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विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड: ईडी ने कडप्पा सांसद अविनाश रेड्डी को 14 अक्टूबर तक पेश होने का नोटिस दिया

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विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड: ईडी ने कडप्पा सांसद अविनाश रेड्डी को 14 अक्टूबर तक पेश होने का नोटिस दिया

सारांश

विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड की जाँच अब सीधे संसद तक पहुँच गई है। ईडी ने कडप्पा सांसद और जगन मोहन रेड्डी के चचेरे भाई अविनाश रेड्डी को 14 अक्टूबर को तलब किया है। ₹40 करोड़ की कथित सुपारी से जुड़ा यह मामला आंध्र प्रदेश की राजनीति के सबसे संवेदनशील कोनों को छू रहा है।

मुख्य बातें

ईडी ने कडप्पा सांसद वाई.एस.
अविनाश रेड्डी को 14 अक्टूबर 2026 को पेश होने का नोटिस जारी किया।
विवेकानंद रेड्डी की 15 मार्च 2019 की हत्या से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन की जाँच के तहत भेजा गया है।
सीबीआई को संदेह है कि हत्या के लिए आरोपियों को ₹40 करोड़ की 'सुपारी' दी गई थी; ईडी ₹4 करोड़ के ट्रांसफर और ₹1 करोड़ के अग्रिम भुगतान की भी जाँच कर रही है।
आरोपी से सरकारी गवाह बने शेख दस्तगीर समेत सुनील यादव , गांगी रेड्डी और उमाशंकर रेड्डी से पहले ही पूछताछ हो चुकी है।
पिछले महीने ईडी ने अविनाश रेड्डी और उनके पिता वाई.एस.
भास्कर रेड्डी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी।
सीबीआई ने 2020 में जाँच संभाली; 2023 में भास्कर रेड्डी को गिरफ्तार किया गया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कडप्पा के सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी को 2 अक्टूबर 2026 को समन जारी किया है, जिसमें उन्हें 14 अक्टूबर को जाँच अधिकारियों के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है। यह नोटिस उनके चाचा और आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की हत्या से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन की जाँच के तहत भेजा गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के भाई और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के चाचा विवेकानंद रेड्डी की 15 मार्च 2019 को पुलिवेंदुला स्थित उनके आवास पर हत्या कर दी गई थी। 68 वर्षीय पूर्व राज्य मंत्री और पूर्व सांसद उस समय अकेले घर में थे, जब कुछ अज्ञात व्यक्ति अंदर घुसे और उनकी जान ले ली।

गौरतलब है कि यह हत्या 2019 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों से महज कुछ सप्ताह पहले हुई थी, जिससे राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा और तीव्र हो गई।

सीबीआई और ईडी की जाँच का क्रम

विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीता रेड्डी की याचिका पर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2020 में यह मामला अपने हाथ में लिया — सुनीता रेड्डी ने कुछ रिश्तेदारों पर संदेह जताया था। सीबीआई ने 2021 में पहली चार्जशीट और 2022 तथा 2023 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। 2023 में ही एजेंसी ने वाई.एस. भास्कर रेड्डी और उनके सहयोगी उदय कुमार रेड्डी को गिरफ्तार किया।

ईडी ने सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जाँच शुरू की। पिछले साल अगस्त में एजेंसी ने एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की।

कथित वित्तीय लेन-देन की जाँच

सीबीआई को संदेह है कि विवेकानंद रेड्डी की हत्या के लिए आरोपियों को ₹40 करोड़ की 'सुपारी' दी गई थी। ईडी इसी से जुड़े वित्तीय लेन-देन की परतें खोल रही है। एजेंसी ₹4 करोड़ के कथित ट्रांसफर और आरोपी से सरकारी गवाह बन चुके शेख दस्तगीर को अग्रिम भुगतान के रूप में दिए गए ₹1 करोड़ की भी जाँच कर रही है।

