21 अगस्त 2026
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ईडी की कडप्पा सांसद अविनाश रेड्डी के ठिकानों पर छापेमारी, विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड में मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज

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ईडी की कडप्पा सांसद अविनाश रेड्डी के ठिकानों पर छापेमारी, विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड में मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज

सारांश

सात साल पुराने विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड में ईडी ने नया मोर्चा खोला — कडप्पा सांसद अविनाश रेड्डी के हैदराबाद और कडपा स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी। आरोप है कि हत्या के लिए ₹4 करोड़ की सुपारी दी गई थी। सीबीआई की जाँच पूरी होने के बाद भी मनी लॉन्ड्रिंग का पहलू अभी जीवित है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय ने 21 अगस्त को हैदराबाद में 2 और वाईएसआर कडपा जिले में 4 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
तलाशी वाईएसआरसीपी सांसद वाई.एस.
अविनाश रेड्डी , उनके पिता वाई.एस.
भास्कर रेड्डी और अन्य आरोपियों के ठिकानों पर की गई।
जाँच का केंद्र ₹4 करोड़ की कथित सुपारी है, जो 15 मार्च 2019 को पुलिवेंदुला में हुई विवेकानंद रेड्डी की हत्या से जुड़ी बताई जाती है।
ईडी ने पिछले साल अगस्त में ईसीआईआर दर्ज की थी; जाँच सीबीआई की चार्जशीट पर आधारित है।
सीबीआई ने अगस्त 2025 में जाँच पूरी होने की जानकारी सर्वोच्च न्यायालय को दी थी; मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सुनीता रेड्डी की याचिका खारिज की।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार, 21 अगस्त को हैदराबाद और आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडपा जिले में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के कडप्पा सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी और उनके पिता वाई.एस. भास्कर रेड्डी से जुड़े ठिकानों पर की गई। इस छापेमारी का संबंध पूर्व राज्य मंत्री वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की 2019 में हुई हत्या से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले से है।

तलाशी अभियान का विवरण

ईडी अधिकारियों ने सुबह एक साथ हैदराबाद में दो और कडपा जिले में चार स्थानों पर तलाशी शुरू की। एक टीम हैदराबाद के कोकापेट स्थित सांसद अविनाश रेड्डी के आवास पर पहुँची, जबकि एक अन्य टीम पुलिवेंदुला में उनके घर गई — हालाँकि वहाँ ताला बंद मिला।

इस अभियान में हत्या मामले के अन्य आरोपियों — सुनील यादव, देवीरेड्डी शिवशंकर रेड्डी और येरा गंगिरेड्डी — से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। ईडी अधिकारी पैसों के लेन-देन का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच करने की कोशिश कर रहे हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग जाँच की पृष्ठभूमि

केंद्रीय एजेंसी ने यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज मामले और उसकी चार्जशीट के आधार पर शुरू की है। पिछले साल अगस्त में ईडी ने एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। आरोप है कि विवेकानंद रेड्डी की हत्या के लिए ₹4 करोड़ की सुपारी दी गई थी — और ईडी इसी धनराशि के स्रोत व प्रवाह की जाँच कर रही है।

विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड: मुख्य घटनाक्रम

पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के भाई और वाईएसआरसीपी अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी के चाचा विवेकानंद रेड्डी की हत्या 15 मार्च 2019 को पुलिवेंदुला स्थित उनके घर पर की गई थी। 68 वर्षीय पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद उस समय घर पर अकेले थे, जब कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने घर में घुसकर उनकी हत्या कर दी। यह वारदात आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों से महज़ कुछ सप्ताह पहले हुई थी।

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 2020 में विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता रेड्डी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को जाँच सौंपने का आदेश दिया था। सुनीता ने कुछ रिश्तेदारों पर संदेह जताया था।

सीबीआई की जाँच और न्यायालय के फैसले

सीबीआई ने 2021 में पहली चार्जशीट और 2022 व 2023 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। 2023 में सीबीआई ने अविनाश रेड्डी के पिता भास्कर रेड्डी और उनके सहयोगी उदय कुमार रेड्डी को गिरफ्तार किया।

सीबीआई का आरोप है कि अविनाश और भास्कर रेड्डी ने मिलकर विवेकानंद रेड्डी को रास्ते से हटाने की साजिश रची, क्योंकि वे कडप्पा लोकसभा सीट से अविनाश को उम्मीदवार बनाने के खिलाफ थे। हालाँकि, पिता-पुत्र दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया है।

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 31 मई 2023 को अविनाश रेड्डी को अग्रिम जमानत दे दी थी। अगस्त 2025 में सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि उसने जाँच पूरी कर ली है। मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सुनीता रेड्डी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आगे की जाँच और जमानत रद्द करने की माँग की गई थी।

आगे क्या होगा

ईडी की यह ताज़ा छापेमारी संकेत देती है कि मनी लॉन्ड्रिंग का पहलू अभी भी सक्रिय जाँच के दायरे में है, भले ही सीबीआई की आपराधिक जाँच पूरी हो चुकी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब सर्वोच्च न्यायालय मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है — और ईडी की जाँच इस हत्याकांड को एक नए कानूनी मोर्चे पर ले जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सर्वोच्च न्यायालय ने आगे की जाँच की माँग खारिज कर दी है, फिर भी मनी लॉन्ड्रिंग का मोर्चा खुला है। यह संकेत देता है कि केंद्रीय एजेंसियाँ उस वित्तीय श्रृंखला को खंगालना चाहती हैं जिसे आपराधिक जाँच में शायद पूरी तरह नहीं खोला जा सका। गौरतलब है कि यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में हुई है — जब वाईएसआरसीपी सत्ता से बाहर है और आंध्र प्रदेश में नई सरकार सत्तारूढ़ है। आलोचक इसे राजनीतिक दबाव का औज़ार बता सकते हैं, लेकिन ₹4 करोड़ की सुपारी का वित्तीय सुराग सार्वजनिक रिकॉर्ड में पहले से दर्ज है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने अविनाश रेड्डी के ठिकानों पर छापा क्यों मारा?
ईडी ने वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की 2019 में हुई हत्या से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच के तहत यह तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी उस कथित ₹4 करोड़ की सुपारी के वित्तीय स्रोत और प्रवाह का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
विवेकानंद रेड्डी की हत्या कब और कैसे हुई थी?
15 मार्च 2019 को आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले पुलिवेंदुला स्थित उनके घर पर कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने 68 वर्षीय पूर्व मंत्री विवेकानंद रेड्डी की हत्या कर दी थी। वे उस समय घर पर अकेले थे।
सीबीआई ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
सीबीआई ने 2020 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर जाँच अपने हाथ में ली। 2021, 2022 और 2023 में चार्जशीट दाखिल की गई। 2023 में भास्कर रेड्डी और उदय कुमार रेड्डी को गिरफ्तार किया गया, और अगस्त 2025 में सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय को जाँच पूरी होने की जानकारी दी।
अविनाश रेड्डी की जमानत की स्थिति क्या है?
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 31 मई 2023 को अविनाश रेड्डी को अग्रिम जमानत दे दी थी। मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें जमानत रद्द करने और आगे की जाँच की माँग की गई थी।
इस मामले में ईडी और सीबीआई की जाँच में क्या फर्क है?
सीबीआई की जाँच हत्या के आपराधिक पहलू पर केंद्रित थी, जो अब पूरी हो चुकी है। ईडी की जाँच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत है, जो हत्या से जुड़े कथित ₹4 करोड़ के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल करती है — यह एक अलग और अभी भी सक्रिय कानूनी प्रक्रिया है।
राष्ट्र प्रेस
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