योगी आदित्यनाथ का गांधी जयंती पर वार: ग्राम स्वराज में परिवारवाद की कोई जगह नहीं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर बिना नाम लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के परिवारवाद पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि गांवों को केवल वोट बैंक मानकर अराजकता और जातिवाद की आग में झोंकने वाली राजनीति ने ग्रामीण विकास को दशकों तक पीछे रखा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'हमारे ग्राम स्वराज में परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं है।'
एक्स पर मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 2017 से पहले गांवों को विकास नहीं, केवल वादे मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में व्यवस्था में न पारदर्शिता थी, न जवाबदेही। उस समय आय और जाति प्रमाण-पत्र जैसी साधारण सुविधाओं के लिए भी ग्रामीणों को तहसील, थाना और जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे।
57,600 ग्राम सचिवालयों से बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गांव को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली इकाई मानती है। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में व्यवस्था में आमूल परिवर्तन आया है। आज 57,600 ग्राम सचिवालयों के माध्यम से ग्रामीणों को गांव में ही सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी तकनीकी पहलों से पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।
रोज़गार सृजन और डिजिटल लाइब्रेरी
योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि ग्राम सचिवालयों के संचालन से प्रत्येक गांव में 5 से 7 रोज़गार के अवसर सृजित हुए हैं। इसके साथ ही 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं, जिससे ग्रामीण युवाओं को शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट महसूस की जा रही है।
गांधी के सपनों का ग्राम स्वराज
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम स्वराज उनके लिए कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के सपनों के आत्मनिर्भर गांव का संकल्प है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश — यही हमारा ग्राम स्वराज है।' गौरतलब है कि गांधी जयंती पर ग्राम स्वराज की भाषा का उपयोग कर विपक्ष पर हमला, भाजपा की उस व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा है जो गांधी की विरासत को अपने विकास-एजेंडे से जोड़ने की कोशिश करती है। आने वाले महीनों में इन योजनाओं के ज़मीनी असर पर विपक्ष की नज़र बनी रहेगी।