इससे पहले ईडी ने सुनील यादव से पूछताछ कर उसका बयान दर्ज किया। रिपोर्टों के अनुसार, इसी बयान के आधार पर येरा गांगी रेड्डी और उमाशंकर रेड्डी से क्रमशः पूछताछ की गई। गांगी रेड्डी 28 और 29 सितंबर को हैदराबाद में ईडी अधिकारियों के सामने पेश हुए।

अविनाश रेड्डी को नोटिस और हाल की छापेमारी

वाई.एस. अविनाश रेड्डी, जो इस हत्याकांड में आरोपी हैं और जगन मोहन रेड्डी के चचेरे भाई हैं, को अब सीधे जाँच एजेंसी ने तलब किया है। यह नोटिस गांगी रेड्डी व अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद भेजा गया है।

पिछले महीने ईडी ने अविनाश रेड्डी, उनके पिता वाई.एस. भास्कर रेड्डी और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी भी की थी।

आगे क्या होगा

अविनाश रेड्डी के 14 अक्टूबर को ईडी के सामने पेश होने के बाद जाँच की दिशा और स्पष्ट होने की संभावना है। यह मामला आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक संवेदनशील मोड़ पर है — विशेष रूप से तब, जब YSRCP सत्ता से बाहर है और राज्य में नई सरकार सत्तारूढ़ है। न्यायिक और जाँच प्रक्रियाओं के आगे बढ़ने के साथ इस हत्याकांड के राजनीतिक आयाम और उजागर हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सीबीआई ने 2020 में जाँच ली, और अब 2026 में ईडी एक बैठे हुए सांसद को तलब कर रही है — यह समयरेखा बताती है कि न्यायिक प्रक्रिया कितनी धीमी चली है। ₹40 करोड़ की कथित सुपारी की जाँच यदि वित्तीय प्रमाणों से पुष्ट होती है, तो यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि संगठित राजनीतिक अपराध का गंभीर उदाहरण बन सकता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर राजनीतिक कोण पर ध्यान देती है, लेकिन असली सवाल यह है कि सात साल बाद भी दोषसिद्धि अभी तक क्यों नहीं हुई।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड में ईडी की जाँच किस बारे में है?
ईडी इस हत्याकांड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जाँच कर रही है। सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर एजेंसी ₹40 करोड़ की कथित 'सुपारी', ₹4 करोड़ के ट्रांसफर और ₹1 करोड़ के अग्रिम भुगतान की पड़ताल कर रही है।
वाई.एस. अविनाश रेड्डी कौन हैं और उन्हें क्यों नोटिस मिला?
वाई.एस. अविनाश रेड्डी कडप्पा के YSRCP सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के चचेरे भाई हैं। वे 2019 के विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड में आरोपी हैं और ईडी ने उन्हें 14 अक्टूबर को कथित वित्तीय लेन-देन की जाँच के तहत पेश होने को कहा है।
विवेकानंद रेड्डी की हत्या कब और कहाँ हुई थी?
विवेकानंद रेड्डी की हत्या 15 मार्च 2019 को आंध्र प्रदेश के पुलिवेंदुला स्थित उनके आवास पर हुई थी। 68 वर्षीय पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद उस समय घर में अकेले थे जब अज्ञात हमलावर अंदर घुसे।
इस मामले में सीबीआई और ईडी की अलग-अलग भूमिका क्या है?
सीबीआई ने 2020 में हत्याकांड की जाँच अपने हाथ में ली और 2021, 2022 व 2023 में चार्जशीट दाखिल की। ईडी ने सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का अलग मामला दर्ज कर वित्तीय पहलुओं की जाँच शुरू की है।
इस मामले में अब तक किसे गिरफ्तार किया जा चुका है?
सीबीआई ने 2023 में वाई.एस. भास्कर रेड्डी और उनके सहयोगी उदय कुमार रेड्डी को गिरफ्तार किया था। शेख दस्तगीर आरोपी से सरकारी गवाह बन गए हैं। अविनाश रेड्डी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं और उन्हें अब ईडी ने पूछताछ के लिए तलब किया है।
राष्ट्र प्रेस
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