28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जीएसटी के 10 साल: आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार, मासिक संग्रह ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जीएसटी के 10 साल: आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स सुधार, मासिक संग्रह ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुंचा

सारांश

एक जुलाई को जीएसटी अपना एक दशक पूरा करेगा — और डेलॉइट सर्वे बताता है कि 99% से अधिक कारोबारी इसे सकारात्मक मानते हैं। करदाता आधार 66.5 लाख से 1.6 करोड़ और मासिक संग्रह ₹89,700 करोड़ से ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुँचा। अब नज़र जीएसटी 2.0 पर है।

मुख्य बातें

जीएसटी 1 जुलाई 2026 को अपने अस्तित्व के 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
डेलॉइट सर्वे के अनुसार 99% से अधिक कारोबारियों ने जीएसटी अनुभव को सकारात्मक या तटस्थ बताया; नकारात्मक धारणा 2022 के 10% से घटकर लगभग शून्य।
पंजीकृत करदाता 66.5 लाख से बढ़कर 1.6 करोड़ ; मासिक संग्रह ₹89,700 करोड़ से बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ ।
22 सितंबर 2025 से लागू दो-स्तरीय ढाँचे में अधिकांश वस्तुएँ 5% या 18% स्लैब में; विलासिता व सिन गुड्स पर 40% ।
एमएसएमई में तिमाही रिटर्न के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया 2023 के 12% से बढ़कर 2026 में 67% ।
जीएसटी 2.0 में एआई-आधारित अनुपालन और इंटेलिजेंट प्रेडिक्टिव फ्रेमवर्क की योजना।

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) 1 जुलाई 2026 को अपने अस्तित्व के 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है — और ताज़ा डेलॉइट सर्वे के अनुसार, यह कर-व्यवस्था अब देश की आजादी के बाद का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत अप्रत्यक्ष कर सुधार बन चुकी है। 99 प्रतिशत से अधिक कारोबारियों ने जीएसटी के साथ अपने अनुभव को सकारात्मक या तटस्थ बताया है, जबकि नकारात्मक धारणा — जो 2022 में 10 प्रतिशत और 2025 में 5 प्रतिशत थी — अब लगभग शून्य पर आ गई है।

एक दशक में क्या बदला

जीएसटी ने लागू होते ही केंद्र और राज्यों के 17 विभिन्न करों तथा 13 उपकरों को समाप्त कर एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली स्थापित की। इसका मूल उद्देश्य पूरे भारत में एक समान राष्ट्रीय बाज़ार तैयार करना और दोहरे कराधान को खत्म करना था। पिछले नौ वर्षों में जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 66.5 लाख से बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो गई है — जो देश की अर्थव्यवस्था के बढ़ते औपचारिककरण का स्पष्ट संकेत है।

राजस्व के मोर्चे पर भी बदलाव उल्लेखनीय रहा है। औसत मासिक जीएसटी संग्रह वित्त वर्ष 2017-18 के ₹89,700 करोड़ से लगभग दोगुना होकर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुँच गया है।

उद्योग जगत का बढ़ता भरोसा

डेलॉइट सर्वे में भरोसे के पीछे कई ठोस कारण गिनाए गए हैं। 69 प्रतिशत कारोबारियों ने कर अनुपालन के डिजिटलीकरण को, 54 प्रतिशत ने कर प्रक्रियाओं के स्वचालन को और 48 प्रतिशत ने ई-इनवॉइसिंग व ई-वे बिल प्रणाली के स्थिर होने को प्रमुख कारण बताया।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के बीच भी तिमाही जीएसटी रिटर्न व्यवस्था की स्वीकार्यता तेज़ी से बढ़ी है। इस व्यवस्था के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया 2023 में 12 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 67 प्रतिशत हो गई है — यह बदलाव छोटे व्यवसायों के डिजिटल अनुपालन में आई परिपक्वता को दर्शाता है।

दर युक्तिकरण और उपभोक्ता पर असर

सरकार ने 22 सितंबर 2025 से संशोधित दो-स्तरीय जीएसटी ढाँचा लागू किया। नई व्यवस्था में अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत की दो प्रमुख कर श्रेणियों में रखा गया है, जबकि 40 प्रतिशत की दर केवल विलासिता और 'सिन गुड्स' — जैसे अत्यधिक शक्कर वाले पेय पदार्थ — पर लागू है।

