होलामोहल्ला पर्व: साहस, धर्म और संस्कृति का जीवंत उत्सव - नायब सिंह सैनी

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होलामोहल्ला पर्व: साहस, धर्म और संस्कृति का जीवंत उत्सव - नायब सिंह सैनी

सारांश

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिरसा में होला मोहल्ला समारोह में भाग लिया। उन्होंने इसे साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक बताया। जानें इस भव्य समारोह की खास बातें और संतों का समाज में योगदान।

Key Takeaways

  • होलामोहल्ला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक है।
  • समाज में भाईचारे और एकता को बढ़ावा देता है।
  • संत समाज का योगदान समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण है।

चंडीगढ़, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को सिरसा जिले में स्थित नामधारी गुरुद्वारे में आयोजित भव्य होलामोहल्ला समारोह में भाग लिया और संत समाज से आशीर्वाद प्राप्त किया।

समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस पवित्र आश्रम में मनाए जा रहे गौरवशाली होला मोहल्ला पर्व के अवसर पर यहां आकर उन्हें अत्यधिक खुशी हो रही है।

मुख्यमंत्री ने संत दिलीप सिंह महाराज के चरणों में नमन करते हुए कहा कि संत समाज प्रेम, सेवा, भाईचारे और आध्यात्मिकता के माध्यम से समाज को जोड़ने का महान कार्य कर रहा है।

उन्होंने बताया कि सिरसा की इस पवित्र भूमि पर लंबे समय से संतों और महान विभूतियों ने तपस्या की है। वर्ष 1507 में पहले सिख गुरु गुरु नानक ने इस भूमि पर कदम रखा था। उनके संदेश को आगे बढ़ाने के लिए यहां गुरुद्वारा श्री चिल्ला साहिब की स्थापना की गई थी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस भूमि से बाबा सरसाई नाथ और बाबा भूमन शाह जैसे कई संतों ने आध्यात्मिकता, सेवा और मानवता का संदेश फैलाया। उनके उपदेश आज भी समाज को सही दिशा दिखा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि होलामोहल्ला केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध संस्कृति, वीरता और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह लोगों को जीवन में साहस और भक्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने और धर्म की रक्षा करने का संकल्प भी दर्शाता है। उन्होंने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा परंपराओं को मजबूत करने और समाज में भाईचारा व एकता को बढ़ावा देने के लिए होली के उत्साह के साथ होलामोहल्ला मनाने की परंपरा शुरू की थी।

उन्होंने कहा कि नामधारी समुदाय का इतिहास त्याग, तपस्या और समर्पण से भरा हुआ है। सतगुरु राम सिंह महाराज द्वारा शुरू किया गया कूका आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जब देश अंग्रेजों के शासन में था, तब नामधारी समुदाय ने स्वदेशी अपनाने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का संदेश दिया, जिससे स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।

उन्होंने मलेरकोटला में तोपों के सामने डटकर खड़े होने वाले नामधारी शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि इन वीरों ने मुस्कुराते हुए अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन सत्य और आत्मसम्मान का रास्ता कभी नहीं छोड़ा।

Point of View

बल्कि समाज में साहस और मानवता की भावना को भी जगाया। यह पर्व हमारे सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें अपने अतीत से जोड़ता है।
NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

होलामोहल्ला पर्व का महत्व क्या है?
होलामोहल्ला पर्व साहस, भाईचारे और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संकल्प भी दर्शाता है।
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