनिज और ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास सुचारु रूप से होता है।

स्कूलों में जागरूकता अभियान

कुछ स्कूलों में 'शुगर और ऑयल बोर्ड' जैसे जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों और उनके माता-पिता को यह समझाना है कि अत्यधिक चीनी और तेल युक्त भोजन कितना नुकसानदायक हो सकता है। इन अभियानों का मकसद बच्चों को छोटी उम्र से ही स्वस्थ जीवनशैली की आदत डालना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में बाल मोटापे की दर चिंताजनक गति से बढ़ रही है और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे भविष्य की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक मान रहे हैं।

Point of View

लेकिन सोशल मीडिया जागरूकता और ज़मीनी बदलाव के बीच की खाई को पाटना अभी बाकी है। भारत के सरकारी स्कूलों में खेल के मैदानों की भारी कमी और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं — बिना इन बुनियादी ढाँचागत समस्याओं को सुलझाए, केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा। इसके अलावा, जंक फूड उद्योग के आक्रामक विज्ञापन और बच्चों को लक्षित करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियामक कार्रवाई की माँग भी लंबे समय से उठ रही है, जिस पर नीतिगत स्तर पर अभी भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

बच्चों के विकास के लिए रोज़ाना कितनी शारीरिक गतिविधि जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसमें दौड़ना, साइकिल चलाना, रस्सी कूदना, योग या कोई भी आउटडोर खेल शामिल हो सकता है।
बच्चों को जंक फूड से क्यों दूर रखना चाहिए?
जंक फूड जैसे चिप्स, बर्गर, पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक में पोषक तत्वों की कमी और चीनी व तेल की अधिकता होती है। इनके नियमित सेवन से बच्चों में मोटापा बढ़ता है और शरीर में आवश्यक विटामिन व खनिजों की कमी हो जाती है।
बच्चों के आहार में कौन-कौन सी चीजें शामिल करनी चाहिए?
बच्चों के भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियाँ, दालें, मोटा अनाज (मिलेट्स), दूध और सूखे मेवे अवश्य शामिल करने चाहिए। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर को ज़रूरी ऊर्जा, विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं।
स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों पर क्या असर पड़ता है?
अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों में शारीरिक सक्रियता घटती है, जिससे मोटापा, आलस और कई स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, यह बच्चों के समग्र विकास में बाधा डालता है।
'शुगर और ऑयल बोर्ड' अभियान क्या है?
यह स्कूलों में चलाया जा रहा एक जागरूकता अभियान है जो बच्चों और अभिभावकों को अत्यधिक चीनी और तेल युक्त भोजन के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करता है। इसका उद्देश्य बच्चों में छोटी उम्र से ही स्वस्थ जीवनशैली की आदत विकसित करना है।
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