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वाईएसआरसीपी का आरोप: नायडू सरकार एपीएसएडीए को कमज़ोर कर एक्वा किसानों को नुकसान पहुँचा रही है

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वाईएसआरसीपी का आरोप: नायडू सरकार एपीएसएडीए को कमज़ोर कर एक्वा किसानों को नुकसान पहुँचा रही है

सारांश

वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में नायडू सरकार पर दोहरा हमला बोला — एक तरफ एपीएसएडीए को कमज़ोर कर फीड कंपनियों को फायदा पहुँचाने का आरोप, दूसरी तरफ विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड के राजनीतिक दोहन का। एक्वा फीड की कीमतों में ₹27 की बढ़ोतरी बनाम ₹1.50 की सब्सिडी — यह टकराव राज्य की कृषि राजनीति का नया मोर्चा है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी कोऑर्डिनेटर वड्डी रघुराम ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार एपीएसएडीए अधिनियम को कमज़ोर कर एक्वा फीड कंपनियों को फायदा पहुँचा रही है।
पिछले छह महीनों में एक्वा फीड की कीमतें ₹27 प्रति किलोग्राम बढ़ीं, जबकि सरकार की सब्सिडी मात्र ₹1.50 है।
सरकार ने जून–जुलाई में बिजली सब्सिडी वापस ली, जिससे बटाईदार किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए।
जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में एक्वा क्षेत्र को ₹3.60 करोड़ की सब्सिडी दी गई थी: वाईएसआरसीपी का दावा।
पूर्व मंत्री साके शैलाजानाथ ने विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप नायडू पर लगाया।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 9 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश की एनडीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें कहा गया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार जानबूझकर राज्य के एक्वा क्षेत्र को संकट में धकेल रही है। पार्टी का आरोप है कि सरकार गरीब एक्वा किसानों की क़ीमत पर फीड कंपनियों को फायदा पहुँचाने की नीति अपना रही है। ये आरोप ताडेपल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए।

एपीएसएडीए को कमज़ोर करने का आरोप

वाईएसआरसीपी के पार्टी कोऑर्डिनेटर वड्डी रघुराम ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि एनडीए सरकार आंध्र प्रदेश राज्य एक्वाकल्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीएसएडीए) अधिनियम को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, यह क़दम फीड कंपनी मालिकों को लाभ पहुँचाने के लिए उठाया जा रहा है, जिसकी सीधी मार किसानों पर पड़ रही है।

रघुराम ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस मामले में न्यायालय को भी गुमराह किया है। उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार ने एक सरकारी आदेश जारी कर अदालत को बताया कि उसने तीन एक्वा किसानों को समिति में शामिल किया है, जबकि वाईएसआरसीपी के अनुसार यह दावा भ्रामक है।

रघुराम ने माँग की कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू यह स्पष्ट करें कि एक्वा किसानों के साथ बैठक कब और कहाँ हुई और समिति में शामिल वे तीन किसान कौन हैं।

फीड की कीमतें और सब्सिडी का मामला

वड्डी रघुराम ने आर्थिक आँकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले छह महीनों में एक्वा फीड की कीमतों में प्रति किलोग्राम ₹27 की वृद्धि हुई है, जबकि एनडीए सरकार मात्र ₹1.50 प्रति किलोग्राम की सब्सिडी की बात कर रही है। उनके अनुसार यह राशि किसानों की बढ़ी हुई लागत की तुलना में नगण्य है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जून और जुलाई में किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी क्यों वापस ली गई। रघुराम ने दावा किया कि जब वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी मुख्यमंत्री थे, तब एक्वा क्षेत्र को ₹3.60 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई थी। उनके अनुसार, एनडीए सरकार की नीतियों से बटाईदार किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं और फसल अवकाश की मार भी उन्हीं पर सबसे ज़्यादा पड़ रही है।

विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड पर आरोप

एक अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाईएसआरसीपी नेता एवं पूर्व मंत्री साके शैलाजानाथ ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। शैलाजानाथ के अनुसार, इस मामले के आरोपी टीडीपी के दफ़्तरों में आ रहे हैं, मीडिया को संबोधित कर रहे हैं और मुख्यमंत्री से मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बावजूद, चंद्रबाबू नायडू राजनीतिक फायदे के लिए केस को जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं। उनके कामों से सवाल उठता है कि क्या वह आरोपियों और याचिकाकर्ताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।' शैलाजानाथ ने यह भी सवाल उठाया कि इस केस के याचिकाकर्ताओं को नायडू से मिलने का समय कैसे मिल रहा है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और संदर्भ

गौरतलब है कि विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड और शराब घोटाला — ये दोनों मुद्दे इस समय आंध्र प्रदेश की राजनीति में वाईएसआरसीपी और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के बीच टकराव के केंद्र में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता-परिवर्तन के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष तेज़ हो गया है।

वाईएसआरसीपी ने स्पष्ट किया कि वह एक्वा किसानों के हितों की लड़ाई आगे भी जारी रखेगी और मामले को अगले स्तर तक ले जाने की चेतावनी दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक्वा फीड में ₹27 की बढ़ोतरी बनाम ₹1.50 सब्सिडी का आँकड़ा ठोस सवाल खड़ा करता है जिसका सरकार को जवाब देना होगा। एपीएसएडीए की भूमिका को लेकर न्यायालय में जो खींचतान चल रही है, वह दर्शाती है कि विनियामक ढाँचे का भविष्य महज राजनीतिक आरोपों से परे एक वास्तविक नीतिगत विवाद है। साथ ही, विवेकानंद रेड्डी मामले को इस आर्थिक विमर्श से जोड़ना वाईएसआरसीपी की उस कोशिश को दर्शाता है जिसमें वह एक साथ कई मोर्चों पर सरकार को घेरना चाहती है — लेकिन इससे मूल एक्वा किसान मुद्दे की धार भी कम हो सकती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाईएसआरसीपी ने नायडू सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया है कि एनडीए सरकार एपीएसएडीए अधिनियम को कमज़ोर कर एक्वा फीड कंपनियों को फायदा पहुँचा रही है और गरीब किसानों को नुकसान हो रहा है। पार्टी के अनुसार सरकार ने इस मामले में न्यायालय को भी गुमराह किया है।
एपीएसएडीए क्या है और यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
आंध्र प्रदेश राज्य एक्वाकल्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीएसएडीए) राज्य के एक्वा क्षेत्र के विनियमन और किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए बनाई गई संस्था है। वाईएसआरसीपी का दावा है कि यह संस्था जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में बनाई गई थी और नायडू सरकार इसे कमज़ोर कर फीड कंपनियों को निर्बाध फायदा पहुँचाना चाहती है।
एक्वा फीड की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है और सरकार क्या सब्सिडी दे रही है?
वाईएसआरसीपी के अनुसार पिछले छह महीनों में एक्वा फीड की कीमतें ₹27 प्रति किलोग्राम बढ़ी हैं, जबकि एनडीए सरकार मात्र ₹1.50 प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा जून और जुलाई में किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी भी वापस ले ली गई।
विवेकानंद रेड्डी हत्याकांड का एक्वा विवाद से क्या संबंध है?
एक अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री साके शैलाजानाथ ने आरोप लगाया कि नायडू इस हत्याकांड का राजनीतिक इस्तेमाल वाईएसआरसीपी को घेरने के लिए कर रहे हैं। हालाँकि यह मामला सीधे एक्वा विवाद से जुड़ा नहीं है, लेकिन दोनों मुद्दे एक साथ उठाकर वाईएसआरसीपी ने सरकार पर कई मोर्चों से दबाव बनाने की कोशिश की है।
इस विवाद में बटाईदार किसान सबसे अधिक प्रभावित क्यों हैं?
वड्डी रघुराम के अनुसार, एनडीए सरकार की नीतियों के कारण बटाईदार किसानों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है क्योंकि वे न तो भूमि के मालिक हैं और न ही उनके पास सरकारी सहायता लेने के पर्याप्त दस्तावेज़ हैं। फसल अवकाश और बढ़ती फीड लागत से उनकी आजीविका सबसे अधिक खतरे में है।
राष्ट्र प्रेस
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