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गुजरात हस्तकला सेतु योजना: ₹58 करोड़ की पहल से 21,000+ कारीगरों की आय दोगुनी, 50,000 नए रोज़गार

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गुजरात हस्तकला सेतु योजना: ₹58 करोड़ की पहल से 21,000+ कारीगरों की आय दोगुनी, 50,000 नए रोज़गार

सारांश

गुजरात की हस्तकला सेतु योजना ने ₹58 करोड़ के निवेश से 21,690 कारीगरों की तकदीर बदली — ₹15,000+ मासिक कमाने वालों की संख्या 9% से 50% हुई, ₹102 करोड़ की बिक्री और 50,000 नए रोज़गार। 82% महिला लाभार्थियों के साथ यह योजना 'लोकल से ग्लोबल' का जीवंत उदाहरण बनी।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने 2020 में हस्तकला सेतु योजना शुरू की, जिस पर अब तक ₹58 करोड़ खर्च हुए हैं।
राज्य के 34 जिलों में 21,690 से अधिक कारीगर पंजीकृत; इनमें 82% महिलाएँ।
लाभार्थियों में 21% अनुसूचित जाति , 20% अनुसूचित जनजाति और 34% अन्य पिछड़ा वर्ग ।
योजना के बाद ₹15,000+ मासिक आय वाले कारीगरों की हिस्सेदारी 9% से बढ़कर 50% हुई।
अब तक ₹102.08 करोड़ की कुल बिक्री और 50,000 से अधिक नए रोज़गार सृजित।
2,000+ कारीगर Amazon, Flipkart Samarth, Meesho व Etsy जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े।

गुजरात सरकार की हस्तकला सेतु योजना (HSY) ने राज्य के 21,690 से अधिक कारीगरों के जीवन में आमूल परिवर्तन लाया है — योजना से पहले जहाँ केवल 9 प्रतिशत कारीगर ₹15,000 से अधिक मासिक आय अर्जित कर पाते थे, वहीं अब यह अनुपात बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। ₹58 करोड़ के राज्य व्यय से संचालित यह योजना गुजरात के सभी 34 जिलों में लागू है और अब तक ₹102.08 करोड़ की कुल बिक्री दर्ज कर चुकी है।

योजना की पृष्ठभूमि और संरचना

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने वर्ष 2020 में हस्तकला सेतु योजना की शुरुआत की। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी', 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' के विज़न से प्रेरित है। योजना का क्रियान्वयन कुटीर एवं ग्रामोद्योग आयुक्त के अधीन इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन-कॉटेज (इंडेक्स्ट-सी) द्वारा किया जा रहा है, जबकि भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) नॉलेज पार्टनर की भूमिका में है। मूलतः 2019-20 से तीन वर्ष के लिए प्रस्तावित यह योजना कोविड-19 महामारी के कारण 2025-26 तक विस्तारित की गई।

सामाजिक समावेशिता: महिलाएँ और वंचित वर्ग अग्रणी

योजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। पंजीकृत 21,690 से अधिक कारीगरों में 82 प्रतिशत महिलाएँ हैं। सामाजिक वर्गीकरण की दृष्टि से लाभार्थियों में 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति और 34 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के कारीगर सम्मिलित हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि योजना केवल कौशल-विकास तक सीमित नहीं, बल्कि हाशिए पर खड़े समुदायों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बनी है।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

योजना के अंतर्गत 15,586 कारीगरों को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 9,292 कारीगरों को उनके विशिष्ट शिल्प से संबंधित कौशल प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है। 70 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स और 150 से अधिक मेंटर्स का नेटवर्क कारीगरों को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। यह ढाँचा सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ एकमुश्त प्रशिक्षण तक सीमित न रहे।

बाज़ार से सीधा जुड़ाव और डिजिटल विस्तार

लगभग 9,300 कारीगरों को B2B ऑर्डर के माध्यम से सीधे बाज़ार से जोड़ा गया है। 7 B2B मीट और 4 फैशन शो के आयोजन से कारीगरों और डिज़ाइनरों के बीच व्यावसायिक संवाद स्थापित हुआ है। डिजिटल मोर्चे पर 2,000 से अधिक कारीगरों को Amazon, Flipkart Samarth, Meesho और Etsy जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। गौरतलब है कि 73 प्रतिशत कारीगर अब प्रदर्शनियों और मेलों के ज़रिए सीधे बाज़ार तक पहुँच बना रहे हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह

