जगन मोहन रेड्डी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले: ईडी ने तेलंगाना हाईकोर्ट से माँगी रोज़ाना सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 सितंबर 2026 को तेलंगाना उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी और अन्य आरोपियों के विरुद्ध दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में प्रतिदिन सुनवाई सुनिश्चित कराने की माँग की है। ईडी ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के मौलिक अधिकार का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि यह मामला लगभग 10 वर्षों से न्यायालय में लंबित है। यह जानकारी 10 अक्टूबर को एक अधिकारी ने दी।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी की याचिका में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी सहित सभी आरोपियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की भी माँग की गई है। ये आरोप पत्र धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत दायर किए गए हैं।
ईडी ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि वह आपराधिक न्याय प्रणाली को निर्देशित करे ताकि कार्यवाही में उचित गति सुनिश्चित हो सके। जाँच एजेंसी का कहना है कि आरोप पत्रों पर संज्ञान लिए जाने के बाद भी हैदराबाद के नामपल्ली स्थित विशेष सीबीआई न्यायालय में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। जाँच में आरोप है कि बड़े कॉरपोरेट संस्थानों और व्यक्तियों ने जगन मोहन रेड्डी तथा उनके परिजनों से जुड़ी कंपनियों में भारी निवेश किया — यह निवेश कथित तौर पर आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान दिए गए लाभों के बदले में था।
जाँच के अनुसार, ऑरोबिंदो फार्मा, हेटेरो ड्रग्स, इंदु प्रोजेक्ट्स, इंदु टेकजोन, लेपाक्षी नॉलेज हब, वैनपिक प्रोजेक्ट्स, वैनपिक पोर्ट्स, निम्मगड्डा प्रसाद, रामकी फार्मा सिटी (इंडिया) लिमिटेड और द इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड जैसी कंपनियों और व्यक्तियों ने भारती सीमेंट कॉर्पोरेशन, जगती पब्लिकेशंस तथा जननी इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी मात्रा में शेयर खरीदे। ये तीनों कंपनियाँ कथित तौर पर जगन मोहन रेड्डी और उनके परिवार से संबंधित हैं।
न्यायालयीन प्रक्रिया में देरी
ईडी ने 2016 से 2021 के बीच विशेष सीबीआई न्यायालय में जगन मोहन रेड्डी और अन्य के विरुद्ध नौ आरोप पत्र दायर किए। एजेंसी के अनुसार, सभी नौ आरोप पत्रों पर संज्ञान लिया जा चुका है, किंतु मामले डिस्चार्ज याचिकाओं की सुनवाई के लिए अटके हुए हैं।
ईडी ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के तबादलों और अन्य प्रशासनिक कारणों से इन डिस्चार्ज याचिकाओं पर अब तक निर्णय नहीं हो सका है, जिससे आरोप पत्र प्रारंभिक चरण में ही अटके हुए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय का संदर्भ
ईडी ने अपनी याचिका में सर्वोच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जो वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी बनाम सीबीआई मामले में की गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि आर्थिक अपराध एक अलग श्रेणी के अपराध होते हैं और इनके प्रति विशेष दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, गहरी साजिशों से जुड़े और सार्वजनिक धन की भारी हानि वाले आर्थिक अपराध न केवल देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि राष्ट्र की वित्तीय सेहत के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।
क्या होगा आगे
तेलंगाना उच्च न्यायालय अब यह तय करेगा कि क्या विशेष सीबीआई न्यायालय को प्रतिदिन सुनवाई का निर्देश दिया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आर्थिक अपराध मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की सुस्त गति पर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। उच्च न्यायालय का निर्णय इस मामले की दिशा और गति दोनों को निर्धारित करेगा।