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ग्रेटर नोएडा अग्निकांड: आई एलजीआईएन फैक्ट्री में उत्पादन पर तत्काल रोक, 2 दमकलकर्मियों की मौत के बाद सामने आईं गंभीर खामियाँ

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ग्रेटर नोएडा अग्निकांड: आई एलजीआईएन फैक्ट्री में उत्पादन पर तत्काल रोक, 2 दमकलकर्मियों की मौत के बाद सामने आईं गंभीर खामियाँ

सारांश

ग्रेटर नोएडा की आई एलजीआईएन इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में तड़के लगी आग ने 2 दमकलकर्मियों की जान ले ली। संयुक्त जाँच में भवन की संरचनात्मक क्षति और धुएँ की निकासी समेत गंभीर सुरक्षा खामियाँ सामने आईं — अब कारखाना अधिनियम के तहत उत्पादन पर पूर्ण रोक, और व्यापक सुरक्षा ऑडिट के बाद ही पुनः संचालन की अनुमति मिलेगी।

मुख्य बातें

4 जुलाई को तड़के 3:10 बजे ग्रेटर नोएडा के इकोटेक एक्सटेंशन-3 स्थित आई एलजीआईएन इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में आग लगी।
दीवार गिरने से अग्निशमन विभाग के 2 कर्मचारियों की मौत ; 3 दमकलकर्मी और फैक्ट्री कर्मचारी त्रिभुवन तिवारी गंभीर रूप से घायल।
संयुक्त जाँच में पीयूएफ रूफिंग, स्टील संरचना को भारी नुकसान और धुएँ की निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था उजागर।
कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत फैक्ट्री में उत्पादन और मशीन संचालन पर तत्काल रोक ।
प्रबंधन को स्ट्रक्चरल ऑडिट, फायर रिस्क असेसमेंट, एनडीटी परीक्षण सहित व्यापक सुरक्षा परीक्षण कराना अनिवार्य।
आदेश उल्लंघन पर फैक्ट्री प्रबंधन के विरुद्ध सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी।

ग्रेटर नोएडा के इकोटेक एक्सटेंशन-3 स्थित आई एलजीआईएन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में मंगलवार, 4 जुलाई को तड़के लगी भीषण आग के बाद प्रशासन ने क्षतिग्रस्त कारखाने में उत्पादन और मशीनों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह कड़ा कदम सहायक निदेशक कारखाना एवं श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की संयुक्त जाँच रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया, जिसमें भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएँ उजागर हुई हैं। इस हादसे में अग्निशमन विभाग के दो कर्मचारियों की जान जा चुकी है और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।

आग कब और कहाँ लगी

प्रारंभिक जाँच के अनुसार आग तड़के लगभग 3:10 बजे फैक्ट्री की पहली मंजिल पर स्थित एजिंग टेस्टिंग एरिया में भड़की। आग लगते ही प्रबंधन ने कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला और अग्निशमन विभाग को सूचित किया। दमकल की टीमें मौके पर पहुँचकर आग बुझाने में जुट गईं, परंतु इसी दौरान फैक्ट्री की बाहरी ईंट की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आकर दो दमकलकर्मियों की दर्दनाक मौत हो गई।

संरचनात्मक क्षति और सुरक्षा खामियाँ

संयुक्त जाँच दल ने घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण करने के बाद पाया कि आग की भीषण गर्मी से पहली मंजिल पर लगी पीयूएफ रूफिंग, स्टील ट्रस, स्टील बीम और कॉलम सहित अन्य संरचनात्मक हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। अत्यधिक तापमान और आग बुझाने के दौरान भारी मात्रा में पानी के उपयोग ने स्टील संरचना की भार-वहन क्षमता को कमज़ोर कर दिया है।

जाँच में यह भी सामने आया कि भवन में धुएँ की निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। पहली मंजिल से लगातार रिसता पानी भूतल और बेसमेंट तक पहुँच गया, जिससे विद्युत पैनल, केबल, पीएलसी, सर्वो ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणालियाँ प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। गौरतलब है कि यह इकाई इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन क्षेत्र में कार्यरत थी, जहाँ ऐसी प्रणालियों की सुरक्षित अवस्था उत्पादन की पूर्वशर्त होती है।

हताहतों की स्थिति

हादसे में अग्निशमन विभाग के दो कर्मचारी दीवार गिरने से मारे गए। तीन अन्य दमकलकर्मी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका उपचार जारी है। फैक्ट्री कर्मचारी त्रिभुवन तिवारी भी गंभीर रूप से घायल हैं और ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