योजना के क्रियान्वयन के दौरान दस्तावेज़ीकरण का अभाव, वित्तीय समन्वय में विलंब, आधुनिक तकनीक अपनाने में संकोच और प्रभावी विपणन तंत्र की कमी जैसी बाधाएँ सामने आईं। सरकार ने इनसे निपटने के लिए तकनीकी उन्नयन, डिज़ाइन नवाचार, बाज़ार विविधीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्राथमिकता दी है। हस्तकला को आय के मुख्य स्रोत के रूप में अपनाने वाले कारीगरों की संख्या 20 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो जाना इस दिशा में सकारात्मक संकेत है। यह देखना होगा कि योजना की समाप्ति के बाद भी ये कारीगर बाज़ार में अपनी स्थिरता बनाए रख पाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि 2025-26 में योजना की समाप्ति के बाद ये कारीगर बाज़ार में स्वतंत्र रूप से टिक पाते हैं या नहीं। ₹102 करोड़ की बिक्री ₹58 करोड़ के सरकारी व्यय से अधिक है — यह सकारात्मक है, परंतु प्रति कारीगर औसत आय और दीर्घकालिक बाज़ार निर्भरता के आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। 82% महिला भागीदारी उल्लेखनीय है, किंतु यह भी जाँचना ज़रूरी है कि क्या ये महिलाएँ स्वतंत्र उद्यमी बनीं या केवल कुशल श्रमिक। 'लोकल से ग्लोबल' की यात्रा तभी पूरी होगी जब सरकारी संरक्षण हटने के बाद भी ये कारीगर वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह बनाए रख सकें।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात हस्तकला सेतु योजना क्या है?
हस्तकला सेतु योजना गुजरात सरकार की एक योजना है जो 2020 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में शुरू हुई। इसका उद्देश्य राज्य के पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, बाज़ार से जुड़ाव और डिजिटल सशक्तिकरण के ज़रिए आत्मनिर्भर बनाना है। योजना पर ₹58 करोड़ खर्च हुए हैं और यह 2025-26 तक विस्तारित की गई है।
हस्तकला सेतु योजना से कितने कारीगरों को लाभ मिला?
योजना के अंतर्गत अब तक 21,690 से अधिक कारीगर पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 82% महिलाएँ हैं। 50,000 से अधिक नए रोज़गार सृजित हुए हैं और ₹102.08 करोड़ की कुल बिक्री दर्ज की गई है।
योजना से कारीगरों की आय पर क्या असर पड़ा?
योजना से पहले केवल 9% कारीगर ₹15,000 से अधिक मासिक आय अर्जित कर पाते थे, जो अब बढ़कर 50% हो गई है। इसके अलावा, हस्तकला को आय के मुख्य स्रोत के रूप में अपनाने वाले कारीगरों की संख्या 20% से बढ़कर 45% हो गई है।
योजना में किन वर्गों के कारीगरों को प्राथमिकता दी गई?
योजना में सामाजिक समावेशिता पर विशेष ध्यान दिया गया है। लाभार्थियों में 21% अनुसूचित जाति, 20% अनुसूचित जनजाति और 34% अन्य पिछड़ा वर्ग के कारीगर शामिल हैं। 82% महिला भागीदारी इसे महिला सशक्तिकरण का भी एक प्रभावी माध्यम बनाती है।
कारीगरों को डिजिटल बाज़ार से कैसे जोड़ा गया?
2,000 से अधिक कारीगरों को डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण देकर Amazon, Flipkart Samarth, Meesho और Etsy जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया। इसके अतिरिक्त 7 B2B मीट और 4 फैशन शो के माध्यम से कारीगरों को सीधे खरीदारों और डिज़ाइनरों से जोड़ा गया।
राष्ट्र प्रेस
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