ईडी की कडप्पा सांसद अविनाश रेड्डी के ठिकानों पर छापेमारी, विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड में मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार, 21 अगस्त को हैदराबाद और आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडपा जिले में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के कडप्पा सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी और उनके पिता वाई.एस. भास्कर रेड्डी से जुड़े ठिकानों पर की गई। इस छापेमारी का संबंध पूर्व राज्य मंत्री वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की 2019 में हुई हत्या से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले से है।
तलाशी अभियान का विवरण
ईडी अधिकारियों ने सुबह एक साथ हैदराबाद में दो और कडपा जिले में चार स्थानों पर तलाशी शुरू की। एक टीम हैदराबाद के कोकापेट स्थित सांसद अविनाश रेड्डी के आवास पर पहुँची, जबकि एक अन्य टीम पुलिवेंदुला में उनके घर गई — हालाँकि वहाँ ताला बंद मिला।
इस अभियान में हत्या मामले के अन्य आरोपियों — सुनील यादव, देवीरेड्डी शिवशंकर रेड्डी और येरा गंगिरेड्डी — से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। ईडी अधिकारी पैसों के लेन-देन का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच करने की कोशिश कर रहे हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग जाँच की पृष्ठभूमि
केंद्रीय एजेंसी ने यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज मामले और उसकी चार्जशीट के आधार पर शुरू की है। पिछले साल अगस्त में ईडी ने एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। आरोप है कि विवेकानंद रेड्डी की हत्या के लिए ₹4 करोड़ की सुपारी दी गई थी — और ईडी इसी धनराशि के स्रोत व प्रवाह की जाँच कर रही है।
विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड: मुख्य घटनाक्रम
पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के भाई और वाईएसआरसीपी अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी के चाचा विवेकानंद रेड्डी की हत्या 15 मार्च 2019 को पुलिवेंदुला स्थित उनके घर पर की गई थी। 68 वर्षीय पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद उस समय घर पर अकेले थे, जब कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने घर में घुसकर उनकी हत्या कर दी। यह वारदात आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों से महज़ कुछ सप्ताह पहले हुई थी।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 2020 में विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता रेड्डी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को जाँच सौंपने का आदेश दिया था। सुनीता ने कुछ रिश्तेदारों पर संदेह जताया था।
सीबीआई की जाँच और न्यायालय के फैसले
सीबीआई ने 2021 में पहली चार्जशीट और 2022 व 2023 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। 2023 में सीबीआई ने अविनाश रेड्डी के पिता भास्कर रेड्डी और उनके सहयोगी उदय कुमार रेड्डी को गिरफ्तार किया।
सीबीआई का आरोप है कि अविनाश और भास्कर रेड्डी ने मिलकर विवेकानंद रेड्डी को रास्ते से हटाने की साजिश रची, क्योंकि वे कडप्पा लोकसभा सीट से अविनाश को उम्मीदवार बनाने के खिलाफ थे। हालाँकि, पिता-पुत्र दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया है।
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 31 मई 2023 को अविनाश रेड्डी को अग्रिम जमानत दे दी थी। अगस्त 2025 में सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि उसने जाँच पूरी कर ली है। मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने सुनीता रेड्डी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आगे की जाँच और जमानत रद्द करने की माँग की गई थी।
आगे क्या होगा
ईडी की यह ताज़ा छापेमारी संकेत देती है कि मनी लॉन्ड्रिंग का पहलू अभी भी सक्रिय जाँच के दायरे में है, भले ही सीबीआई की आपराधिक जाँच पूरी हो चुकी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब सर्वोच्च न्यायालय मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है — और ईडी की जाँच इस हत्याकांड को एक नए कानूनी मोर्चे पर ले जा सकती है।