ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसा: 12 मौतें, परिजनों का पोस्टमार्टम हाउस के बाहर हंगामा, पुलिस पर गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के निकट 18 अक्टूबर 2026 की देर रात एक अनियंत्रित ट्रक के पहाड़ी पर पलटने से हुए हादसे में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हो गए। रविवार सुबह पीड़ित परिजनों ने अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भारी संख्या में इकट्ठा होकर जिला प्रशासन और पुलिस के खिलाफ तीखा विरोध प्रदर्शन किया।
मुख्य घटनाक्रम
हादसा रात लगभग 12 बजे हुआ, जब पहाड़ी पर एक बड़ा ट्रक अनियंत्रित होकर शीतला माता मंदिर के पास मौजूद श्रद्धालुओं पर जा चढ़ा। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि इस मार्ग पर बड़े वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध के बावजूद उक्त ट्रक को प्रवेश दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह दुर्घटना हुई।
सुबह पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जुटे परिजनों के विरोध को देखते हुए एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मौके पर पहुंचे, किंतु आक्रोशित भीड़ ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया और उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच वापस लौटना पड़ा।
परिजनों के गंभीर आरोप
मृतक गौरव की माँ किरण ने पुलिस की लापरवाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा 14 साल का बेटा शीतला मंदिर गया था और वहाँ ट्रक के नीचे दब गया। यह घटना रात को 12 बजे हुई थी, लेकिन सुबह 4 बजे तक पुलिस वहाँ नहीं पहुंची थी।'
किरण ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती के समय उनके बेटे की साँस चल रही थी, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उनके अनुसार, 'मेरा बेटा जिंदा था और हम उसे प्राइवेट अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन पुलिसकर्मी बस स्टैंड के पास से हमें वापस लौटाकर ले आए। इसके कारण मेरे बेटे की मौत हो गई।' ये आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र जाँच की माँग उठ रही है।
मृतक सुरेंद्र की माँ आशा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके बेटे के बारे में गलत जानकारी दी और परिवार को उससे मिलने भी नहीं दिया गया। मृतक दिव्यांश के पिता अशोक ने भी जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि शीतला माता मंदिर मार्ग पर बड़े वाहनों का प्रवेश वर्जित है, फिर भी ट्रक को वहाँ जाने दिया गया। यह सवाल उठता है कि रात के समय ट्रैफिक व्यवस्था की देखरेख कौन कर रहा था और किसकी अनुमति से भारी वाहन उस पहाड़ी मार्ग पर पहुँचा। गौरतलब है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनज़र विशेष सुरक्षा प्रबंध अनिवार्य माने जाते हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से पीड़ित परिजनों के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव के मौके से लौट जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर जाँच शुरू कर दी है, लेकिन ट्रक चालक और उसे प्रवेश देने वाले जिम्मेदारों के विरुद्ध अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं हुआ है।
आगे क्या होगा
पीड़ित परिवार प्रशासन से मुआवज़े, जिम्मेदारों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जाँच की माँग पर अड़े हैं। किरण के आरोप — कि उनका जीवित बेटा पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया — न्यायिक जाँच की माँग को बल दे रहे हैं। इस हादसे ने मध्य प्रदेश में धार्मिक स्थलों के आसपास वाहन प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की तैयारी पर व्यापक बहस छेड़ दी है।