23 अक्टूबर 2026
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गुरुग्राम बिजली निजीकरण: इलेवन पावर को लाइसेंस पर AIPEF का तीखा विरोध, तीन दिवसीय हड़ताल जारी

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गुरुग्राम बिजली निजीकरण: इलेवन पावर को लाइसेंस पर AIPEF का तीखा विरोध, तीन दिवसीय हड़ताल जारी

सारांश

हरियाणा में बिजली निजीकरण की आग भड़क उठी है। मात्र ₹1 करोड़ पूंजी वाली इलेवन पावर को गुरुग्राम में लाइसेंस देने के खिलाफ AIPEF ने मोर्चा खोल दिया है — उत्तर भारत के 8 राज्यों का समर्थन और तीन दिवसीय हड़ताल इस विरोध को राष्ट्रीय आयाम दे रहे हैं।

मुख्य बातें

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने हरियाणा सरकार की बिजली लाइसेंसिंग नीति को जनहित के विरुद्ध बताया।
इलेवन पावर कंपनी की कुल पूंजी मात्र ₹1 करोड़ ; बिजली क्षेत्र में कोई पूर्व अनुभव नहीं, फिर भी गुरुग्राम में वितरण लाइसेंस मिला।
फेडरेशन के अनुसार, समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की यह व्यवस्था देश में अन्यत्र कहीं लागू नहीं है।
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल जारी; उत्तर भारत के 8 राज्यों ने समर्थन में पत्र भेजा।
फेडरेशन ने बिजली अधिनियम के तहत नियामक आयोग से लाइसेंस रद्द कराने की माँग की।
निजीकरण की तुलना BSNL के अनुभव से — शुरुआती सस्ती दरें, बाद में टैरिफ वृद्धि का खतरा।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने 23 अक्टूबर 2026 को हरियाणा सरकार की बिजली लाइसेंसिंग नीति को जनहित के विरुद्ध करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। गुरुग्राम में बिजली वितरण का लाइसेंस निजी कंपनी इलेवन पावर को दिए जाने के फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल जारी है, जिसका यह दूसरा दिन था।

इलेवन पावर को लाइसेंस — क्या हैं आपत्तियाँ

शैलेंद्र दुबे ने बताया कि इलेवन पावर कंपनी की कुल पूंजी मात्र ₹1 करोड़ है और उसके पास बिजली क्षेत्र में कार्य करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं है। इसके बावजूद उसे गुरुग्राम जैसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में बिजली वितरण का लाइसेंस प्रदान किया गया है। दुबे के अनुसार, समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की ऐसी व्यवस्था देश में अन्यत्र कहीं लागू नहीं है।

उन्होंने महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख औद्योगिक राज्यों का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि जब वहाँ यह व्यवस्था नहीं अपनाई गई, तो हरियाणा में इसे लागू करने की आवश्यकता क्यों है। फेडरेशन ने सरकार से इस लाइसेंस को तत्काल निरस्त करने की माँग की है।

सब्सिडी उपभोक्ताओं पर संभावित असर

दुबे ने स्पष्ट किया कि बिजली उपभोक्ताओं में दो वर्ग होते हैं — सब्सिडी प्राप्त और बिना सब्सिडी वाले। सरकारी वितरण कंपनियाँ जनहित में सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं को लागत से कम दर पर बिजली आपूर्ति करती हैं, जबकि निजी कंपनियाँ घाटे में सेवा देने के लिए बाध्य नहीं होतीं।

उन्होंने आशंका जताई कि इलेवन पावर मुख्यतः गुरुग्राम के वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देगी, क्योंकि उनसे अधिक मुनाफा मिल सकता है। यदि ऐसा होता है, तो दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) पर आर्थिक बोझ और बढ़ सकता है।

