फौजिया खान: हम महिला आरक्षण के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं
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नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एनसीपी (एसपी) की प्रमुख और पूर्व सांसद फौजिया खान ने महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में कहा कि जब यह विधेयक पहले संसद में पारित हुआ था, तब सभी ने इसका समर्थन किया। हम इस मुद्दे पर वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं।
फौजिया खान ने बताया कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने इस विधेयक का स्वागत किया था। एकजुटता से यह विधेयक पास हुआ था। उस समय उन्होंने दो शर्तें रखी थीं कि परिसीमन होगा और जनगणना के बाद ही यह लागू किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि अब जब पांच राज्यों के चुनाव नजदीक हैं, तब उन्होंने महसूस किया कि महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया गया। तीन वर्षों तक यह मामला रुका रहा। अब उन्होंने निर्णय लिया है कि जनगणना की आवश्यकता नहीं है और 2011 की जनगणना के आधार पर काम होगा। इस समय उन्होंने एक नया फॉर्मूला तैयार कर लिया है, लेकिन पहले यह फॉर्मूला क्यों नहीं निकाला गया, यह सवाल उठता है।
फौजिया खान ने कहा कि यदि उनकी ईमानदारी थी, तो पहले यह फॉर्मूला क्यों नहीं निकाला गया? अब एक नया इवेंट और नया संसद सत्र आ रहा है, इससे उनकी मंशा संदिग्ध लगती है। महिलाओं की सीटों में वृद्धि के बारे में उन्होंने कहा कि हम इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जिस तरह से सरपंच पति काम कर रहे हैं, वह सही नहीं है। महिलाओं का नाम है, लेकिन काम पुरुष कर रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिलाएं स्वतंत्रता से कार्य करें।
फौजिया खान ने यह भी बताया कि संसद में महिलाओं को बोलने का कितना समय दिया जाता है? यह सबसे बड़ा मुद्दा है। हम संसद में उपस्थित रहेंगे लेकिन हमारे पास कोई अधिकार नहीं होगा। हमें बात करने का समय नहीं दिया जाएगा। हमारी आवाज को सुना नहीं जाएगा। नीतियों में हमारी कोई भागीदारी नहीं होगी। महिलाओं को इन सब में अवसर दिए जाने चाहिए।