बिहार बाढ़: सीएम सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण, गंगा खतरे के निशान से 97 सेमी ऊपर
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार, 24 अगस्त को बाढ़ की गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया। गंगा सहित राज्य की कई प्रमुख नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे पटना, भागलपुर, कटिहार, नवगछिया, बेगूसराय और खगड़िया के दियारा व निचले इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के आँकड़ों के अनुसार, पटना के गांधीघाट पर सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 97 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया।
हवाई सर्वेक्षण और समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण के दौरान गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर, दियारा क्षेत्रों की स्थिति तथा चल रहे राहत एवं बचाव अभियानों का निरीक्षण किया। सर्वेक्षण के बाद भागलपुर एयरपोर्ट पर उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें नदियों के जलस्तर, तटबंधों की स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
हवाई सर्वेक्षण में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक अभियान कुंदन कृष्णन, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नदियों का जलस्तर — ज़िलेवार स्थिति
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 24 अगस्त की सुबह राज्य की प्रमुख नदियाँ निम्न स्तर पर बह रही थीं:
पटना के दीघाघाट पर गंगा खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर और हाथीदह में 75 सेंटीमीटर ऊपर थी। भागलपुर के कहलगांव में गंगा 46 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज हुई। गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक नदी 69 सेंटीमीटर, खगड़िया के बलतारा में कोसी 81 सेंटीमीटर, खगड़िया में बूढ़ी गंडक 29 सेंटीमीटर, कटिहार के कुरसेला में कोसी 34 सेंटीमीटर, सिवान के दरौली में घाघरा 41 सेंटीमीटर और मनेर में सोन नदी 36 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी।
फरक्का बराज के गेट खुले, सुधार की उम्मीद
अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री को बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से वार्ता किए जाने के बाद फरक्का बराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं। इससे गंगा के जलस्तर में शीघ्र कमी आने और बाढ़ की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई गई है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि पानी का दबाव तेजी से घट रहा है।
सरकार के निर्देश और राहत कार्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, राहत सामग्री और अन्य आवश्यक सुविधाएँ समय पर पहुँचाई जाएँ। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की सभी तैयारियाँ पूरी रखी जाएँ और जल संसाधन विभाग तटबंधों की निरंतर निगरानी करे। संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक मरम्मत कार्य तत्काल कराने के भी निर्देश दिए गए।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मानसूनी बाढ़ हर वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करती है और राज्य के उत्तरी व पूर्वी जिले सबसे अधिक संवेदनशील रहते हैं। गौरतलब है कि फरक्का बराज के गेट खोलने के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय इस वर्ष की बाढ़ प्रबंधन रणनीति का एक अहम पहलू रहा। राज्य सरकार की प्राथमिकता अब राहत वितरण और जलस्तर की निरंतर निगरानी पर केंद्रित है।