जीएसटी के 10 साल: आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार, मासिक संग्रह ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा
सारांश
मुख्य बातें
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) 1 जुलाई 2026 को अपने अस्तित्व के 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है — और ताज़ा डेलॉइट सर्वे के अनुसार, यह कर-व्यवस्था अब देश की आजादी के बाद का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत अप्रत्यक्ष कर सुधार बन चुकी है। 99 प्रतिशत से अधिक कारोबारियों ने जीएसटी के साथ अपने अनुभव को सकारात्मक या तटस्थ बताया है, जबकि नकारात्मक धारणा — जो 2022 में 10 प्रतिशत और 2025 में 5 प्रतिशत थी — अब लगभग शून्य पर आ गई है।
एक दशक में क्या बदला
जीएसटी ने लागू होते ही केंद्र और राज्यों के 17 विभिन्न करों तथा 13 उपकरों को समाप्त कर एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली स्थापित की। इसका मूल उद्देश्य पूरे भारत में एक समान राष्ट्रीय बाज़ार तैयार करना और दोहरे कराधान को खत्म करना था। पिछले नौ वर्षों में जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 66.5 लाख से बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो गई है — जो देश की अर्थव्यवस्था के बढ़ते औपचारिककरण का स्पष्ट संकेत है।
राजस्व के मोर्चे पर भी बदलाव उल्लेखनीय रहा है। औसत मासिक जीएसटी संग्रह वित्त वर्ष 2017-18 के ₹89,700 करोड़ से लगभग दोगुना होकर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुँच गया है।
उद्योग जगत का बढ़ता भरोसा
डेलॉइट सर्वे में भरोसे के पीछे कई ठोस कारण गिनाए गए हैं। 69 प्रतिशत कारोबारियों ने कर अनुपालन के डिजिटलीकरण को, 54 प्रतिशत ने कर प्रक्रियाओं के स्वचालन को और 48 प्रतिशत ने ई-इनवॉइसिंग व ई-वे बिल प्रणाली के स्थिर होने को प्रमुख कारण बताया।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के बीच भी तिमाही जीएसटी रिटर्न व्यवस्था की स्वीकार्यता तेज़ी से बढ़ी है। इस व्यवस्था के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया 2023 में 12 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 67 प्रतिशत हो गई है — यह बदलाव छोटे व्यवसायों के डिजिटल अनुपालन में आई परिपक्वता को दर्शाता है।
दर युक्तिकरण और उपभोक्ता पर असर
सरकार ने 22 सितंबर 2025 से संशोधित दो-स्तरीय जीएसटी ढाँचा लागू किया। नई व्यवस्था में अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत की दो प्रमुख कर श्रेणियों में रखा गया है, जबकि 40 प्रतिशत की दर केवल विलासिता और 'सिन गुड्स' — जैसे अत्यधिक शक्कर वाले पेय पदार्थ — पर लागू है।
डेलॉइट रिपोर्ट के अनुसार, दर युक्तिकरण का सबसे अधिक प्रभाव उपभोक्ता क्षेत्र (64 प्रतिशत) और लाइफ साइंसेज व हेल्थकेयर क्षेत्र (58 प्रतिशत) में देखा गया है। यह प्रभाव मुख्यतः संरचनात्मक है और बहुत कम क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ खपत में कोई बदलाव नहीं आया।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत कर दरों में की गई कटौती ने भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति दी है। उन्होंने कहा, 'कर दरों के युक्तिकरण और विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी से परिवारों को प्रत्यक्ष बचत हुई है। इससे उनके पास खर्च करने योग्य आय बढ़ी है, जिससे मांग को बढ़ावा मिला है।'
जीएसटी 2.0 की राह
डेलॉइट रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी के अगले चरण में डिजिटलाइजेशन से आगे बढ़कर एक इंटेलिजेंट, प्रेडिक्टिव और इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क अपनाया जाएगा। इसमें एआई-आधारित अनुपालन, डेटा के जरिए विवादों में कमी और करदाताओं के लिए एक सहज एकीकृत अनुभव की परिकल्पना है। यह ऐसे समय में आया है जब कंपनियाँ अधिक सटीकता, तेज़ी और प्रक्रियाओं में पूर्वानुमान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्रणालियों पर निर्भरता बढ़ा रही हैं। आने वाले वर्षों में जीएसटी 2.0 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रौद्योगिकी-आधारित अनुपालन छोटे करदाताओं तक कितनी सहजता से पहुँच पाता है।