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उज्ज्वला योजना से दमोह की ग्रामीण महिलाओं को मिली धुएँ से मुक्ति, स्वास्थ्य और समय दोनों बचे

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उज्ज्वला योजना से दमोह की ग्रामीण महिलाओं को मिली धुएँ से मुक्ति, स्वास्थ्य और समय दोनों बचे

सारांश

दमोह के बेलढाना, पडाझिर और धनगौर गाँवों की महिलाएँ बता रही हैं कि उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन उनके लिए सिर्फ ईंधन नहीं — आँखों की रोशनी और बच्चों के लिए समय बचाने का ज़रिया बना है। ₹300 की सब्सिडी के साथ यह बदलाव ज़मीनी स्तर पर दिख रहा है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से मध्य प्रदेश के दमोह जिले की ग्रामीण महिलाओं को धुएँ से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में राहत मिली है।
बेलढाना गाँव की केसर बाई केवट को चूल्हे के धुएँ से आँखों में गंभीर संक्रमण हो गया था; गैस कनेक्शन मिलने के बाद स्थिति में सुधार हुआ।
धनगौर गाँव की भारती अहिरवाल को सिलेंडर रिफिल पर ₹300 की सब्सिडी मिल रही है।
एलपीजी से खाना जल्दी बनने से बच्चों को समय पर भोजन मिल रहा है और महिलाओं को अन्य कार्यों के लिए समय मिल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घर के भीतर वायु प्रदूषण (इनडोर एयर पॉल्यूशन) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से हानिकारक होता है, जिसे एलपीजी अपनाने से कम किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने मध्य प्रदेश के दमोह जिले की ग्रामीण महिलाओं की दिनचर्या और स्वास्थ्य में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। लकड़ी के चूल्हे से निकलने वाले धुएँ के कारण वर्षों से आँखों में जलन, साँस की तकलीफ और संक्रमण झेल रही महिलाओं को एलपीजी गैस कनेक्शन मिलने के बाद राहत मिली है। 2 अगस्त को सामने आई इन महिलाओं की कहानियाँ योजना के ज़मीनी असर को दर्शाती हैं।

धुएँ से बीमारी, गैस से राहत

बेलढाना गाँव की निवासी केसर बाई केवट ने बताया कि चूल्हे के धुएँ से उनकी आँखों में गंभीर संक्रमण हो गया था और कई जगहों से इलाज कराना पड़ा। उनके अनुसार, 'जब से गैस सिलेंडर कनेक्शन मिला है और गैस चूल्हे पर खाना पकाना शुरू किया है, तब से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत मिली है।' वे अब भी दवाई ले रही हैं, लेकिन स्थिति में सुधार हुआ है।

पडाझिर गाँव की अनीता ने कहा कि पहले चूल्हे पर खाना बनाते समय धुआँ और आँखों में जलन नित्य की समस्या थी। उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर मिलने के बाद अब वे उसी पर खाना पकाती हैं और परेशानी काफी कम हुई है।

सब्सिडी और समय की बचत

धनगौर गाँव की भारती अहिरवाल ने बताया कि उन्होंने लगभग दो वर्ष पहले उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लिया। उनके अनुसार, सिलेंडर भरवाने पर ₹300 की सब्सिडी मिलती है, जिससे आर्थिक बोझ भी कम हुआ है। पहले लकड़ी से खाना पकाना न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था, बल्कि समय भी अधिक लगता था।

एलपीजी से खाना कम समय में तैयार होने के कारण बच्चों को समय पर भोजन मिल रहा है और महिलाएँ अन्य घरेलू व व्यक्तिगत कार्यों के लिए भी समय निकाल पा रही हैं — जो पहले संभव नहीं था।

योजना का व्यापक संदर्भ

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों, विशेषकर महिलाओं को, स्वच्छ रसोई ईंधन उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ परंपरागत चूल्हे आज भी प्रचलित हैं, वहाँ यह योजना महिलाओं के स्वास्थ्य पर सीधा सकारात्मक प्रभाव डाल रही है। दमोह जैसे पिछड़े जिलों में इस बदलाव का असर ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट दिखता है।

