27 जुलाई 2026
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नेशनल हेराल्ड केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनिया-राहुल को ईडी याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया

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नेशनल हेराल्ड केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनिया-राहुल को ईडी याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ईडी की पुनरीक्षण याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है। ईडी ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रही है जिसमें पीएमएलए के तहत अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार किया गया था। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ईडी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को ईडी की अभियोजन शिकायत पर पीएमएलए के तहत संज्ञान लेने से इनकार किया था, जिसे ईडी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट की व्याख्या से पीएमएलए 'बेकार और अनावश्यक' हो जाएगा।
ईडी ने सैम पित्रोदा , सुमन दुबे , सुनील भंडारी , यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी बनाने का प्रस्ताव दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को जस्टिस मनोज जैन की बेंच के समक्ष होगी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित अन्य प्रतिवादियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। यह याचिका कथित नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने ईडी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था।

मामले की पृष्ठभूमि

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत ईडी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से यह कहते हुए इनकार किया था कि यह कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। ट्रायल कोर्ट का तर्क था कि पीएमएलए के तहत अभियोजन शिकायत किसी निजी शिकायत से उत्पन्न 'अनुसूचित अपराध' पर आधारित नहीं हो सकती।

ईडी ने इसी आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने पीएमएलए की व्याख्या में गंभीर भूल की है।

ईडी का कानूनी तर्क

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि यदि ट्रायल कोर्ट की व्याख्या को बरकरार रखा जाता है, तो पीएमएलए 'बेकार और अनावश्यक' हो जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि पीएमएलए में मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के पंजीकरण के लिए कोई विशिष्ट तरीका निर्धारित नहीं किया गया है — इसके लिए केवल किसी 'अनुसूचित अपराध' से जुड़ी आपराधिक गतिविधि का आरोप पर्याप्त है।

ईडी के अनुसार, किसी सक्षम अदालत द्वारा निजी शिकायत पर लिया गया संज्ञान पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के समान महत्व रखता है, और आपराधिक कार्यवाही पुलिस जाँच अथवा मजिस्ट्रेट के समक्ष निजी शिकायत — दोनों माध्यमों से शुरू की जा सकती है।

आरोपी पक्ष और प्रतिवादी

ईडी ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस ओवरसीज चीफ सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, संस्था यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाने का प्रस्ताव दिया है।

अदालत का रुख और अगली सुनवाई

जस्टिस मनोज जैन की सिंगल-जज बेंच ने ईडी की दलीलें सुनने के बाद माना कि मामले पर विचार आवश्यक है और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। अब प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब रिकॉर्ड पर रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की गई है।

यह मामला उस व्यापक कानूनी विवाद का हिस्सा है जिसमें ईडी का आरोप है कि नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ी संपत्तियों के हस्तांतरण में मनी लॉन्ड्रिंग की गई — एक आरोप जिसे कांग्रेस नेताओं ने शुरू से राजनीति से प्रेरित बताया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसका फैसला देशभर में पीएमएलए के तहत दर्ज सैकड़ों मामलों की नींव को प्रभावित कर सकता है। गौरतलब है कि यह मामला वर्षों से अदालती पेचीदगियों में उलझा है, और हर सुनवाई राजनीतिक रंग लेती है — जबकि असली कानूनी सवाल अक्सर सुर्खियों में दब जाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल हेराल्ड केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने 27 जुलाई को क्या आदेश दिया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य प्रतिवादियों को ईडी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को जस्टिस मनोज जैन की बेंच के समक्ष होगी।
ईडी ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका क्यों दायर की?
ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट के 16 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कोर्ट ने पीएमएलए के तहत ईडी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। ईडी का तर्क है कि ट्रायल कोर्ट ने पीएमएलए की गलत व्याख्या की है।
नेशनल हेराल्ड मामले में किन-किन लोगों को आरोपी बनाने का प्रस्ताव है?
ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस ओवरसीज चीफ सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को इस मामले में आरोपी बनाने का प्रस्ताव दिया है।
पीएमएलए और निजी शिकायत पर ईडी का क्या तर्क है?
ईडी का कहना है कि पीएमएलए में मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के पंजीकरण के लिए कोई विशिष्ट तरीका तय नहीं है — केवल किसी 'अनुसूचित अपराध' से जुड़ी आपराधिक गतिविधि का आरोप पर्याप्त है। एजेंसी के अनुसार, किसी सक्षम अदालत द्वारा निजी शिकायत पर लिया गया संज्ञान पुलिस की एफआईआर के समान वैध आधार है।
नेशनल हेराल्ड केस में अब आगे क्या होगा?
प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब हाई कोर्ट में दाखिल करना होगा। इसके बाद 10 सितंबर को अगली सुनवाई होगी, जिसमें अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर आगे की कार्यवाही तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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