डेलॉइट रिपोर्ट के अनुसार, दर युक्तिकरण का सबसे अधिक प्रभाव उपभोक्ता क्षेत्र (64 प्रतिशत) और लाइफ साइंसेज व हेल्थकेयर क्षेत्र (58 प्रतिशत) में देखा गया है। यह प्रभाव मुख्यतः संरचनात्मक है और बहुत कम क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ खपत में कोई बदलाव नहीं आया।

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत कर दरों में की गई कटौती ने भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति दी है। उन्होंने कहा, 'कर दरों के युक्तिकरण और विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी से परिवारों को प्रत्यक्ष बचत हुई है। इससे उनके पास खर्च करने योग्य आय बढ़ी है, जिससे मांग को बढ़ावा मिला है।'

जीएसटी 2.0 की राह

डेलॉइट रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी के अगले चरण में डिजिटलाइजेशन से आगे बढ़कर एक इंटेलिजेंट, प्रेडिक्टिव और इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क अपनाया जाएगा। इसमें एआई-आधारित अनुपालन, डेटा के जरिए विवादों में कमी और करदाताओं के लिए एक सहज एकीकृत अनुभव की परिकल्पना है। यह ऐसे समय में आया है जब कंपनियाँ अधिक सटीकता, तेज़ी और प्रक्रियाओं में पूर्वानुमान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्रणालियों पर निर्भरता बढ़ा रही हैं। आने वाले वर्षों में जीएसटी 2.0 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रौद्योगिकी-आधारित अनुपालन छोटे करदाताओं तक कितनी सहजता से पहुँच पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों लगभग दोगुने हुए हैं। लेकिन डेलॉइट जैसे सर्वे, जो उद्योग-वित्तपोषित हैं, स्वाभाविक रूप से अनुपालन-सक्षम बड़े कारोबारों की राय को अधिक प्रतिबिंबित करते हैं — उन लाखों छोटे व्यापारियों की नहीं जो अभी भी जटिल रिटर्न प्रक्रियाओं से जूझ रहे हैं। यह भी गौरतलब है कि जीएसटी दर-युक्तिकरण की घोषणाएँ बार-बार होती रही हैं, किंतु एकल-दर की मूल परिकल्पना अभी भी दूर है। जीएसटी 2.0 की असली कसौटी यह होगी कि एआई-आधारित अनुपालन तंत्र छोटे करदाताओं के लिए बोझ घटाता है या तकनीकी खाई को और चौड़ा करता है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसटी के 10 साल में क्या बदला?
जीएसटी ने केंद्र और राज्यों के 17 करों व 13 उपकरों की जगह एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू की। पंजीकृत करदाता 66.5 लाख से बढ़कर 1.6 करोड़ हुए और मासिक संग्रह ₹89,700 करोड़ से ₹1.85 लाख करोड़ पर पहुँचा।
डेलॉइट सर्वे में जीएसटी को लेकर कारोबारियों की क्या राय सामने आई?
डेलॉइट सर्वे के अनुसार 99% से अधिक कारोबारियों ने जीएसटी अनुभव को सकारात्मक या तटस्थ बताया। नकारात्मक धारणा 2022 के 10% और 2025 के 5% से घटकर अब लगभग शून्य पर आ गई है।
नया दो-स्तरीय जीएसटी ढाँचा क्या है और यह कब लागू हुआ?
22 सितंबर 2025 से लागू इस ढाँचे में अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को 5% या 18% की दो मुख्य श्रेणियों में रखा गया है। विलासिता और 'सिन गुड्स' जैसे अत्यधिक शक्कर वाले पेय पदार्थों पर 40% की दर लागू है।
जीएसटी 2.0 में क्या नया होगा?
जीएसटी 2.0 में एआई-आधारित अनुपालन, डेटा के जरिए विवादों में कमी और करदाताओं के लिए एकीकृत डिजिटल अनुभव की योजना है। यह मौजूदा डिजिटलाइजेशन से आगे बढ़कर एक इंटेलिजेंट और प्रेडिक्टिव फ्रेमवर्क की ओर कदम होगा।
एमएसएमई के लिए जीएसटी व्यवस्था कितनी सुलभ हुई है?
तिमाही जीएसटी रिटर्न व्यवस्था के प्रति एमएसएमई की सकारात्मक प्रतिक्रिया 2023 के 12% से बढ़कर 2026 में 67% हो गई है। यह छोटे व्यवसायों के बीच डिजिटल अनुपालन की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले