CM योगी आदित्यनाथ वनटांगिया गांव में मनाएंगे दीपावली, ₹82.41 करोड़ की 52 परियोजनाओं की देंगे सौगात
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस दीपावली भी गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में बसे वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन पहुंचेंगे और दशकों तक हाशिए पर रहे वनटांगिया समुदाय के साथ दीपोत्सव की खुशियां साझा करेंगे। इस अवसर पर वह ₹82.41 करोड़ की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे। गोरखपुर जनपद मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में उनके आगमन को लेकर हर घर में उत्साह और उमंग का माहौल है।
वनटांगिया समुदाय का ऐतिहासिक संघर्ष
वनटांगिया समुदाय की कहानी ब्रिटिश शासन के उस दौर से शुरू होती है जब रेलवे स्लीपर बनाने के लिए जंगलों से साखू के पेड़ बड़े पैमाने पर काटे गए। वन पुनर्निर्माण के लिए अंग्रेज सरकार ने भूमिहीन और गरीब मजदूरों को जंगल में बसाया और उनसे बर्मा (म्यांमार) की 'टांगिया विधि' से पौधरोपण कराया। इसी वजह से ये लोग 'वनटांगिया' कहलाए। वर्ष 1918 में कुसम्ही जंगल के पाँच इलाकों में इनकी बस्तियां बसीं और महराजगंज के जंगलों में 18 अन्य गांव भी अस्तित्व में आए।
1947 में देश आज़ाद हुआ, लेकिन वनटांगियों की स्थिति नहीं बदली। उनके पास न नागरिकता थी, न पक्के मकान बनाने की अनुमति, न जीविका का कोई ठोस साधन। वन विभाग की ओर से बेदखली का भय हमेशा बना रहता था। करीब सौ वर्षों तक यह समुदाय उपेक्षा और बदहाली में जीता रहा।
योगी आदित्यनाथ की भूमिका और परंपरा की शुरुआत
वर्ष 1998 में गोरखपुर से पहली बार सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया बस्तियों की दुर्दशा को करीब से देखा। उन्होंने अपने नेतृत्व वाली महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थानों और गोरखनाथ मंदिर की मोबाइल मेडिकल सेवा के माध्यम से वर्ष 2003 से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास शुरू किया। वर्ष 2009 में अस्थायी स्कूल निर्माण को लेकर वन विभाग ने मुकदमा दर्ज कराया, परंतु योगी ने अपने तर्कों से विभाग को निरुत्तर किया और गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से यह विद्यालय आज भी उस संघर्ष का साक्षी है।
वर्ष 2009 से योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू की — पहले सांसद के रूप में, फिर गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में, और बाद में मुख्यमंत्री के रूप में। यह सिलसिला कभी नहीं टूटा। गांव के निवासी रामगणेश कहते हैं, 'अब त बाबा के बिना तिउहार अधूरा लगेला।' गौरतलब है कि वर्ष 2010 में लोकसभा में आवाज उठाकर योगी ने वनटांगियों को अपने स्थान पर बने रहने का अधिकार-पत्र दिलाया।
राजस्व ग्राम का दर्जा और बदलती तस्वीर
मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले ही कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर और महराजगंज के 23 वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाया, जिससे ये सामान्य नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं के हकदार बन गए। आज इन गांवों में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान, कृषि योग्य भूमि के पट्टे, आधार कार्ड, राशन कार्ड, रसोई गैस, स्ट्रीट लाइट, आंगनबाड़ी केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। बच्चे विद्यालयों में पढ़ रहे हैं और पात्र लोग वृद्धावस्था, विधवा तथा दिव्यांग पेंशन योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। अकेले जंगल तिकोनिया नंबर तीन में हर सरकारी योजना की उपलब्धि शत-प्रतिशत बताई जा रही है।
₹82.41 करोड़ की 52 परियोजनाओं का विवरण
इस बार दीपोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ₹77 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये की लागत के 26 कार्यों का शिलान्यास और ₹4 करोड़ 43 लाख 79 हजार रुपये के 26 विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे। प्रमुख परियोजनाओं में रजही चौराहे से जंगल तिकोनिया नंबर तीन होते हुए पिपराइच मार्ग तक इंटरलॉकिंग सड़क का शिलान्यास शामिल है, जिस पर ₹3 करोड़ 65 लाख 11 हजार खर्च होंगे। इससे वनटांगिया समुदाय की बाहरी कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।
इसके साथ ही कुसम्ही जंगल में ₹4 करोड़ 84 लाख 81 हजार रुपये की लागत से इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने वाले ईको पार्क का शिलान्यास भी होगा। स्विस कॉटेज और अन्य आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह पार्क पर्यटकों को शांत वन परिवेश में सुकून के पल बिताने का अवसर देगा। इसके अतिरिक्त पिपराइच नगर पंचायत में ₹1 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपये की लागत से वैश्विक नगर बाजार का निर्माण किया जाएगा, जिससे स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
आगे का सफर
वनटांगिया समुदाय की यह यात्रा — ब्रिटिश काल की उपेक्षा से लेकर राजस्व ग्राम और विकास की मुख्यधारा तक — दर्शाती है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और निरंतर संवाद से दशकों पुरानी वंचना को भी पाटा जा सकता है। नई परियोजनाओं के पूरे होने के बाद क्षेत्र में ईको-टूरिज्म और आर्थिक गतिविधियों में और तेजी आने की उम्मीद है।