ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसा: जीतू पटवारी का सवाल — साइकिल बंद थी, ट्रक कैसे पहुंचा?
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 21 अक्टूबर 2026 को ग्वालियर पहुंचकर शीतला माता मंदिर हादसे के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और प्रदेश सरकार तथा प्रशासन की जवाबदेही पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस मंदिर परिसर में साइकिल ले जाने तक पर प्रतिबंध था, वहाँ एक ट्रक का पहुंच जाना प्रशासनिक विफलता की गंभीर मिसाल है।
हादसे की जगह पर पटवारी का दौरा
पटवारी ने सबसे पहले हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मिलकर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। इसके बाद वे रिम्स हॉस्पिटल पहुंचे, जहाँ उन्होंने घायलों का हालचाल जाना और उनके उपचार की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि घायलों को अस्पताल में चार-चार घंटे तक इलाज का इंतजार करना पड़ा, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
पटवारी ने कहा कि शीतला माता मंदिर क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, फिर भी प्रशासन यह सुनिश्चित नहीं कर सका कि भारी वाहन वहाँ न पहुंचें। उनका सवाल था कि जब साइकिल तक ले जाने पर पाबंदी थी, तो सुरक्षा निगरानी की इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? उन्होंने कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है।
सरकार की जवाबदेही पर आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में लगातार ऐसी दर्दनाक घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें निर्दोष लोगों की जान जा रही है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचते नजर आते हैं। उनका कहना था — 'आखिर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और इन घटनाओं के लिए जवाबदेह कौन होगा?'
पीड़ितों के लिए मांगें
पटवारी ने सरकार से तीन स्पष्ट मांगें रखीं — घायलों को बेहतर और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाए, प्रभावित परिवारों को उचित सहायता दी जाए, और हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। गौरतलब है कि यह मध्य प्रदेश में हाल के महीनों में धार्मिक स्थल या भीड़-भाड़ वाले इलाके में हुई एक और बड़ी दुर्घटना है, जो सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर बार-बार उठने वाले सवालों को फिर से सामने लाती है।
आगे क्या होगा
विपक्ष की ओर से जांच और कार्रवाई की माँग तेज हो गई है। प्रदेश सरकार की ओर से अब तक इस हादसे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि प्रशासन जांच प्रक्रिया और पीड़ित राहत को लेकर क्या कदम उठाता है।