क्या गौडगेरे चामुंडेश्वरी मंदिर में बुरी नजर और काला जादू से छुटकारा पाने के लिए भक्त आते हैं?
सारांश
Key Takeaways
- गौडगेरे चामुंडेश्वरी मंदिर कर्नाटक में है।
- यहां बुरी नजर और काला जादू से मुक्ति के लिए भक्त आते हैं।
- मंदिर में 60 फुट ऊंची मूर्ति है।
- भक्त नमक और नारियल चढ़ाते हैं।
- नंदी महाराज का आशीर्वाद महत्वपूर्ण माना जाता है।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत में मां भगवती के अनेक रूपों के शक्तिपीठ और सिद्धपीठ हैं, जो अपनी विशेष मान्यताओं के लिए विख्यात हैं।
कर्नाटक के रामनगर जिले में मां भगवती का एक ऐसा मंदिर है, जहां भक्त बुरी नजर और टोने-टोटके से मुक्ति पाने के लिए देश के हर कोने से आते हैं। मां चामुंडेश्वरी का यह मंदिर कई रहस्यमयी कथाओं से भरा हुआ है।
गौडगेरे गांव में स्थित मां गौडगेरे चामुंडेश्वरी मंदिर देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित है। इस मंदिर के परिसर में कई अद्भुत रहस्य छिपे हुए हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर देवी चामुंडेश्वरी की 60 फुट ऊंची पंच धातुओं की मूर्ति स्थापित है, जिसमें मां की 18 भुजाएं हैं और सभी में अस्त्र-शस्त्र मौजूद हैं। यह प्रतिमा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है, लेकिन असली रहस्य मंदिर के गर्भगृह में है, जहां मां की प्राचीन प्रतिमा विराजमान है।
यह माना जाता है कि यदि किसी पर काला जादू-टोना हुआ है या वह बुरी नजर से परेशान है, तो मंदिर में मां चामुंडेश्वरी के सामने नमक चढ़ाने से सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। भक्त यहां मां के नाम से नमक चढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त, विशेष मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए भक्त नारियल भी चढ़ाते हैं और कर्ज से मुक्ति के लिए एक चमत्कारी पत्थर पर सिक्का चिपकाते हैं। कर्ज मुक्ति के लिए भक्त मंदिर में अनुष्ठान भी कराते हैं।
मंदिर में एक नंदी महाराज भी निवास करते हैं। मान्यता है कि जिनको भी नंदी महाराज का आशीर्वाद मिलता है, उनके सारे दुख दूर हो जाते हैं। भक्त नंदी महाराज के चरणों में लेटकर आशीर्वाद लेते हैं।
माना जाता है कि मां के दर्शन के बाद नंदी महाराज के दर्शन करना अनिवार्य है। नंदी महाराज गर्भगृह में जाकर पहले मां चामुंडेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और फिर भक्तों को दर्शन देते हैं। नंदी महाराज के साथ हमेशा एक व्यक्ति रहता है, जो उन्हें नोटों से सजाता है।
मंदिर के बारे में एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि वर्षों पहले एक किसान को अपने खेत में मां चामुंडेश्वरी की स्वयंभू प्रतिमा मिली थी। किसान को मां ने स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर बनाने का निर्देश दिया था।