ग्वालियर ट्रक हादसा: खड़गे ने माँगी सरकार-प्रशासन की जवाबदेही, राहुल गांधी ने जताया शोक
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 18 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के निकट हुए दर्दनाक ट्रक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। इस हादसे में एक अनियंत्रित ट्रक ने मंदिर के बाहर कतार में खड़े श्रद्धालुओं को रौंद दिया, जिसमें कई लोगों की मृत्यु हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। कांग्रेस नेताओं ने भीड़ प्रबंधन की विफलता को लेकर सरकार और प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की है।
खड़गे की माँग: जवाबदेही तय हो
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के निकट अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।'
खड़गे ने मध्य प्रदेश की राज्य सरकार से माँग की कि घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और हरसंभव सहायता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ऐसे हादसे भीड़ प्रबंधन पर सवाल खड़े करते हैं, सरकार और प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।'
राहुल गांधी और अन्य नेताओं की संवेदनाएं
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, 'ग्वालियर, मध्यप्रदेश में शीतला माता मंदिर के पास एक बेकाबू ट्रक के कारण हुए भीषण हादसे में कई श्रद्धालुओं की मृत्यु की खबर बेहद दुखद है। इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। दुख की इस घड़ी में उनके साथ हूं।'
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा, 'ग्वालियर में शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए सड़क किनारे लाइन में लगे लोगों के ट्रक से कुचलने की घटना में श्रद्धालुओं की मृत्यु और बड़ी संख्या में घायल होने की दुखद घटना से मन व्यथित है।'
मध्य प्रदेश कांग्रेस की जाँच की माँग
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस हादसे को 'सप्तमी की रात हुई त्रासदी' बताते हुए प्रशासन से घायलों के समुचित उपचार और हादसे की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की माँग की। उन्होंने कहा कि ऐसी जाँच होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल
गौरतलब है कि धार्मिक आयोजनों और मंदिर परिसरों के निकट भीड़ प्रबंधन की विफलता के कारण देश में इस प्रकार की दुर्घटनाएँ पहले भी हो चुकी हैं। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों की पर्याप्तता को लेकर बहस जारी है। विपक्षी नेताओं ने तीखा सवाल उठाया है कि क्या धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने पर्याप्त कदम उठाए थे।
इस हादसे के बाद अब सभी की निगाहें मध्य प्रदेश सरकार पर टिकी हैं कि वह पीड़ित परिवारों को राहत देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।