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गुजरात: क्या नमो ड्रोन दीदी योजना से बनासकांठा की ग्रामीण महिलाओं को 'नए पंख' मिल रहे हैं?

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गुजरात: क्या नमो ड्रोन दीदी योजना से बनासकांठा की ग्रामीण महिलाओं को 'नए पंख' मिल रहे हैं?

सारांश

गुजरात में नमो ड्रोन दीदी योजना ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। यह योजना न केवल उन्हें तकनीकी कौशल प्रदान कर रही है, बल्कि उनके जीवन में नए अवसर भी ला रही है। जानिए कैसे यह योजना महिलाओं की जिंदगी में बदलाव ला रही है।

मुख्य बातें

नमो ड्रोन दीदी योजना महिलाओं को सशक्त बना रही है।
यह योजना तकनीकी कौशल और आत्मनिर्भरता का अवसर प्रदान कर रही है।
आशा चौधरी जैसी महिलाएं प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।
सरकारी योजनाओं की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ रही है।
सशक्त महिलाएं विकास की मुख्यधारा से जुड़ रही हैं।

बनासकांठा, २५ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार की महिला-केंद्रित कल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बना रही हैं। इसी दिशा में नमो ड्रोन दीदी योजना जमीनी स्तर पर बदलाव की एक मजबूत मिसाल बनकर उभरी है। गुजरात के बनासकांठा जिले में यह योजना महिलाओं को पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकालकर तकनीक आधारित आजीविका से जोड़ रही है।

इसका एक जीवंत उदाहरण डीसा तालुका के तलेपुरा गांव की निवासी आशा चौधरी हैं, जिन्होंने प्रशिक्षण और अवसर का लाभ उठाकर टिकाऊ स्वरोजगार की राह बनाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का यह विश्वास है कि सशक्त महिला न केवल अपने जीवन को, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र को भी मजबूत बनाती है। इसी सोच के तहत महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें नमो ड्रोन दीदी योजना प्रमुख है।

योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आशा चौधरी को केंद्र सरकार द्वारा १७ लाख रुपये मूल्य की ड्रोन किट प्रदान की गई। आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक प्रशिक्षण से लैस होकर उन्होंने ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं शुरू की, जो ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार का एक नया और आधुनिक माध्यम है।

आज आशा न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने परिवार की मजबूत सहारा भी बन चुकी हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना ने उन्हें सिर्फ कौशल ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास भी दिया, जिससे वे पारंपरिक सीमाओं से आगे का भविष्य देख सकीं।

उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हुई हैं और नई संभावनाओं की ओर कदम बढ़ाने लगी हैं।

गुजरात के दूरदराज के गांवों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है, जिससे ग्रामीण महिलाएं विकास की मुख्यधारा से जुड़ रही हैं। आशा चौधरी जैसी कहानियां यह दर्शाती हैं कि लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप किस तरह जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव ला सकते हैं।

तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग के साथ महिलाएं आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव रख रही हैं। बनासकांठा में नमो ड्रोन दीदी योजना की सफलता “अटल नेतृत्व, निर्बाध विकास” की भावना को साकार करती है, जहां सशक्त महिलाएं समावेशी विकास की नई ताकत बन रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह ग्रामीण विकास में भी एक नई तस्वीर प्रस्तुत करती है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं, तो समाज और राष्ट्र दोनों को इसका लाभ मिलता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नमो ड्रोन दीदी योजना क्या है?
यह योजना ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई है।
इस योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
गुजरात के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इस योजना का लाभ उठा सकती हैं।
क्या इस योजना का प्रशिक्षण मुफ्त है?
हाँ, इस योजना के तहत प्रशिक्षण मुफ्त में प्रदान किया जाता है।
ड्रोन किट की कीमत क्या है?
यह किट लगभग १७ लाख रुपये मूल्य की होती है।
इस योजना से कितनी महिलाओं को लाभ मिला है?
कई महिलाओं ने इस योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया है और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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