बीएसएनएल जैसे हालात की चेतावनी

दुबे ने चेताया कि निजीकरण के शुरुआती चरण में उपभोक्ताओं को कम दरों पर बिजली मिल सकती है, लेकिन कालांतर में टैरिफ बढ़ने की आशंका प्रबल है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना BSNL के अनुभव से करते हुए कहा कि बुनियादी ढाँचा एक बार निजी हाथों में चला जाने के बाद सार्वजनिक हित में वापस लाना कठिन हो जाता है।

फेडरेशन ने माँग की है कि सरकार बिजली अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए नियामक आयोग को नीतिगत निर्देश जारी कर संबंधित लाइसेंस रद्द कराए।

हड़ताल और राष्ट्रव्यापी समर्थन

दुबे ने बताया कि बिजली कर्मचारियों ने पहले दशहरा, दीपावली और गुरु नानक देव जी की जयंती के बाद 1 दिसंबर से हड़ताल का नोटिस दिया था। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने दशहरे से एक दिन पहले ही ऐसे हालात पैदा कर दिए जिससे हड़ताल अपरिहार्य हो गई।

उत्तर भारत के आठ राज्यों के कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त मोर्चे ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हड़ताल का समर्थन किया है। इन राज्यों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनके कर्मचारियों को हड़ताल के दौरान हरियाणा में ड्यूटी पर भेजा गया, तो वे वहाँ कार्य करने से इनकार कर देंगे।

आगे की राह

फेडरेशन की प्रमुख माँग निजी कंपनी का लाइसेंस रद्द करना है। शैलेंद्र दुबे ने सरकार से जनहित और वितरण व्यवस्था पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। यदि सरकार वार्ता के लिए आगे नहीं आती, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल उठाता है कि लाइसेंस देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता कितनी थी। BSNL की तुलना सटीक है — बुनियादी ढाँचा एक बार निजी हाथों में जाने के बाद सार्वजनिक हित में उसे वापस लाना लगभग असंभव हो जाता है। सरकार को हड़ताल को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या न मानकर इसे नीतिगत पुनर्विचार के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलेवन पावर कंपनी को गुरुग्राम में बिजली लाइसेंस क्यों दिया गया?
हरियाणा सरकार ने बिजली वितरण में प्रतिस्पर्धा और निजी निवेश को बढ़ावा देने की नीति के तहत इलेवन पावर कंपनी को गुरुग्राम में समानांतर वितरण लाइसेंस दिया है। हालाँकि सरकार ने इस फैसले का विस्तृत औचित्य सार्वजनिक नहीं किया है।
AIPEF इस लाइसेंस का विरोध क्यों कर रहा है?
AIPEF का कहना है कि इलेवन पावर के पास मात्र ₹1 करोड़ की पूंजी है और बिजली क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं है। फेडरेशन को आशंका है कि निजी कंपनी सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं की उपेक्षा कर केवल मुनाफेदार वाणिज्यिक क्षेत्र को बिजली देगी, जिससे सरकारी वितरण निगम की वित्तीय स्थिति और कमज़ोर होगी।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल कब से चल रही है और इसकी मुख्य माँग क्या है?
23 अक्टूबर 2026 को हड़ताल का दूसरा दिन था, अर्थात यह तीन दिवसीय हड़ताल 22 अक्टूबर से शुरू हुई। कर्मचारियों की मुख्य माँग इलेवन पावर को दिया गया लाइसेंस रद्द करना है।
क्या अन्य राज्यों में भी इस तरह का समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया गया है?
AIPEF के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे के अनुसार, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख औद्योगिक राज्यों में भी इस प्रकार की समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था लागू नहीं है। उनका दावा है कि यह व्यवस्था देश में कहीं और प्रचलित नहीं है।
सरकार के पास लाइसेंस रद्द करने का क्या कानूनी आधार है?
AIPEF का कहना है कि बिजली अधिनियम के तहत सरकार के पास नियामक आयोग को नीतिगत निर्देश देने की शक्ति है, जिसके ज़रिए संबंधित लाइसेंस रद्द कराया जा सकता है। फेडरेशन ने सरकार से इसी विधिक रास्ते का उपयोग करने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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