फिल्म 'हनुमान अंश' पर ऋतेश्वर महाराज: 'बॉलीवुड में बदल रही है सनातन संस्कृति की तस्वीर'
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज में श्री आनंदम धाम के पीठाधीश्वर सद्गुरु ऋतेश्वर जी महाराज ने 9 सितंबर को फिल्म 'हनुमान अंश' की व्यावसायिक सफलता को भारतीय समाज की बदलती मानसिकता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ पहले बॉलीवुड में राष्ट्र-विरोधी पूँजी के ज़रिए भारत की ऐतिहासिक और धार्मिक स्मृतियों को मिटाने का प्रयास होता था, वहीं अब सनातन संस्कृति पर आधारित फिल्में दर्शकों का दिल जीत रही हैं। साथ ही उन्होंने फिल्म पर विपक्षी नेताओं के बयानों का भी खंडन किया।
बॉलीवुड में सांस्कृतिक बदलाव
ऋतेश्वर महाराज ने कहा, 'भारत की संस्कृति सनातन संस्कृति है। दुर्भाग्य से, पहले हॉलीवुड और बॉलीवुड में राष्ट्र-विरोधी पैसे का इस्तेमाल हो रहा था। वे हमारी संस्कृति को खत्म कर रहे थे — चाहे वह हमारे युवा हों, हमारी ऐतिहासिक स्मृतियाँ हों या हमारी धार्मिक स्मृतियाँ, सबको नष्ट करते थे।' उन्होंने आगे जोड़ा कि पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड में भारतीय नायकों, धर्म और संस्कृति पर आधारित फिल्में बनने लगी हैं, जो दर्शकों को गहराई से प्रभावित कर रही हैं।
महाराज के अनुसार, 'फिल्में आज भी लोगों को प्रभावित करती हैं। वेब सीरीज और फिल्में दोनों का असर होता है।' उनका मानना है कि जैसे-जैसे सनातन और राष्ट्रवादी विचारधारा के निर्माता इस क्षेत्र में आएँगे, युवा पीढ़ी की सांस्कृतिक दिशा सुधरेगी।
'हनुमान अंश' की सफलता का संदेश
ऋतेश्वर महाराज ने 'हनुमान अंश' के बारे में कहा, 'यह एक संत के जीवन और भगवान हनुमान पर आधारित फिल्म है। कम बजट में बनने के बावजूद यह अब अच्छी-खासी कमाई का ज़रिया बन गई है। इसका मतलब है कि भारत की मानसिकता अब बदल गई है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बॉलीवुड में धार्मिक और पौराणिक विषयों पर बनी फिल्मों की सफलता एक उल्लेखनीय प्रवृत्ति बन चुकी है।
महाराज ने यह भी कहा कि भारत की 'जेन-जी' और 'जेन-अल्फा' पीढ़ी एआई तकनीक, कोडिंग और मेटाफिज़िक्स के साथ-साथ सनातन वैदिक धर्म की ओर लौटना चाहती है। उनके अनुसार, 'जब ये दोनों मिलेंगे, तो भारत फिर से विश्वगुरु बनने में सफल होगा।'
विपक्षी नेताओं के बयानों पर पलटवार
फिल्म 'हनुमान अंश' को लेकर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर धर्म को राजनीति में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। इस पर ऋतेश्वर महाराज ने कहा, 'भारत सनातन संस्कृति की भूमि है। धर्म से राजनीति जन्म लेती है। अगर धर्म माँ है, तो राजनीति बेटी है।' उन्होंने चेतावनी दी कि यदि धर्म के आसन को राजनीतिक सिंहासन के नीचे रखा जाए, तो देश की दशा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसी हो सकती है।
महाराज ने यह भी कहा, 'जिसकी जैसी सोच होगी, वो वैसा बयान देगा। भारत और सनातन का रक्त जिसके भीतर होगा, वो कभी भी सत्य, धर्म और प्रेम का विरोध नहीं कर सकता।' उन्होंने लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि यदि आरोप केवल आरोप के लिए लगाए जा रहे हों, तो सरकार को अपना काम जारी रखना चाहिए।
प्रयागराज में राम वनगमन मार्ग धंसने पर प्रतिक्रिया
प्रयागराज में राम वनगमन मार्ग धंसने की घटना पर ऋतेश्वर महाराज ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले जाँच होनी चाहिए कि यह प्राकृतिक आपदा थी या निर्माण में कोई कमी। उनके अनुसार, 'अगर निर्माण में कोई खामी थी, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।'
महाराज ने कहा कि ऐसी घटनाएँ हर युग में होती रही हैं, और अहम यह है कि सरकार कितनी तेज़ी से सुधारात्मक कदम उठाती है। उनका यह बयान स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही की माँग के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की दिशा
ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संगम से भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान की नींव रखी जा रही है। उनके अनुसार, 'अभी बड़ी क्रांति बाकी है' — यह संकेत देते हुए कि 'हनुमान अंश' जैसी फिल्मों की सफलता केवल एक शुरुआत है, और आने वाले समय में सनातन विषयों पर और अधिक सशक्त सिनेमाई प्रयास अपेक्षित हैं।