17 अक्टूबर 2026
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गुवाहाटी हाईकोर्ट का असम विश्वविद्यालय के कुलपति राजीव मोहन पंत को निर्देश, यूजीसी नियम उल्लंघन पर पद छोड़ें

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गुवाहाटी हाईकोर्ट का असम विश्वविद्यालय के कुलपति राजीव मोहन पंत को निर्देश, यूजीसी नियम उल्लंघन पर पद छोड़ें

सारांश

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने 14 अक्टूबर को असम विश्वविद्यालय के कुलपति राजीव मोहन पंत को यूजीसी नियमों के कथित उल्लंघन पर इस्तीफा देने का निर्देश दिया। यह मामला केंद्रीय विश्वविद्यालय नियुक्तियों की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2026 को असम विश्वविद्यालय के कुलपति राजीव मोहन पंत को पद से इस्तीफा देने का निर्देश दिया।
नियुक्ति पर यूजीसी के पात्रता मानदंडों और निर्धारित प्रक्रियाओं के कथित उल्लंघन का आरोप है।
न्यायालय ने कुलपति को अब तक अदा वेतन की वसूली का प्रश्न भी उठाया है।
विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार प्रदोश किरणनाथ के अनुसार मामले की जानकारी नई दिल्ली स्थित वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है।
विश्वविद्यालय आगे की कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा है।

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2026 को सिलचर स्थित असम विश्वविद्यालय के कुलपति राजीव मोहन पंत को पद से इस्तीफा देने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह आदेश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के कथित उल्लंघन के आधार पर जारी किया है, जिससे इस केंद्रीय विश्वविद्यालय की शीर्ष नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले का मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, कुलपति पद पर राजीव मोहन पंत की नियुक्ति को इस आधार पर न्यायालय में चुनौती दी गई थी कि नियुक्ति के दौरान यूजीसी द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए 14 अक्टूबर को यह ऐतिहासिक निर्देश जारी किया।

न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि कुलपति को अब तक अदा किए गए वेतन की वसूली का प्रश्न भी विचाराधीन है। हालांकि, आदेश के सटीक कानूनी निहितार्थ आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेंगे।

विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रदोश किरणनाथ ने बताया कि उच्च न्यायालय के इस निर्देश की जानकारी नई दिल्ली स्थित वरिष्ठ केंद्रीय अधिकारियों को दे दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन अगले कदम तय करने से पहले केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा है।

गौरतलब है कि चूँकि असम विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, इसके कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की भी भूमिका होती है। इस विवाद ने मंत्रालय को भी जाँच के दायरे में ला दिया है।

यूजीसी नियमों का राष्ट्रव्यापी संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर के विश्वविद्यालयों में वरिष्ठ शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियों में यूजीसी नियमों के अनुपालन को लेकर बहस तेज हुई है। यह पहली बार नहीं है कि किसी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को न्यायालय में चुनौती दी गई हो — कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में इसी तरह के विवाद सामने आ चुके हैं। इन सभी मामलों की जड़ में वही प्रश्न रहा है: क्या नियुक्ति समिति ने यूजीसी विनियमों का शब्दशः पालन किया?

आम जनता और छात्रों पर असर

असम विश्वविद्यालय असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के हजारों छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करता है। शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व में संभावित बदलाव का असर विश्वविद्यालय के दैनिक प्रशासन, चल रहे शैक्षणिक कार्यक्रमों और भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शीर्ष पद की अनिश्चितता की स्थिति में संस्थागत निर्णय-प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है, जिसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों और शैक्षणिक कर्मचारियों को उठाना पड़ता है।

आगे क्या होगा

न्यायालय के निर्देशों पर केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। कुलपति द्वारा इस्तीफे या किसी कानूनी पुनर्विचार याचिका दायर करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पूरे प्रकरण के निष्पर्ष पर देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की नियुक्ति नीतियों पर भी असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या प्रत्येक मामले को अदालती आदेश तक पहुँचने देगा। पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए यह प्रशासनिक अनिश्चितता की कीमत चुकाने वाला असल नुकसान है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम विश्वविद्यालय के कुलपति को पद छोड़ने का निर्देश क्यों दिया?
न्यायालय ने कथित तौर पर यूजीसी के पात्रता मानदंडों और निर्धारित नियुक्ति प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आधार पर 14 अक्टूबर 2026 को यह निर्देश जारी किया। कुलपति राजीव मोहन पंत की नियुक्ति को इन्हीं आधारों पर न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
असम विश्वविद्यालय के कुलपति कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
असम विश्वविद्यालय, सिलचर के कुलपति राजीव मोहन पंत हैं। उन पर आरोप है कि उनकी नियुक्ति के समय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन नहीं किया गया। न्यायालय ने उन्हें अदा किए गए वेतन की संभावित वसूली का प्रश्न भी उठाया है।
इस मामले में केंद्र सरकार की क्या भूमिका है?
असम विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, इसलिए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की भी भूमिका होती है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रदोश किरणनाथ ने बताया कि मामले की जानकारी नई दिल्ली स्थित वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है और विश्वविद्यालय केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा है।
इस विवाद का असम विश्वविद्यालय के छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
असम विश्वविद्यालय असम और पूर्वोत्तर के हजारों छात्रों की उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। शीर्ष नेतृत्व में बदलाव की स्थिति में विश्वविद्यालय का प्रशासन, शैक्षणिक कार्यक्रम और भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
क्या भारत में इस तरह के कुलपति नियुक्ति विवाद पहले भी हुए हैं?
हाँ, ऐसे मामले देशभर के कई केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में पहले भी सामने आ चुके हैं। कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में यूजीसी मानदंडों के उल्लंघन के आरोप में न्यायालयों ने कुलपतियों की नियुक्ति रद्द की है या पुनर्विचार का आदेश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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