डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर एकनाथ शिंदे का शोक — 'ठाणे ने खोया अपना प्रिय पुत्र'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 15 मई 2026 को वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि महाराष्ट्र ने एक बहुआयामी प्रतिभा को खो दिया है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने संदेश में शिंदे ने नाडकर्णी को मनोचिकित्सक, साहित्यकार, नाटककार और समाजसेवक के रूप में याद किया।
शिंदे की श्रद्धांजलि
शिंदे ने लिखा, 'वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन का समाचार अत्यंत चौंकाने वाला है। असीम ऊर्जा और हंसमुख व्यक्तित्व के धनी डॉ. नाडकर्णी ठाणे के प्रिय पुत्र थे।' उन्होंने कहा कि डॉ. नाडकर्णी का जाना एक अपूरणीय क्षति है — न केवल चिकित्सा जगत के लिए, बल्कि साहित्य, रंगमंच और समाजसेवा के क्षेत्र के लिए भी।
साढ़े तीन दशकों की अथक सेवा
शिंदे के अनुसार, पिछले साढ़े तीन दशकों से डॉ. नाडकर्णी ने मनोचिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया। 'सभी के लिए एक स्वस्थ मन' के आदर्श को जीते हुए उन्होंने 'इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलॉजी' की स्थापना की। हजारों मानसिक रूप से अस्थिर लोगों को स्थिरता देकर वे उनके परिवारों के विश्वस्त सहयोगी बन गए।
इसके अतिरिक्त, दिवंगत डॉ. सुनंदा अवचट के सहयोग से उन्होंने पुणे में नशामुक्ति केंद्र 'मुक्तांगन' की स्थापना की। शिंदे ने कहा कि इन दोनों संस्थाओं द्वारा दी गई सेवा स्वयंसेवी संगठनों के लिए एक आदर्श उदाहरण है।
साहित्य और रंगमंच में योगदान
मनोचिकित्सा के प्रति पूर्ण समर्पण के बावजूद डॉ. नाडकर्णी का रचनात्मक पक्ष कभी मद्धम नहीं पड़ा। उनकी लगभग 27 प्रकाशित कृतियाँ — जिनमें 'गड्डे पंचविशी', 'वैद्यक सत्ता', 'शहाण्यांचा साइकियाट्रिस्ट' और 'मन मैत्रीच्या प्रदेशात' प्रमुख हैं — पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहीं और चिंतन को प्रेरित करती रहीं।
रंगमंच की दुनिया में भी उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी। 'जन्म रहस्य', 'त्या तिघांची गोष्ट' और 'रंग माझा वेगळा' जैसे नाटकों ने दर्शकों का दिल जीता। कॉलेज के दिनों से ही उनके भीतर का लेखक और नाटककार जीवंत रहा।
बहुआयामी व्यक्तित्व की विदाई
शिंदे ने डॉ. नाडकर्णी को मनोचिकित्सक, साहित्यकार, कवि, नाटककार, अभिनेता, संगीतकार, तबला वादक, चित्रकार, समाजसेवक और दर्शनशास्त्र के सक्रिय अभ्यासी के रूप में याद किया। उन्होंने कहा, 'मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।' महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन में डॉ. नाडकर्णी की यह अनुपस्थिति लंबे समय तक महसूस की जाती रहेगी।