पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन की पहल: मंत्रियों को मिले साफ छवि वाले WBCS अधिकारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने 18 मई 2026 को पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन की दिशा में एक ठोस कदम उठाया। नई कैबिनेट के मंत्रियों के लिए पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (WBCS) के उन अधिकारियों को 'एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट' नियुक्त किया गया है, जिनका सेवा रिकॉर्ड ईमानदारी और राजनीतिक निष्पक्षता के लिहाज से बेदाग रहा है।
नियुक्तियों का विवरण
2013 बैच के WBCS अधिकारी बिस्वनाथ चौधरी को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट नियुक्त किया गया है। चौधरी फिलहाल हुगली जिला परिषद में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं।
2016 बैच के अधिकारी कृष्ण चंद्र मुंडा को पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री खुदीराम टुडु का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट बनाया गया है। वह वर्तमान में बांकुड़ा जिले में डिप्टी मजिस्ट्रेट-कम-डिप्टी कलेक्टर के रूप में तैनात हैं।
इसी बैच के कौशिक कुमार मैती को खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता मंत्री अशोक कीर्तनिया का एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट नियुक्त किया गया है। मैती अभी दक्षिण 24 परगना के जिला योजना अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
चयन प्रक्रिया और मापदंड
राज्य के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने इन नियुक्तियों की अधिसूचना जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र नई जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया है। नबन्ना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चयन प्रक्रिया में ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रशासनिक छवि को प्राथमिकता दी गई।
सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों का चयन उनके सेवा रिकॉर्ड की गहन समीक्षा के बाद किया गया है और राजनीतिक रूप से निष्पक्ष पृष्ठभूमि को विशेष महत्त्व दिया गया।
व्यापक प्रशासनिक फेरबदल
यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में BJP सरकार के गठन के बाद से प्रशासनिक ढाँचे में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य सचिवालय के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि सरकार ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के दौरान सेवा में बने रहे 60 वर्ष से अधिक आयु के 243 अधिकारियों का कार्यकाल विस्तार समाप्त कर दिया है। इसके अलावा हाल ही में दो IAS अधिकारियों की मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्ति भी की गई है।
आम जनता पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साफ छवि वाले अधिकारियों की मंत्रियों के साथ तैनाती से मंत्रालयों में निर्णय-प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है। यह कदम उन नागरिकों के लिए महत्त्वपूर्ण है जो पिछले वर्षों में सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार की शिकायत करते रहे हैं।
क्या होगा आगे
नई सरकार के प्रशासनिक सुधारों की यह श्रृंखला आने वाले हफ्तों में और विस्तार पाने की संभावना है। मुख्यमंत्री कार्यालय के पुनर्गठन और अतिरिक्त IAS नियुक्तियों के साथ, राज्य की नौकरशाही में व्यापक बदलाव की रूपरेखा धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही है।