अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड: पोस्टमार्टम में 40 से अधिक चोटें, दोनों हाथ और दाहिना पैर फ्रैक्चर
सारांश
मुख्य बातें
बयाना के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के मामले में जयपुर के मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में बड़ा खुलासा हुआ है — उनके शरीर पर 40 से अधिक चोटों के निशान पाए गए हैं। मेडिकल जाँच के अनुसार, दोनों हाथों और दाहिने पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है, जबकि सिर पर लगी गहरी चोट को मौत का कारण बताया गया है। यह हमला राजस्थान के भरतपुर जिले के भोडा गाँव स्थित एक माइनिंग साइट पर हुआ था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अहम निष्कर्ष
जयपुर के मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम जाँच में पाया कि भड़ाना के शरीर पर 40 से अधिक चोटें थीं, जो अत्यधिक क्रूरता के साथ किए गए हमले की गंभीरता को उजागर करती हैं। दोनों हाथों और दाहिने पैर में फ्रैक्चर पाए गए, जो बताता है कि हमले के दौरान बचाव की भी कोशिश की गई थी।
शुरुआती अटकलों के विपरीत, एक्स-रे और पोस्टमार्टम जाँच में गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई। रिपोर्टों के अनुसार, हमलावरों ने लाठी, डंडे और अन्य हथियारों का इस्तेमाल किया था।
घटना का विवरण और संदिग्ध मकसद
यह हमला भरतपुर जिले के वेर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले भोडा गाँव की एक माइनिंग साइट पर हुआ। जाँचकर्ता इस हत्या के पीछे माइनिंग लीज़ और स्टोन क्रशर यूनिट के संचालन से जुड़े पुराने विवाद को संभावित मकसद के रूप में देख रहे हैं।
भड़ाना के परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि हमलावर उन्हें और उनके कर्मचारियों को जिंदा जलाने का इरादा रखते थे। परिवार के अनुसार, घटना के बाद माइनिंग साइट पर बने कार्यालय और आवासीय स्थानों में आग लगा दी गई।
एफआईआर और आरोपी
भड़ाना की पत्नी कमलेश भड़ाना ने वेर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें 30 नामजद व्यक्तियों और 50-60 अज्ञात लोगों पर मारपीट, पत्थरबाजी, फायरिंग और आगजनी का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में नामजद आरोपियों में मुकेश (हरज्ञान का बेटा), राजवीर उर्फ मग्गू, जगत, बाबू, बनवारी, भागचंद, विष्णु, हेमसिंह, कौशल, अवतार, शिव सिंह, जितेंद्र और संजय शामिल हैं।
पुलिस ने अब तक 94 से अधिक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और मामले की जाँच जारी है। हालाँकि, आरोपों की अदालती पुष्टि अभी बाकी है।
परिवार की माँग और आगे की कार्रवाई
भड़ाना के परिवार ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जाँच की माँग की है, यह कहते हुए कि स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जाँच की उम्मीद नहीं है। गौरतलब है कि यह मामला राजस्थान में माइनिंग विवादों से जुड़ी हिंसा की एक गंभीर कड़ी के रूप में सामने आया है।
पुलिस जाँच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।