गुजरात हस्तकला सेतु योजना: ₹58 करोड़ की पहल से 21,000+ कारीगरों की आय दोगुनी, 50,000 नए रोज़गार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार की हस्तकला सेतु योजना (HSY) ने राज्य के 21,690 से अधिक कारीगरों के जीवन में आमूल परिवर्तन लाया है — योजना से पहले जहाँ केवल 9 प्रतिशत कारीगर ₹15,000 से अधिक मासिक आय अर्जित कर पाते थे, वहीं अब यह अनुपात बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। ₹58 करोड़ के राज्य व्यय से संचालित यह योजना गुजरात के सभी 34 जिलों में लागू है और अब तक ₹102.08 करोड़ की कुल बिक्री दर्ज कर चुकी है।
योजना की पृष्ठभूमि और संरचना
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने वर्ष 2020 में हस्तकला सेतु योजना की शुरुआत की। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी', 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' के विज़न से प्रेरित है। योजना का क्रियान्वयन कुटीर एवं ग्रामोद्योग आयुक्त के अधीन इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन-कॉटेज (इंडेक्स्ट-सी) द्वारा किया जा रहा है, जबकि भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) नॉलेज पार्टनर की भूमिका में है। मूलतः 2019-20 से तीन वर्ष के लिए प्रस्तावित यह योजना कोविड-19 महामारी के कारण 2025-26 तक विस्तारित की गई।
सामाजिक समावेशिता: महिलाएँ और वंचित वर्ग अग्रणी
योजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। पंजीकृत 21,690 से अधिक कारीगरों में 82 प्रतिशत महिलाएँ हैं। सामाजिक वर्गीकरण की दृष्टि से लाभार्थियों में 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति और 34 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के कारीगर सम्मिलित हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि योजना केवल कौशल-विकास तक सीमित नहीं, बल्कि हाशिए पर खड़े समुदायों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बनी है।
प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
योजना के अंतर्गत 15,586 कारीगरों को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 9,292 कारीगरों को उनके विशिष्ट शिल्प से संबंधित कौशल प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है। 70 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स और 150 से अधिक मेंटर्स का नेटवर्क कारीगरों को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। यह ढाँचा सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ एकमुश्त प्रशिक्षण तक सीमित न रहे।
बाज़ार से सीधा जुड़ाव और डिजिटल विस्तार
लगभग 9,300 कारीगरों को B2B ऑर्डर के माध्यम से सीधे बाज़ार से जोड़ा गया है। 7 B2B मीट और 4 फैशन शो के आयोजन से कारीगरों और डिज़ाइनरों के बीच व्यावसायिक संवाद स्थापित हुआ है। डिजिटल मोर्चे पर 2,000 से अधिक कारीगरों को Amazon, Flipkart Samarth, Meesho और Etsy जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। गौरतलब है कि 73 प्रतिशत कारीगर अब प्रदर्शनियों और मेलों के ज़रिए सीधे बाज़ार तक पहुँच बना रहे हैं।
चुनौतियाँ और आगे की राह
योजना के क्रियान्वयन के दौरान दस्तावेज़ीकरण का अभाव, वित्तीय समन्वय में विलंब, आधुनिक तकनीक अपनाने में संकोच और प्रभावी विपणन तंत्र की कमी जैसी बाधाएँ सामने आईं। सरकार ने इनसे निपटने के लिए तकनीकी उन्नयन, डिज़ाइन नवाचार, बाज़ार विविधीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्राथमिकता दी है। हस्तकला को आय के मुख्य स्रोत के रूप में अपनाने वाले कारीगरों की संख्या 20 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो जाना इस दिशा में सकारात्मक संकेत है। यह देखना होगा कि योजना की समाप्ति के बाद भी ये कारीगर बाज़ार में अपनी स्थिरता बनाए रख पाते हैं या नहीं।