डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर एकनाथ शिंदे का शोक — 'ठाणे ने खोया अपना प्रिय पुत्र'

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डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर एकनाथ शिंदे का शोक — 'ठाणे ने खोया अपना प्रिय पुत्र'

सारांश

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन को 'अपूरणीय क्षति' बताया। साढ़े तीन दशकों की सेवा, 27 प्रकाशित कृतियाँ और 'मुक्तांगन' जैसी संस्था — नाडकर्णी का व्यक्तित्व महाराष्ट्र के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा था।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 15 मई 2026 को वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ.
आनंद नाडकर्णी के निधन पर शोक व्यक्त किया।
नाडकर्णी ने साढ़े तीन दशकों तक मनोचिकित्सा के क्षेत्र में अथक सेवा की और 'इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलॉजी' की स्थापना की।
सुनंदा अवचट के सहयोग से उन्होंने पुणे में नशामुक्ति केंद्र 'मुक्तांगन' की नींव रखी।
उनकी लगभग 27 प्रकाशित कृतियाँ और 'जन्म रहस्य' , 'रंग माझा वेगळा' जैसे नाटक मराठी साहित्य-रंगमंच की धरोहर हैं।
शिंदे ने उन्हें मनोचिकित्सक, कवि, नाटककार, तबला वादक और चित्रकार — एक बहुआयामी व्यक्तित्व — के रूप में याद किया।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 15 मई 2026 को वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि महाराष्ट्र ने एक बहुआयामी प्रतिभा को खो दिया है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने संदेश में शिंदे ने नाडकर्णी को मनोचिकित्सक, साहित्यकार, नाटककार और समाजसेवक के रूप में याद किया।

शिंदे की श्रद्धांजलि

शिंदे ने लिखा, 'वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन का समाचार अत्यंत चौंकाने वाला है। असीम ऊर्जा और हंसमुख व्यक्तित्व के धनी डॉ. नाडकर्णी ठाणे के प्रिय पुत्र थे।' उन्होंने कहा कि डॉ. नाडकर्णी का जाना एक अपूरणीय क्षति है — न केवल चिकित्सा जगत के लिए, बल्कि साहित्य, रंगमंच और समाजसेवा के क्षेत्र के लिए भी।

साढ़े तीन दशकों की अथक सेवा

शिंदे के अनुसार, पिछले साढ़े तीन दशकों से डॉ. नाडकर्णी ने मनोचिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया। 'सभी के लिए एक स्वस्थ मन' के आदर्श को जीते हुए उन्होंने 'इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलॉजी' की स्थापना की। हजारों मानसिक रूप से अस्थिर लोगों को स्थिरता देकर वे उनके परिवारों के विश्वस्त सहयोगी बन गए।

इसके अतिरिक्त, दिवंगत डॉ. सुनंदा अवचट के सहयोग से उन्होंने पुणे में नशामुक्ति केंद्र 'मुक्तांगन' की स्थापना की। शिंदे ने कहा कि इन दोनों संस्थाओं द्वारा दी गई सेवा स्वयंसेवी संगठनों के लिए एक आदर्श उदाहरण है।

साहित्य और रंगमंच में योगदान

मनोचिकित्सा के प्रति पूर्ण समर्पण के बावजूद डॉ. नाडकर्णी का रचनात्मक पक्ष कभी मद्धम नहीं पड़ा। उनकी लगभग 27 प्रकाशित कृतियाँ — जिनमें 'गड्डे पंचविशी', 'वैद्यक सत्ता', 'शहाण्यांचा साइकियाट्रिस्ट' और 'मन मैत्रीच्या प्रदेशात' प्रमुख हैं — पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहीं और चिंतन को प्रेरित करती रहीं।

रंगमंच की दुनिया में भी उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी। 'जन्म रहस्य', 'त्या तिघांची गोष्ट' और 'रंग माझा वेगळा' जैसे नाटकों ने दर्शकों का दिल जीता। कॉलेज के दिनों से ही उनके भीतर का लेखक और नाटककार जीवंत रहा।

बहुआयामी व्यक्तित्व की विदाई

शिंदे ने डॉ. नाडकर्णी को मनोचिकित्सक, साहित्यकार, कवि, नाटककार, अभिनेता, संगीतकार, तबला वादक, चित्रकार, समाजसेवक और दर्शनशास्त्र के सक्रिय अभ्यासी के रूप में याद किया। उन्होंने कहा, 'मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।' महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन में डॉ. नाडकर्णी की यह अनुपस्थिति लंबे समय तक महसूस की जाती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत प्रेरणा के रूप में देखा जाए।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. आनंद नाडकर्णी कौन थे?
डॉ. आनंद नाडकर्णी महाराष्ट्र के वरिष्ठ मनोचिकित्सक थे, जिन्होंने साढ़े तीन दशकों तक मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य किया। वे 'इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलॉजी' के संस्थापक और पुणे के नशामुक्ति केंद्र 'मुक्तांगन' के सह-संस्थापक भी थे।
एकनाथ शिंदे ने डॉ. नाडकर्णी को किस रूप में याद किया?
उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें मनोचिकित्सक, साहित्यकार, कवि, नाटककार, अभिनेता, संगीतकार, तबला वादक, चित्रकार और समाजसेवक के रूप में याद किया। शिंदे ने उनके निधन को 'अपूरणीय क्षति' बताया।
'मुक्तांगन' क्या है और इसकी स्थापना किसने की?
'मुक्तांगन' पुणे स्थित एक नशामुक्ति केंद्र है, जिसकी स्थापना डॉ. आनंद नाडकर्णी ने दिवंगत डॉ. सुनंदा अवचट के सहयोग से की थी। यह केंद्र स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए एक आदर्श उदाहरण माना जाता है।
डॉ. नाडकर्णी की प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ कौन-सी हैं?
उनकी लगभग 27 प्रकाशित कृतियों में 'गड्डे पंचविशी', 'वैद्यक सत्ता', 'शहाण्यांचा साइकियाट्रिस्ट' और 'मन मैत्रीच्या प्रदेशात' प्रमुख हैं। रंगमंच पर 'जन्म रहस्य', 'त्या तिघांची गोष्ट' और 'रंग माझा वेगळा' जैसे नाटकों ने भी दर्शकों का दिल जीता।
डॉ. नाडकर्णी का मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या योगदान रहा?
'सभी के लिए एक स्वस्थ मन' के आदर्श को अपनाते हुए उन्होंने हजारों मानसिक रूप से अस्थिर लोगों को स्थिरता प्रदान की। 'इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलॉजी' की स्थापना के ज़रिए उन्होंने मनोचिकित्सा को आम जन तक पहुँचाने का कार्य किया।
राष्ट्र प्रेस
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