उज्ज्वला योजना के 10 साल: गुजरात के बनासकांठा में 2 लाख महिलाओं को धुएं से मुक्ति, ₹6 करोड़ सब्सिडी वितरित
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने गुजरात के बनासकांठा जिले की ग्रामीण महिलाओं की रसोई और सेहत — दोनों बदल दी हैं। जिले में लगभग 2 लाख सक्रिय एलपीजी कनेक्शन के ज़रिये अब तक करीब ₹6 करोड़ की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है, जिससे लकड़ी के चूल्हे और उनसे उठने वाले जानलेवा धुएं पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। योजना को 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं और देशभर में 10 करोड़ 50 लाख से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन मिल चुके हैं।
घांटा गांव की बदली तस्वीर
बनासकांठा की अमीरगढ़ तालुका के घांटा गांव में यह बदलाव सबसे साफ़ नज़र आता है। कुछ वर्ष पहले तक यहाँ की महिलाएं जंगलों और दूर-दराज के इलाकों से लकड़ियाँ बटोरकर चूल्हा जलाती थीं। बारिश के मौसम में गीली लकड़ियाँ खाना पकाने की प्रक्रिया को और भी कठिन बना देती थीं। उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन मिलने के बाद अब गांव की महिलाएं एलपीजी चूल्हे पर सहजता से भोजन तैयार कर रही हैं।
लाभार्थी मीनाबेन डामोर ने बताया कि पहले लकड़ी लाने की मशक्कत और चूल्हे के धुएं से आँखों में जलन रोज़ की समस्या थी। उन्होंने कहा, 'अब गैस पर खाना बनाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती। सरकार की इस योजना से हमें काफी लाभ हुआ है और रसोई का काम पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है।'
एक अन्य लाभार्थी मनीषाबेन सागिया ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बरसात के दिनों में गीली लकड़ियों के कारण खाना बनाना बेहद कठिन हो जाता था, लेकिन अब गैस पर आसानी से भोजन तैयार हो जाता है। सब्सिडी वाले सिलेंडर से आर्थिक राहत भी मिल रही है।
स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर
योजना का प्रभाव केवल रसोई की सुविधा तक सीमित नहीं है — चिकित्सा विशेषज्ञ भी इसे स्वास्थ्य सुधार से जोड़ रहे हैं। बनासकांठा के चिकित्सक डॉ. अंतिक केला के अनुसार, पहले महिलाओं में सीओपीडी और अस्थमा जैसी सांस संबंधी बीमारियाँ काफी सामान्य थीं। मरीज़ों की उपचार-इतिहास जाँचने पर पता चलता था कि वे वर्षों तक लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाती रही थीं, जिससे उनके शरीर में कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें पहुँचती थीं।
डॉ. केला ने बताया कि उज्ज्वला योजना के कारण अधिकांश घरों में लकड़ी के चूल्हे की आवश्यकता समाप्त हो गई है, जिससे महिलाओं में सांस संबंधी बीमारियों के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई है।
आँकड़ों की ज़ुबानी
बनासकांठा के जिला आपूर्ति अधिकारी भव्य निनामा ने बताया कि जिले में उज्ज्वला योजना के तहत लगभग 2 लाख एलपीजी कनेक्शन सक्रिय हैं और लाभार्थियों को अब तक करीब ₹6 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस योजना के कारण लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और जीवन-स्तर बेहतर हुआ है।
राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो योजना के 10 वर्ष पूरे होने तक 10 करोड़ 50 लाख से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अकेले गुजरात में 44 लाख से अधिक गरीब महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार स्वच्छ ईंधन अपनाने को ऊर्जा नीति के केंद्र में रख रही है। गौरतलब है कि लकड़ी के चूल्हों से होने वाला वायु प्रदूषण ग्रामीण महिलाओं में श्वसन रोगों का एक प्रमुख कारण रहा है। उज्ज्वला योजना की यह सफलता आने वाले वर्षों में और अधिक ग्रामीण परिवारों तक एलपीजी पहुँचाने की दिशा में एक मज़बूत आधार प्रस्तुत करती है।