हरियाणा बिजली निजीकरण: अनिल विज बोले — एचईआरसी के फैसले के खिलाफ 5-6 दिन में अपील, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने 21 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में साफ कहा कि राज्य सरकार बिजली वितरण के निजीकरण पर हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के फैसले को चुनौती देगी और इसके लिए 5-6 दिन के भीतर अपील दाखिल की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो सरकार सर्वोच्च न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाने से नहीं हिचकेगी।
मुख्य घटनाक्रम
विज ने स्पष्ट किया कि एचईआरसी एक स्वायत्त संस्था है जो केंद्र सरकार के बिजली कानून के तहत गठित है। उन्होंने कहा, 'हमने तो किसी को आमंत्रित नहीं किया कि हम प्राइवेटाइजेशन करना चाहते हैं, आप आवेदन करो। हमने किसी से कोई आवेदन नहीं मांगा।' उनका तर्क था कि उस अधिनियम में प्रावधान है कि कोई भी सेवा प्रदाता स्वेच्छा से आवेदन दे सकता है और इसी प्रावधान के तहत किसी ने आवेदन दिया है।
मंत्री ने कहा कि उनके विभाग ने पूरी मेहनत से फैसले का विरोध किया, अच्छे वकील नियुक्त किए और डटकर पक्ष रखा। अब चूँकि आयोग ने अपना आदेश सुना दिया है, सरकार अगले कानूनी विकल्प की ओर बढ़ेगी।
अपील की समयसीमा और रणनीति
यद्यपि कानूनी प्रावधान के तहत अपील दाखिल करने के लिए 45 दिन का समय उपलब्ध है, विज ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि अपील 5 से 6 दिन के भीतर ही दाखिल की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य एचईआरसी के आदेश पर स्टे हासिल करना है। यह ऐसे समय में आया है जब बिजली कर्मचारी यूनियनें निजीकरण के विरोध में हड़ताल की चेतावनी दे चुकी हैं।
कर्मचारी यूनियनों को आश्वासन
विज ने कर्मचारी यूनियनों को भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि यूनियन के प्रतिनिधियों से बातचीत हो चुकी है और उन्हें यह सुझाव दिया गया है कि वे अपने वकील को सरकारी वकील के साथ मिलकर केस तैयार करने में लगाएँ। उन्होंने यह भी कहा, 'हम आखिर दम तक लड़ेंगे। अगर सुप्रीम कोर्ट में जाना पड़ेगा, वहां भी जाएंगे।'
गौरतलब है कि विज ने यूनियन नेताओं की हड़ताल की मंशा को भी संबोधित किया। उनका कहना था कि चूँकि सरकार खुद अपील कर रही है और पहले दिन से ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, इसलिए हड़ताल का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने मुख्यमंत्री को भी पूरी स्थिति से अवगत कराया जाने की बात कही।
सरकार की प्रतिक्रिया और रुख
विज ने स्पष्ट संकेत दिया कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार अपील करने से मना करती तो कर्मचारियों का हड़ताल करना न्यायसंगत होता, लेकिन जब सरकार स्वयं कानूनी लड़ाई लड़ रही है तो यूनियनों को भरोसा रखना चाहिए।
क्या होगा आगे
अनुमान है कि हरियाणा सरकार अगले कुछ दिनों में अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दाखिल करेगी। स्टे मिलने या न मिलने पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि राहत नहीं मिली, तो सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का विकल्प खुला रखा गया है। बिजली कर्मचारी यूनियनें सरकार के कदम पर नज़र बनाए हुए हैं और अगले चरण का निर्णय उसी के आधार पर लेंगी।