आम जनता पर असर

धुएँ से होने वाली बीमारियाँ — जैसे आँखों का संक्रमण, साँस की तकलीफ और फेफड़ों की समस्याएँ — ग्रामीण महिलाओं में आम थीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, घर के भीतर होने वाला वायु प्रदूषण (इनडोर एयर पॉल्यूशन) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से हानिकारक होता है। एलपीजी अपनाने से इस जोखिम में उल्लेखनीय कमी आती है।

आगे की राह

दमोह जिले में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़ रही है और स्थानीय महिलाएँ इसे अपने जीवन में आए सबसे बड़े बदलावों में से एक मान रही हैं। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि रिफिल सब्सिडी की निरंतरता और सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित होती है या नहीं, क्योंकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में रिफिल न करा पाने के कारण लाभार्थी वापस लकड़ी के चूल्हे पर लौट जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक अहम सवाल अनुत्तरित रहता है — कितने लाभार्थी पहली बार सिलेंडर लेने के बाद नियमित रूप से रिफिल करा पाते हैं? राष्ट्रीय स्तर के आँकड़े बताते हैं कि एक बड़ा वर्ग आर्थिक तंगी के कारण रिफिल न करा पाने पर वापस लकड़ी के चूल्हे पर लौट जाता है। दमोह जैसे जिलों में ₹300 की सब्सिडी राहत देती है, पर रिफिल की नियमितता सुनिश्चित करना ही योजना की असली परीक्षा है। जब तक इस पहलू पर पारदर्शी डेटा सामने नहीं आता, ज़मीनी बदलाव की तस्वीर अधूरी रहेगी।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना क्या है और दमोह में इसका क्या असर हुआ?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना केंद्र सरकार की एक योजना है जो गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन देती है। दमोह जिले में इस योजना से ग्रामीण महिलाओं को धुएँ से होने वाली आँखों की जलन, साँस की तकलीफ और संक्रमण जैसी समस्याओं में राहत मिली है।
उज्ज्वला योजना में सिलेंडर रिफिल पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
धनगौर गाँव की भारती अहिरवाल के अनुसार, उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर रिफिल कराने पर ₹300 की सब्सिडी मिलती है। यह सब्सिडी लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाती है।
लकड़ी के चूल्हे से महिलाओं के स्वास्थ्य पर क्या असर होता था?
लकड़ी के चूल्हे से निकलने वाले धुएँ के कारण महिलाओं को आँखों में जलन, संक्रमण, साँस लेने में तकलीफ और फेफड़ों की समस्याएँ होती थीं। बेलढाना गाँव की केसर बाई केवट को आँखों में गंभीर संक्रमण हो गया था और कई जगहों से इलाज कराना पड़ा।
उज्ज्वला योजना से महिलाओं की दिनचर्या में क्या बदलाव आया?
एलपीजी गैस से खाना कम समय में तैयार होता है, जिससे बच्चों को समय पर भोजन मिल रहा है और महिलाएँ अन्य घरेलू व व्यक्तिगत कार्यों के लिए समय निकाल पा रही हैं। पहले घंटों चूल्हे के सामने बैठना पड़ता था।
क्या उज्ज्वला योजना के सभी लाभार्थी नियमित रूप से सिलेंडर रिफिल करा पाते हैं?
यह योजना की एक बड़ी चुनौती है। राष्ट्रीय स्तर पर कई रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लाभार्थी आर्थिक कारणों से नियमित रिफिल नहीं करा पाते और वापस लकड़ी के चूल्हे पर लौट जाते हैं। ₹300 की सब्सिडी इस बोझ को कम करती है, लेकिन निरंतरता सुनिश्चित करना अभी भी एक लक्ष्य है।
राष्ट्र प्रेस
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