हर घर तिरंगा 2026: त्रिपुरा में 9 से 17 अगस्त तक देशभक्ति कार्यक्रम, CM माणिक साहा करेंगे रैली का उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा सरकार ने हर घर तिरंगा 2026 अभियान की तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। 9 से 17 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस अभियान के पाँचवें संस्करण में राज्यभर में देशभक्ति से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। अगरतला में 7 अगस्त को अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मूल उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाना, स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देना और देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुँचाना है।
अभियान की पृष्ठभूमि और इस वर्ष का महत्व
सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य (ICA) विभाग के सचिव किरण गिट्टे ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत वर्ष 2022 में इस अभियान की नींव रखी थी। यह ऐसे समय में आया है जब इस वर्ष के कार्यक्रम 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगाँठ को समर्पित किए गए हैं, जिससे इसका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व और भी बढ़ जाता है। गौरतलब है कि यह अभियान अब केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की एक राष्ट्रव्यापी पहल का रूप ले चुका है।
मुख्य कार्यक्रम और आयोजन
गिट्टे ने बताया कि राज्य स्तरीय हर घर तिरंगा रैली 11 अगस्त को आयोजित होगी, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री माणिक साहा करेंगे। यह रैली ऐतिहासिक उज्जयंता पैलेस से शुरू होकर राजधानी की प्रमुख सड़कों से गुजरते हुए रवींद्र शताबर्षिकी भवन पर समाप्त होगी। उसी दिन वहाँ तिरंगा प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे।
अभियान के तहत पूरे राज्य में तिरंगा रैली, बाइक और साइकिल रैली, तिरंगा रोशनी, रंगोली प्रतियोगिताएँ, 'तिरंगा सलाम' और 'सेल्फी विद तिरंगा' जैसे जन-भागीदारी वाले आयोजन होंगे। नागरिकों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
जन-भागीदारी और ग्रामीण पहुँच
ICA विभाग के निदेशक बिम्बिसार भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार इस अभियान को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। राज्य स्तरीय आयोजनों के अतिरिक्त सभी जिलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम होंगे, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों तक अभियान की पहुँच सुनिश्चित हो। छात्र, युवा, क्लब और गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी इसमें सक्रिय भागीदार बनेंगे।
आगे क्या
अभियान 17 अगस्त 2026 तक चलेगा और इसकी परिणति 78वें स्वतंत्रता दिवस के आसपास होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष अभियान की व्यापकता पिछले संस्करणों से अधिक रहने की उम्मीद है, क्योंकि 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगाँठ इसे एक विशेष ऐतिहासिक आयाम देती है।