खैरागढ़ की सावित्री साहू: ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ से बनीं आत्मनिर्भर
सारांश
Key Takeaways
- सावित्री साहू ने ड्रोन तकनीक से खेती को सरल बनाया।
- यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में मदद करती है।
- ड्रोन का उपयोग करने से समय और लागत में बचत होती है।
- सावित्री अब गांव में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं।
- योजना ने अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी।
खैरागढ़, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ की निवासी सावित्री साहू ने ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है। उन्होंने साझा किया कि इस योजना ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है। जब लोग उन्हें पूरे गांव में ड्रोन दीदी के नाम से बुलाते हैं, तो उन्हें बहुत खुशी होती है।
खैरागढ़ जिले के खपरी तेली ग्राम की निवासी और विहान समूह की सदस्य सावित्री साहू ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को सहज बना दिया है। वे पूरे जिले में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं और अब वे आधुनिक कृषि की नई पहचान बन गई हैं। जिले की एकमात्र महिला के रूप में, सावित्री साहू ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव कर रही हैं, जिससे खेती का काम आसान, तेज और सटीक हुआ है।
ड्रोन के उपयोग से सावित्री ने समय की बहुत बचत की है। पहले एक एकड़ में दवाइयों का छिड़काव करने में दो घंटे से अधिक समय लगता था, जबकि अब यह काम महज 10 मिनट में हो जाता है। साथ ही, पानी और दवाइयों की खपत में कमी आई है, जिससे उत्पादन में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब उन्हें अधिक मजदूरों की आवश्यकता नहीं पड़ती।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में, सावित्री साहू ने कहा कि उनके जीवन में ड्रोन के आने से बहुत परिवर्तन हुआ है और वे अब आत्मनिर्भर बन गई हैं।
उन्होंने बताया कि शादी से पहले उनकी पढ़ाई पूरी हुई और वे कुछ करना चाहती थीं, लेकिन शादी के बाद परिवार बना और उनके सपने पीछे छूट गए। इस दौरान, उन्हें नमो ड्रोन दीदी योजना के बारे में जानकारी मिली। योजना का लाभ उठाने के लिए उन्होंने आवेदन किया और ग्वालियर में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद जब वे लौटीं, तो ग्रामीणों ने उन्हें ड्रोन दीदी के नाम से पुकारना शुरू कर दिया। उन्हें गर्व महसूस होता है कि वे अब आत्मनिर्भर बन गई हैं और परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं।
सावित्री के पति प्रेमचंद साहू ने कहा कि उनका सपना था कि खेती को आधुनिक बनाने के लिए ड्रोन खरीदा जाए, लेकिन महंगे दाम के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। शासन की योजना से सब्सिडी मिलने के बाद उनका सपना साकार हुआ। ड्रोन के आने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और जिंदगी आसान हो गई है।
जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में ड्रोन दीदियों का चयन किया गया था और उन्हें सब्सिडी देकर ड्रोन प्रदान किया गया। ग्वालियर में सभी दीदियों को प्रशिक्षण दिया गया। सावित्री साहू ने पिछले वर्ष से खेतों में दवाइयों का छिड़काव करना शुरू किया है, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है। इस तकनीक से खेती सरल हो गई है।