'हनुमान अंश' प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर बागेश्वर धाम पहुंचीं, बोलीं — भारतीय संस्कृति को विश्व तक पहुंचाना है लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म 'हनुमान अंश' की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर 20 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित प्रसिद्ध बागेश्वर धाम पहुंचीं, जहाँ उन्होंने धाम की विभिन्न सेवाओं का जायज़ा लिया और अपनी भावी योजनाओं को साझा किया। नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित इस फिल्म की निर्माता ने कहा कि उनका उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से भारतीय संस्कृति और मूल्यों को वैश्विक मंच पर ले जाना है।
बागेश्वर धाम फिल्म की अफवाह पर सफाई
अनुप्रिया नागर ने पहले उस चर्चा को स्पष्ट रूप से खारिज किया जिसमें यह कहा जा रहा था कि वह बागेश्वर धाम या बागेश्वर महाराज पर फिल्म बनाने की तैयारी में हैं। उन्होंने इसे सिरे से गलतफहमी बताया और कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा।
उन्होंने यह ज़रूर स्वीकार किया कि धाम और गुरुजी के प्रति उनकी गहरी आस्था है। उनके शब्दों में, यहाँ आने पर ऐसा लगता है जैसे वह अपने परिवार के बीच आई हों। भविष्य में किसी भी कार्य के लिए गुरुजी के मार्गदर्शन और आशीर्वाद की उनकी चाहत बनी रहेगी।
धाम का अनुभव और ऊर्जा
यह अनुप्रिया की बागेश्वर धाम की दूसरी यात्रा थी — इससे पहले वह भिवंडी मठ भी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने यहाँ की सभी व्यवस्थाएँ देखी हैं। यहाँ की ऊर्जा और आस्था बहुत मज़बूत है और मैंने व्यक्तिगत रूप से इसे महसूस किया है।'
उन्होंने धाम में संचालित अन्नपूर्णा रसोई और भंडारे की विशेष प्रशंसा की, जहाँ रोज़ाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाता है। साथ ही उन्होंने गौशाला का दौरा किया और निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल की योजना के बारे में जानकारी ली।
'हनुमान अंश' का सफर और चुनौतियाँ
अपनी फिल्म के शुरुआती दौर को याद करते हुए अनुप्रिया ने बताया कि पहले सप्ताह के बाद उद्योग में तरह-तरह की बातें होने लगी थीं और चिंता का माहौल बन गया था। इसके बावजूद पूरी टीम ने हिम्मत नहीं खोई।
उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा नीम करौली बाबा की कृपा पर भरोसा रहा और इसी विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ाया। गुरुजी से मिले मार्गदर्शन ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में आगे के काम के लिए प्रेरित किया है। वह कहती हैं कि वह अभी भी सीखने की स्थिति में हैं।
गुरुकुल और कैंसर अस्पताल की पहल
अनुप्रिया ने धाम के गुरुकुल का भी दौरा किया। उन्होंने बताया कि यहाँ बच्चों को संस्कृत और अंग्रेज़ी के साथ-साथ घुड़सवारी और अन्य गतिविधियाँ भी सिखाई जा रही हैं — जो पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा के अनूठे संगम का उदाहरण है।
निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल के बारे में उन्होंने कहा कि यह जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी राहत होगी। अभी गुरुजी व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की मदद करते हैं, लेकिन अस्पताल पूरा होने पर इलाज की सुविधा और अधिक व्यापक हो जाएगी।
भविष्य की योजनाएँ
अनुप्रिया नागर ने स्पष्ट किया कि उनका फोकस केवल व्यावसायिक फिल्में बनाने तक सीमित नहीं है। वह भारतीय संस्कृति और मूल्यों को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक — और विश्व स्तर पर — पहुँचाना चाहती हैं। यह लक्ष्य 'हनुमान अंश' जैसी आध्यात्मिक सामग्री पर केंद्रित फिल्मों के माध्यम से आगे बढ़ाने की उनकी मंशा को दर्शाता है।