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बेंगलुरु: फोर्टिस अस्पताल ने मृत मरीज की ₹1.80 लाख की राडो घड़ी गायब होने के आरोपों से किया इनकार

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बेंगलुरु: फोर्टिस अस्पताल ने मृत मरीज की ₹1.80 लाख की राडो घड़ी गायब होने के आरोपों से किया इनकार

सारांश

सामाजिक कार्यकर्ता के. रामैया की मौत के बाद उनकी ₹1.80 लाख की राडो घड़ी गायब होने का मामला बेंगलुरु में तूल पकड़ रहा है। फोर्टिस अस्पताल ने आरोपों से इनकार किया है, लेकिन बेटी अनीता की भावुक अपील और पुलिस एफआईआर ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

फोर्टिस अस्पताल, नगरभावी ने सामाजिक कार्यकर्ता के.
रामैया की ₹1.80 लाख की राडो घड़ी गायब होने के आरोपों से इनकार किया।
अस्पताल के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को शव सौंपे जाने के समय परिवार ने कोई शिकायत नहीं की थी।
औपचारिक शिकायत दो महीने बाद, 24 अप्रैल 2026 को दर्ज हुई, जब 30 दिन की सीसीटीवी रिटेंशन नीति के कारण फुटेज उपलब्ध नहीं था।
गोविंदराजनगर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
बेटी अनीता रामैया ने वीडियो जारी कर घड़ी को 'पिता की आखिरी याद' बताते हुए वापसी की अपील की।

फोर्टिस अस्पताल, नगरभावी (बेंगलुरु) ने शुक्रवार, 22 मई 2026 को एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि सामाजिक कार्यकर्ता के. रामैया के इलाज के दौरान उनकी ₹1.80 लाख की राडो घड़ी और एक आधी आस्तीन का स्वेटर कथित तौर पर गायब हो गए। यह बयान तब आया जब रामैया की बेटी अनीता रामैया ने एक भावुक वीडियो जारी कर घड़ी वापस लौटाने की अपील की और पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली।

मामले की पृष्ठभूमि

अनीता रामैया के अनुसार, उनके पिता के. रामैया 15 जनवरी 2026 को अचानक बेहोश हो गए थे। पहले उन्हें एक अन्य निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर प्राथमिक उपचार देने से इनकार किया गया, जिसके बाद उन्हें फोर्टिस अस्पताल, नगरभावी लाया गया। अनीता का कहना है कि उस समय उनके पिता के पास राडो घड़ी और एक आधी आस्तीन का स्वेटर था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद शव सौंपे जाने पर ये दोनों चीजें नदारद थीं।

अस्पताल का स्पष्टीकरण

अस्पताल प्रशासन ने दिवंगत के. रामैया के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उसने मामले की आंतरिक जांच की है और उपलब्ध सभी जानकारी परिवार तथा पुलिस के साथ साझा की है। अस्पताल ने बताया कि 15 जनवरी 2026 को शव सौंपे जाने के समय परिवार की ओर से किसी भी कीमती सामान के गायब होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

अस्पताल ने कहा, 'घड़ी और स्वेटर के गायब होने की औपचारिक शिकायत दो महीने से अधिक बाद, 24 अप्रैल 2026 को दी गई, जबकि अस्पताल की 30 दिन की सीसीटीवी डेटा रिटेंशन नीति के कारण उस समय तक संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।' अस्पताल ने यह भी स्पष्ट किया कि रामैया पहले किसी अन्य स्वास्थ्य संस्थान में गए थे और उसके बाद उन्हें नगरभावी लाया गया था।

परिवार की पीड़ा

अनीता रामैया ने वीडियो में कहा, 'मुझे बस अपने पिता की घड़ी वापस चाहिए। यह कीमत की बात नहीं है, यह यादों की बात है। मैं अभी भी अपने पिता की मौत के सदमे से उबर नहीं पाई हूँ।' उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार अस्पताल और पुलिस से सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने और जांच में तेजी लाने की माँग की, परंतु संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

पुलिस जांच

गोविंदराजनगर पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने पुष्टि की है कि मामले की आगे जांच जारी है।

अस्पताल की चेतावनी और आगे की स्थिति

फोर्टिस अस्पताल ने कहा कि मामला फिलहाल पुलिस जांच के अधीन है और वह पूरी तरह सहयोग कर रहा है। अस्पताल ने 'अनुमानित और बिना पुष्टि वाले आरोपों' से बचने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि ऐसे दावे मानहानि की श्रेणी में आ सकते हैं। पुलिस जांच के नतीजे ही यह तय करेंगे कि घड़ी और स्वेटर कहाँ गए और इसकी ज़िम्मेदारी किस पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन शोक की अवस्था में दो महीने की देरी असामान्य नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या अस्पतालों को मृत मरीजों की कीमती वस्तुओं की सूची और हिरासत-श्रृंखला (chain of custody) के लिए कोई मानक प्रोटोकॉल अपनाना चाहिए — जो फिलहाल भारत में अधिकांश निजी अस्पतालों में अनिवार्य नहीं है। यह मामला अकेला नहीं है; मरीजों के परिजन अक्सर ऐसी शिकायतें लेकर पुलिस तक पहुँचते हैं जहाँ साक्ष्य पहले ही नष्ट हो चुके होते हैं।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

के. रामैया की राडो घड़ी गायब होने का मामला क्या है?
बेंगलुरु के सामाजिक कार्यकर्ता के. रामैया की 15 जनवरी 2026 को फोर्टिस अस्पताल, नगरभावी में मृत्यु के बाद उनकी परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी ₹1.80 लाख की राडो घड़ी और एक स्वेटर गायब हो गए। अस्पताल ने इन आरोपों से इनकार किया है और पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
फोर्टिस अस्पताल ने आरोपों पर क्या कहा?
अस्पताल ने कहा कि शव सौंपे जाने के समय परिवार ने कोई शिकायत नहीं की थी और औपचारिक शिकायत दो महीने बाद 24 अप्रैल 2026 को आई, जब 30 दिन की सीसीटीवी रिटेंशन नीति के कारण फुटेज उपलब्ध नहीं था। अस्पताल ने आंतरिक जांच करने और पुलिस को सहयोग देने की बात कही।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
गोविंदराजनगर पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने पुष्टि की है कि जांच जारी है।
अनीता रामैया ने क्या अपील की है?
अनीता रामैया ने एक वीडियो जारी कर अपने पिता की घड़ी वापस लौटाने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि घड़ी उनके पिता की आखिरी यादों में से एक है और उन्होंने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की माँग भी की है।
क्या अस्पताल मरीजों की कीमती वस्तुओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है?
भारत में निजी अस्पतालों के लिए मृत मरीजों की कीमती वस्तुओं की हिरासत-श्रृंखला (chain of custody) रखने का कोई एकसमान अनिवार्य प्रोटोकॉल नहीं है। यह मामला ऐसी नीतिगत खामी को उजागर करता है जिसमें साक्ष्य संरक्षण की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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