CM योगी ने गोरखपुर के वनटांगिया गांव में मनाई दीपावली, करोड़ों की विकास योजनाओं का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 नवंबर 2026 को गोरखपुर के वनटांगिया गांव पहुंचकर वहां के निवासियों के साथ दीपावली का पर्व मनाया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ दीये जलाए, खुशियां साझा कीं और इस वंचित समुदाय के लिए करोड़ों रुपए की विकास परियोजनाओं की घोषणा की। मुख्यमंत्री के पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
मुखिया और परिजनों से मुलाकात
मुख्यमंत्री ने गांव में वनटांगिया समुदाय के मुखिया गणेश मुखिया और उनकी बेटी ममता गौड़ से भेंट की। ग्रामीणों ने उनके सामने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उनके जीवन में गहरा बदलाव आया है। योगी ने बच्चों से बातचीत की, बुजुर्गों का हालचाल पूछा और समस्त ग्रामीणों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री का बयान: 70 साल की वंचना का अंत
पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'आज सुबह मुझे निषाद और दलित समुदायों की बस्तियों में जाने का मौका मिला। मैंने वहां सफाई कर्मचारियों के साथ समय बिताया और उन्हें दीपावली के उपहार दिए।'
उन्होंने कहा, 'पाँच साल पहले तक यहां रहने वाले लोगों की हालत बहुत दयनीय थी। 70 साल तक उन्हें सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और स्वास्थ्य सेवा जैसी बुनियादी जरूरतों से दूर रखा गया और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा गया। यहां तक कि उनका नाम मतदाता सूची में भी शामिल नहीं था।' उन्होंने जोड़ा कि आज ये लोग पंजीकृत मतदाता हैं और सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा रहे हैं।
अयोध्या दीपोत्सव का संदर्भ
मुख्यमंत्री ने कहा, 'कल हमने अयोध्या में बहुत उत्साह के साथ दीपोत्सव मनाया। आज मुझे निषाद और दलित बस्तियों के लोगों तथा स्वच्छताकर्मियों के बीच दीपावली के उपहार बांटने का अवसर मिला।' उन्होंने कामना की कि अयोध्या के दीपोत्सव का प्रकाश हर गांव और हर गरीब परिवार में समृद्धि लाए।
उत्तर प्रदेश के विकास पर जोर
योगी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य विकास, सुशासन और समृद्धि की ओर आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ लगातार दीपावली के अवसर पर वनटांगिया समुदाय के बीच जाते रहे हैं — यह परंपरा उनकी वंचित-समुदाय केंद्रित राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है।
आगे की राह
विकास परियोजनाओं की घोषणा के बाद अब यह देखना होगा कि ये योजनाएं कितनी जल्दी ज़मीन पर उतरती हैं। वनटांगिया समुदाय, जो दशकों तक जंगलों में बसे मजदूर के रूप में जीवन जीता रहा, अब मुख्यधारा में आ रहा है — और यह बदलाव सामाजिक न्याय की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत है।