प्रशासन की कार्रवाई और आदेश

अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मौजूदा स्थिति में मशीनों के संचालन से उत्पन्न कंपन भवन के आंशिक या पूर्ण रूप से ढहने का कारण बन सकते हैं। दोबारा आग लगने, विद्युत हादसे या अन्य औद्योगिक दुर्घटनाओं का भी गंभीर खतरा बना हुआ है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत क्षतिग्रस्त भवन, मशीनरी, विद्युत प्रणाली और सभी उत्पादन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई गई है।

प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि किसी मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ संस्था से स्ट्रक्चरल ऑडिट, मशीन रिस्क असेसमेंट, फायर रिस्क असेसमेंट, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी असेसमेंट, एनडीटी परीक्षण, फाउंडेशन एनालिसिस, फ्लोर लोड टेस्ट और सिस्मिक एनालिसिस सहित सभी आवश्यक परीक्षण कराए जाएँ। इन रिपोर्टों और सुरक्षा अनुशंसाओं के अनुपालन तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद ही उत्पादन पुनः शुरू किया जा सकेगा।

उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश या इसके किसी भी प्रावधान का उल्लंघन किए जाने पर कारखाना प्रबंधन और दखलकार के विरुद्ध कारखाना अधिनियम, 1948 की संबंधित धाराओं के तहत सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में औद्योगिक अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आगे की जाँच और संरचनात्मक परीक्षण रिपोर्टें फैक्ट्री के भविष्य और प्रबंधन की जवाबदेही तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा नियमों की खानापूर्ति की व्यापक संस्कृति का आईना है। धुएँ की निकासी का अभाव और संरचनात्मक कमज़ोरियाँ — जो आग के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही मौजूद रही होंगी — यह सवाल उठाती हैं कि नियमित निरीक्षण तंत्र कहाँ विफल रहा। दो दमकलकर्मियों की जान एक ऐसी इमारत में गई जिसकी दीवार आग बुझाने के दौरान ढह गई — यह दुर्घटना नहीं, प्रणालीगत विफलता है। जब तक ऑडिट और जाँच के परिणाम सार्वजनिक नहीं होते और जवाबदेही तय नहीं होती, महज उत्पादन रोक से न्याय नहीं होगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा की आई एलजीआईएन इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में आग कैसे लगी?
प्रारंभिक जाँच के अनुसार आग 4 जुलाई को तड़के लगभग 3:10 बजे फैक्ट्री की पहली मंजिल पर स्थित एजिंग टेस्टिंग एरिया में लगी। आग के सटीक कारण की जाँच अभी जारी है।
इस अग्निकांड में कितने लोगों की मौत हुई और कौन घायल हैं?
फैक्ट्री की बाहरी दीवार गिरने से अग्निशमन विभाग के दो कर्मचारियों की मौत हो गई। तीन अन्य दमकलकर्मी और फैक्ट्री कर्मचारी त्रिभुवन तिवारी गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका उपचार जारी है।
फैक्ट्री में उत्पादन पर रोक क्यों लगाई गई है?
संयुक्त जाँच में पाया गया कि आग और भारी मात्रा में पानी के उपयोग से भवन की स्टील संरचना की भार-वहन क्षमता कमज़ोर हो गई है। मशीनों के कंपन से भवन के ढहने का खतरा बताते हुए कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के तहत तत्काल रोक लगाई गई।
फैक्ट्री में दोबारा उत्पादन कब शुरू हो सकेगा?
उत्पादन तभी शुरू हो सकेगा जब प्रबंधन किसी मान्यता प्राप्त संस्था से स्ट्रक्चरल ऑडिट, फायर रिस्क असेसमेंट, एनडीटी परीक्षण सहित सभी निर्धारित सुरक्षा परीक्षण करा ले और सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त कर ले। इसकी कोई निश्चित समय-सीमा अभी तय नहीं की गई है।
जाँच में फैक्ट्री की कौन-सी प्रमुख सुरक्षा खामियाँ सामने आईं?
जाँच में सामने आया कि भवन में धुएँ की निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा पहली मंजिल से रिसे पानी ने भूतल और बेसमेंट के विद्युत पैनल, पीएलसी और सर्वो ड्राइव जैसी प्रणालियों को प्रभावित किया, और स्टील संरचना की भार-वहन क्षमता गंभीर रूप से कमज़ोर पाई गई।
राष्ट्र प्रेस
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