3 सितंबर 2026
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गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर; पोस्ता घाट पर ₹10 लाख का फ्लोटिंग बैरियर एक सप्ताह से खुला, प्रशासन बेखबर

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गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर; पोस्ता घाट पर ₹10 लाख का फ्लोटिंग बैरियर एक सप्ताह से खुला, प्रशासन बेखबर

सारांश

गाजीपुर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर है, और ₹50 लाख में लगाए गए फ्लोटिंग बैरियरों में से पोस्ता घाट का बैरियर एक सप्ताह से खुला है। नगर पालिका को सूचना दी गई, जिलाधिकारी का फोन नहीं उठा — और घाट पर रोज़ाना सैकड़ों लोग आते हैं।

मुख्य बातें

गाजीपुर में गंगा का जलस्तर 3 सितंबर को खतरे के निशान को पार कर गया।
पोस्ता घाट पर लगा फ्लोटिंग बैरियर पिछले करीब एक सप्ताह से एक सिरे से खुला और तेज धारा में असुरक्षित है।
पाँच घाटों पर कुल ₹50 लाख (प्रति घाट ₹10 लाख ) की लागत से बैरियर लगाए गए थे।
स्थानीय लोगों द्वारा नगर पालिका को सूचित किए जाने के बावजूद अब तक कोई मरम्मत नहीं हुई।
स्थानीय पुजारी ने जिलाधिकारी को फोन करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया।
पोस्ता घाट पर प्रतिदिन अंतिम संस्कार और गंगा स्नान के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं।

गाजीपुर में गंगा नदी का जलस्तर 3 सितंबर को खतरे के निशान को पार कर गया है, और ऐसे नाज़ुक समय में पोस्ता घाट पर लगाया गया फ्लोटिंग बैरियर पिछले करीब एक सप्ताह से एक सिरे से खुला हुआ तेज धारा में झूल रहा है। सुरक्षा के नाम पर खर्च किए गए ₹50 लाख की व्यवस्था की यह हालत स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

मुख्य घटनाक्रम

जिलाधिकारी के निर्देश पर गाजीपुर के पाँच प्रमुख गंगा घाटों पर डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए कुल ₹50 लाख की लागत से फ्लोटिंग बैरियर लगाए गए थे — यानी प्रत्येक घाट पर लगभग ₹10 लाख की सुरक्षा व्यवस्था। लेकिन पोस्ता घाट पर इस बैरियर का एक सिरा असुरक्षित है और तेज बहाव में लहराता देखा जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बैरियर का दूसरा सिरा किसी तरह घाट की सीढ़ियों से बाँधकर रखा गया है — यह कोई स्थायी या सुरक्षित व्यवस्था नहीं है। जिस उपकरण का उद्देश्य लोगों को गहरे पानी और तेज बहाव से दूर रखना था, वही अब खुद असुरक्षित स्थिति में है।

प्रशासन को दी गई सूचना, फिर भी कार्रवाई नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका प्रशासन को इस खामी की जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक बैरियर को दुरुस्त नहीं कराया गया। स्थानीय पुजारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी को फोन पर सूचित करने का प्रयास किया, परंतु फोन नहीं उठाया गया। इससे स्थानीय निवासियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

गौरतलब है कि जिलाधिकारी के निर्देश के बाद सभी प्रमुख गंगा घाटों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। लेकिन स्थानीय लोगों का तर्क है कि केवल पुलिस की मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था पूरी नहीं मानी जा सकती — सुरक्षा उपकरणों का दुरुस्त रहना उतना ही ज़रूरी है।

आम जनता पर असर

पोस्ता घाट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार और गंगा स्नान के लिए पहुँचते हैं। गंगा के बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के बीच यदि सुरक्षा उपकरण ही अपनी जगह पर टिके नहीं हैं, तो किसी भी दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब बाढ़ के मौसम में घाटों पर भीड़ सबसे अधिक होती है और दुर्घटनाओं का जोखिम चरम पर होता है।

स्थानीय लोगों की माँग

निवासियों की माँग है कि अधिकारी तत्काल मौके पर पहुँचकर पोस्ता घाट के फ्लोटिंग बैरियर को सुरक्षित कराएँ और सभी पाँच घाटों पर लगाए गए सुरक्षा उपकरणों की जाँच कराएँ। स्थानीय लोगों की तस्वीरें और शिकायतें प्रशासनिक जवाबदेही की माँग को और तेज़ कर रही हैं।

क्या होगा आगे

यदि जलस्तर और बढ़ता है तो घाटों पर भीड़ और जोखिम दोनों बढ़ेंगे। प्रशासन पर दबाव है कि वह न केवल बैरियर को तत्काल ठीक कराए, बल्कि बाकी चार घाटों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा करे। स्थानीय लोगों की नज़र अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह उस पैटर्न की बानगी है जहाँ सरकारी खर्च और ज़मीनी निगरानी के बीच की खाई सबसे अधिक कमज़ोर लोगों की जान को ख़तरे में डालती है। जिलाधिकारी के निर्देश पर लगाए गए उपकरण यदि उन्हीं के फोन न उठाने से बेकार पड़े हैं, तो जवाबदेही की पूरी श्रृंखला पर सवाल उठता है। बाढ़ के मौसम में घाट-सुरक्षा की समीक्षा का कोई स्वतंत्र तंत्र न होना इस चूक की असली जड़ है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजीपुर में गंगा का जलस्तर कितना बढ़ा है?
3 सितंबर को गाजीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। तेज बहाव और बढ़े जलस्तर के कारण घाटों पर सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है।
पोस्ता घाट का फ्लोटिंग बैरियर क्यों खतरनाक है?
पोस्ता घाट पर फ्लोटिंग बैरियर का एक सिरा करीब एक सप्ताह से खुला हुआ है और तेज धारा में असुरक्षित स्थिति में झूल रहा है। जो उपकरण लोगों को गहरे पानी से दूर रखने के लिए लगाया गया था, वही अब खुद अनियंत्रित अवस्था में है।
फ्लोटिंग बैरियर पर कितना खर्च हुआ और किसके निर्देश पर लगाए गए?
जिलाधिकारी के निर्देश पर गाजीपुर के पाँच प्रमुख गंगा घाटों पर कुल ₹50 लाख की लागत से फ्लोटिंग बैरियर लगाए गए — प्रति घाट लगभग ₹10 लाख। इनका उद्देश्य बाढ़ के मौसम में डूबने की घटनाओं को रोकना था।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन को सूचित किया, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय लोगों के अनुसार नगर पालिका प्रशासन को इस खामी की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक बैरियर को दुरुस्त नहीं कराया गया। एक स्थानीय पुजारी ने जिलाधिकारी को फोन करने का प्रयास भी किया, पर फोन नहीं उठाया गया।
पोस्ता घाट पर सुरक्षा की स्थिति इतनी ज़रूरी क्यों है?
पोस्ता घाट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार और गंगा स्नान के लिए आते हैं। गंगा के बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के बीच सुरक्षा उपकरणों का सही स्थिति में रहना जीवन-रक्षा के लिए अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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