बागेश्वर धाम में 365 बेटियों के कन्या विवाह का संकल्प, आठ महावीर शिलाओं की स्थापना
सारांश
मुख्य बातें
छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण सामाजिक संकल्प की घोषणा की — बागेश्वर धाम अब देश का पहला ऐसा तीर्थस्थल बनेगा जहाँ वर्ष के 365 दिनों में 365 जरूरतमंद बेटियों का कन्या विवाह संपन्न कराया जाएगा। इसी अवसर पर धाम परिसर में आठ महावीर शिलाओं का विधिवत अनावरण एवं स्थापना भी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कन्या विवाह पहल: क्या है संकल्प
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि एक वर्ष में 365 दिन होते हैं और बागेश्वर धाम विश्व का पहला ऐसा तीर्थ बन गया है, जहाँ प्रत्येक दिन एक जरूरतमंद बेटी का विवाह कराने का संकल्प लिया गया है। इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों की सहायता करना है जो आर्थिक कारणों से अपनी बेटियों का विवाह कराने में असमर्थ हैं। यह आयोजन धार्मिक और सामाजिक दायित्व को एक साथ जोड़ने का प्रयास बताया जा रहा है।
आठ महावीर शिलाओं की स्थापना
29 जुलाई को बागेश्वर धाम परिसर में अष्टवीरों की तांत्रिक शिलाओं की विधिवत स्थापना की गई। शास्त्री ने कहा कि ये शिलाएँ श्रद्धालुओं की आस्था का नया केंद्र बनेंगी। उनके अनुसार, जो लोग नकारात्मक ऊर्जा या मानसिक परेशानियों से ग्रसित हैं, उन्हें अब कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं — बालाजी के चरणों से ही पूर्ण लाभ मिलेगा।
धाम के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (X) पर बागेश्वर धाम सरकार ने लिखा: 'बागेश्वर धाम पर स्थापित हुए अष्टवीरों की तांत्रिक शिला — विश्वभर के तांत्रिक विद्या से ग्रस्त लोगों को मिलेगी बालाजी की कृपा एवं पुण्य लाभ।'
धार्मिक और सामाजिक महत्व
गौरतलब है कि बागेश्वर धाम पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना है। शास्त्री की धार्मिक सभाओं में लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। कन्या विवाह की यह पहल सामाजिक दायित्व की दिशा में धाम का एक नया कदम मानी जा रही है, जो धार्मिक आस्था को व्यावहारिक सामाजिक सेवा से जोड़ती है।
आगे क्या
शास्त्री के इस संकल्प के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 365 कन्या विवाहों की यह योजना किस प्रकार क्रियान्वित की जाती है और इससे कितने परिवारों को लाभ मिलता है। धाम प्रबंधन की ओर से अभी विस्तृत क्रियान्वयन योजना सार्वजनिक नहीं की गई है। श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों में इस घोषणा को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।