मांजलपुर उपचुनाव: भाजपा के सतीश पटेल ने 30,630 वोटों से जीत दर्ज की, वडोदरा में पार्टी का दबदबा बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सतीश पटेल ने 3 अगस्त 2026 को मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में 30,630 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने 55,481 मत प्राप्त किए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी भीखा रबारी को 24,851 वोट मिले। इस जीत के साथ भाजपा ने वडोदरा की इस सीट पर अपना परंपरागत वर्चस्व बनाए रखा।
मतगणना का क्रम
मतगणना सोमवार सुबह मकरपुरा स्थित भारतीय विद्या भवन में शुरू हुई। प्रारंभिक राउंड से ही सतीश पटेल आगे चल रहे थे — सुबह 9 बजे तक उनकी बढ़त 3,519 वोट थी, जो 11वें राउंड तक बढ़कर 19,368 वोट हो गई। 20 राउंड की गिनती पूरी होने पर अंतिम अंतर 30,630 मत रहा।
उपचुनाव क्यों हुआ
यह उपचुनाव वरिष्ठ भाजपा विधायक एवं राज्य के पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के बाद आवश्यक हुआ था। मांजलपुर सीट 2008 में अस्तित्व में आई थी और तब से योगेश पटेल इसका प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इससे पूर्व वे रावओपुरा निर्वाचन क्षेत्र से लगातार पाँच बार विजयी रहे थे और तीन दशक से अधिक के राजनीतिक जीवन में आठ बार विधायक बने थे।
सतीश पटेल की पृष्ठभूमि
सतीश पटेल की उम्मीदवारी उस समय चर्चा में आई जब भाजपा ने अचानक उन्हें इस सीट के लिए चुना। वे वडोदरा नगर निगम में पार्षद, नागरिक निकाय की स्थायी समिति के अध्यक्ष और वडोदरा जिला भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। सहकारी क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है — वे छानी नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष तथा बड़ौदा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक और वडोदरा शुगर कोऑपरेटिव के निदेशक पद पर रहे हैं।
विपक्षी उम्मीदवार और मतदान
कांग्रेस प्रत्याशी भीखा रबारी गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष और माधवसिंह सोलंकी सरकार में पूर्व मंत्री हैं। मतदान 30 जुलाई को हुआ था और एक मतदान केंद्र के बाहर भाजपा व कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच मामूली कहासुनी को छोड़कर पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। निर्वाचन क्षेत्र में 2,19,000 से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 37.50% ने मतदान किया, जो 2022 के विधानसभा चुनाव के 60.15% मतदान की तुलना में काफी कम है।
आगे की राह
चुनाव आयोग ने 260 मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग और सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित की थी। इस जीत के साथ सतीश पटेल ने गुजरात विधानसभा में मांजलपुर के नए प्रतिनिधि के रूप में दिवंगत योगेश पटेल की विरासत संभाली है। कम मतदान प्रतिशत पार्टियों के लिए एक संकेत है कि शहरी मतदाताओं को उपचुनावों में मतदान केंद्र तक लाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।