उज्ज्वला योजना से दमोह की ग्रामीण महिलाओं को मिली धुएँ से मुक्ति, स्वास्थ्य और समय दोनों बचे
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने मध्य प्रदेश के दमोह जिले की ग्रामीण महिलाओं की दिनचर्या और स्वास्थ्य में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। लकड़ी के चूल्हे से निकलने वाले धुएँ के कारण वर्षों से आँखों में जलन, साँस की तकलीफ और संक्रमण झेल रही महिलाओं को एलपीजी गैस कनेक्शन मिलने के बाद राहत मिली है। 2 अगस्त को सामने आई इन महिलाओं की कहानियाँ योजना के ज़मीनी असर को दर्शाती हैं।
धुएँ से बीमारी, गैस से राहत
बेलढाना गाँव की निवासी केसर बाई केवट ने बताया कि चूल्हे के धुएँ से उनकी आँखों में गंभीर संक्रमण हो गया था और कई जगहों से इलाज कराना पड़ा। उनके अनुसार, 'जब से गैस सिलेंडर कनेक्शन मिला है और गैस चूल्हे पर खाना पकाना शुरू किया है, तब से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत मिली है।' वे अब भी दवाई ले रही हैं, लेकिन स्थिति में सुधार हुआ है।
पडाझिर गाँव की अनीता ने कहा कि पहले चूल्हे पर खाना बनाते समय धुआँ और आँखों में जलन नित्य की समस्या थी। उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर मिलने के बाद अब वे उसी पर खाना पकाती हैं और परेशानी काफी कम हुई है।
सब्सिडी और समय की बचत
धनगौर गाँव की भारती अहिरवाल ने बताया कि उन्होंने लगभग दो वर्ष पहले उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लिया। उनके अनुसार, सिलेंडर भरवाने पर ₹300 की सब्सिडी मिलती है, जिससे आर्थिक बोझ भी कम हुआ है। पहले लकड़ी से खाना पकाना न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था, बल्कि समय भी अधिक लगता था।
एलपीजी से खाना कम समय में तैयार होने के कारण बच्चों को समय पर भोजन मिल रहा है और महिलाएँ अन्य घरेलू व व्यक्तिगत कार्यों के लिए भी समय निकाल पा रही हैं — जो पहले संभव नहीं था।
योजना का व्यापक संदर्भ
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों, विशेषकर महिलाओं को, स्वच्छ रसोई ईंधन उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ परंपरागत चूल्हे आज भी प्रचलित हैं, वहाँ यह योजना महिलाओं के स्वास्थ्य पर सीधा सकारात्मक प्रभाव डाल रही है। दमोह जैसे पिछड़े जिलों में इस बदलाव का असर ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट दिखता है।
आम जनता पर असर
धुएँ से होने वाली बीमारियाँ — जैसे आँखों का संक्रमण, साँस की तकलीफ और फेफड़ों की समस्याएँ — ग्रामीण महिलाओं में आम थीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, घर के भीतर होने वाला वायु प्रदूषण (इनडोर एयर पॉल्यूशन) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से हानिकारक होता है। एलपीजी अपनाने से इस जोखिम में उल्लेखनीय कमी आती है।
आगे की राह
दमोह जिले में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़ रही है और स्थानीय महिलाएँ इसे अपने जीवन में आए सबसे बड़े बदलावों में से एक मान रही हैं। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि रिफिल सब्सिडी की निरंतरता और सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित होती है या नहीं, क्योंकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में रिफिल न करा पाने के कारण लाभार्थी वापस लकड़ी के चूल्हे पर लौट जाते हैं।