13 जुलाई 2026
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गुमला में 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म: पंचायत ने मामला दबाया, ₹20,000 से मटन-शराब पार्टी; आरोपी गिरफ्तार

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गुमला में 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म: पंचायत ने मामला दबाया, ₹20,000 से मटन-शराब पार्टी; आरोपी गिरफ्तार

सारांश

झारखंड के गुमला में 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद न्याय नहीं, पर्दापोशी हुई — पंचायत ने आरोपी से ₹20,000 वसूले और उसी पैसे से मटन-शराब की पार्टी की। एक सजग नागरिक की सूचना पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया; अब पंचायत आयोजकों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।

मुख्य बातें

11 जुलाई 2026 को झारखंड के गुमला जिले के पलमा गांव में सुनील लोहरा ने 3 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया।
गांव की अवैध पंचायत ने मामला दबाने के लिए आरोपी पर ₹1 लाख जुर्माना लगाया, मौके पर ₹20,000 नकद वसूले।
वसूले गए ₹20,000 से पंचायत के पंचों ने मटन और शराब की पार्टी की।
एक गुमनाम नागरिक की सूचना पर घाघरा थाना पुलिस ने छापेमारी कर आरोपी सुनील लोहरा को गिरफ्तार किया।
आरोपी पर पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज।
पंचायत आयोजकों और शामिल दबंगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी जारी।

झारखंड के गुमला जिले के पलमा गांव में 11 जुलाई 2026 को एक तीन वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद गांव की अवैध पंचायत ने न्याय दिलाने की जगह मामले को दबाने की कोशिश की और आरोपी से वसूले गए ₹20,000 से मटन व शराब की पार्टी की। पुलिस ने सूचना मिलते ही मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

घटनाक्रम: क्या हुआ पलमा गांव में

घाघरा थाना क्षेत्र के पलमा गांव निवासी सुनील लोहरा ने शनिवार, 11 जुलाई 2026 को गांव की ही एक तीन वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी जब गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों को हुई, तो उन्होंने पुलिस को सूचित करने या पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता दिलाने के बजाय रविवार, 12 जुलाई 2026 को एक गुपचुप पंचायत बुलाई।

इस अवैध पंचायत में आरोपी सुनील लोहरा पर ₹1 लाख का आर्थिक जुर्माना लगाया गया। मौके पर ही ₹20,000 नकद वसूल किए गए और शेष ₹80,000 एक सप्ताह के भीतर चुकाने का आदेश दिया गया।

वसूली के पैसों से जश्न: संवेदनहीनता की हद

पीड़ित परिवार की पीड़ा को नज़रअंदाज़ करते हुए पंचायत के तथाकथित पंचों ने आरोपी से वसूले गए उन्हीं ₹20,000 से गांव में मटन और शराब का इंतज़ाम किया और खुलेआम पार्टी की। यह ऐसे समय में हुआ जब पीड़ित बच्ची और उसका परिवार न्याय के लिए तरस रहे थे।

गौरतलब है कि इस तरह की अवैध पंचायतें, जिन्हें 'कंगारू कोर्ट' भी कहा जाता है, देश के कई हिस्सों में संवैधानिक न्याय व्यवस्था को दरकिनार करने की कोशिश करती हैं और विशेष रूप से यौन अपराध के मामलों में पीड़ितों को दबाने का ज़रिया बनती हैं।

पुलिस की कार्रवाई

गांव के एक सजग नागरिक ने गुप्त रूप से घाघरा थाना पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पलमा गांव में छापेमारी की और मुख्य आरोपी सुनील लोहरा को गिरफ्तार कर लिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पंचायत आयोजकों पर भी होगी कार्रवाई

पुलिस अब अवैध पंचायत बुलाने वालों, पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने वालों, साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश करने वालों और शराब पार्टी में शामिल रहे लोगों की पहचान में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, इन सभी के खिलाफ षड्यंत्र और सामाजिक अपराध छुपाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा।

आगे क्या होगा

पीड़ित बच्ची का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया है। जाँच एजेंसियाँ पंचायत में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें कानून के कटघरे में लाने की तैयारी कर रही हैं। यह मामला झारखंड में बाल यौन शोषण की रोकथाम और ग्रामीण स्तर पर अवैध पंचायतों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस समानांतर 'न्याय व्यवस्था' का पर्दाफाश है जो संविधान और पॉक्सो जैसे कड़े कानूनों के बावजूद ग्रामीण भारत में सक्रिय है। पीड़ित की पीड़ा को ₹20,000 में 'निपटाने' और उसी रकम से जश्न मनाने की घटना बताती है कि सामाजिक जवाबदेही का संकट कितना गहरा है। सवाल यह नहीं कि पुलिस ने कार्रवाई की — सवाल यह है कि एक गुमनाम नागरिक की हिम्मत के बिना यह मामला शायद कभी सामने न आता। अवैध पंचायतों पर कार्रवाई तब तक अधूरी रहेगी जब तक आयोजकों को कठोर दंड नहीं मिलता और पीड़ित परिवारों को सुरक्षित रिपोर्टिंग का भरोसा नहीं दिया जाता।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुमला के पलमा गांव में क्या हुआ?
11 जुलाई 2026 को झारखंड के गुमला जिले के पलमा गांव में सुनील लोहरा नामक व्यक्ति ने 3 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद गांव की पंचायत ने मामले को कानूनी रास्ते से हटाकर दबाने की कोशिश की।
पंचायत ने मामले को कैसे दबाने की कोशिश की?
पंचायत ने आरोपी पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया और मौके पर ₹20,000 नकद वसूल किए। इस रकम से पंचायत के सदस्यों ने मटन और शराब की पार्टी की, जबकि पीड़ित परिवार को कानूनी न्याय से वंचित रखा गया।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
एक गुमनाम नागरिक की सूचना पर घाघरा थाना पुलिस ने पलमा गांव में छापेमारी कर मुख्य आरोपी सुनील लोहरा को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
क्या पंचायत के सदस्यों पर भी कार्रवाई होगी?
हाँ, पुलिस अवैध पंचायत बुलाने वालों, पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने वालों और शराब पार्टी में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। इन पर षड्यंत्र, साक्ष्य नष्ट करने और सामाजिक अपराध छुपाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की तैयारी है।
पॉक्सो एक्ट क्या है और यह मामले में कैसे लागू होता है?
पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के यौन शोषण के विरुद्ध भारत का सबसे कड़ा कानून है। इस मामले में 3 वर्षीय पीड़ित बच्ची होने के कारण आरोपी पर पॉक्सो एक्ट की गैर-जमानती धाराएँ लागू हुई हैं, जिनमें कठोर कारावास का प्रावधान है।
राष्ट्र प्रेस
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