राजस्थान: बयाना के पूर्व विधायक अत्तर सिंह भड़ाना हत्याकांड में 4 गिरफ्तार, माइनिंग विवाद से जुड़ा मामला
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के भरतपुर जिले में बयाना के पूर्व विधायक अत्तर सिंह भड़ाना की हत्या के मामले में पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियाँ दोषियों को सजा दिलाने के लिए अधिकारियों पर बढ़ते दबाव के बीच हुई हैं। पुलिस के अनुसार मामला एक माइनिंग लीज और क्रशर संचालन को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की पहचान भागमल गुर्जर, सोनी गुर्जर, शेर सिंह गुर्जर और कुंवर सिंह गुर्जर के रूप में हुई है। इनमें से तीन भौंडा गाँव के निवासी हैं, जबकि चौथा आरोपी नवार गाँव का रहने वाला है। जाँच के दौरान पुलिस ने पहले भी कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।
घटनाक्रम: कैसे हुई पूर्व विधायक की हत्या
शिकायत के अनुसार, घटना से एक दिन पहले माइनिंग लीज और क्रशर साइट से जुड़े पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसके चलते वैर पुलिस स्टेशन में मामला भी दर्ज किया गया। अगले दिन कथित तौर पर माइनिंग परिसर पर हमला हुआ।
शिकायत में कहा गया है कि लगभग 70 से 80 लोगों का एक समूह माइनिंग लीज और क्रशर परिसर में जबरन घुसा और मारपीट, पत्थरबाजी, गोलीबारी तथा आगजनी की। शिकायतकर्ता के अनुसार, हमलावरों का उद्देश्य क्रशर यूनिट को नष्ट करना था। इस दौरान अत्तर सिंह भड़ाना पर भी हमला हुआ — आरोप है कि उनके हाथ-पैर तोड़ दिए गए और सिर पर धारदार कृषि औज़ार 'गंडासा' से वार किया गया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें जयपुर रेफर किया गया, जहाँ रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। ये आरोप शिकायत का हिस्सा हैं और इनकी जाँच अभी जारी है।
पीड़िता की शिकायत और आरोपों का दायरा
पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना ने वैर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें 30 नामजद व्यक्तियों के साथ-साथ 50 से 60 अज्ञात लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। यह शिकायत इस हत्याकांड की विस्तृत जाँच का आधार है।
इलाके में तनाव और ग्रामीणों का पलायन
पूर्व विधायक की मृत्यु के बाद से भरतपुर के इस इलाके में तनाव और सन्नाटा पसरा हुआ है। जानकारी के अनुसार, कई ग्रामीणों को हिरासत में लिए जाने के बाद भौंडा गाँव के कई निवासियों ने घरों पर ताला लगाकर अस्थायी रूप से गाँव छोड़ दिया।
आगे की जाँच का रुख
चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जाँच अब इस बात पर केंद्रित होगी कि उनकी कथित भूमिका क्या थी और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। अधिकारियों के सामने यह स्पष्ट करना अहम होगा कि माइनिंग विवाद से हत्या तक की कड़ी में कौन-कौन शामिल रहे। जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ेगी, गिरफ्तार आरोपियों के अतिरिक्त अन्य संदिग्धों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।