22 अक्टूबर 2026
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मोदी-टस्क वार्ता: पहलगाम हमले की निंदा, UNSC सूचीबद्ध आतंकी संगठनों पर कड़ी कार्रवाई का आह्वान

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मोदी-टस्क वार्ता: पहलगाम हमले की निंदा, UNSC सूचीबद्ध आतंकी संगठनों पर कड़ी कार्रवाई का आह्वान

सारांश

मोदी-टस्क की हैदराबाद हाउस वार्ता केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं थी — पहलगाम हमले की सीधी निंदा, UNSC 1267 सूचीबद्ध संगठनों पर कार्रवाई का आह्वान और CCIT की माँग ने इसे भारत के आतंकवाद-विरोधी एजेंडे की यूरोपीय स्वीकृति की दिशा में एक ठोस कदम बना दिया।

मुख्य बातें

PM मोदी और पोलैंड के PM डोनाल्ड टस्क ने 22 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की।
दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की।
UNSC 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा नामित आतंकियों और संगठनों के विरुद्ध ठोस एवं एकजुट कार्रवाई का आह्वान किया गया।
संयुक्त राष्ट्र में CCIT (अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन) को शीघ्र अपनाने की माँग की गई।
पोलैंड ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता और 2028-29 की अस्थायी सीट की उम्मीदवारी का समर्थन किया।
भारत ने पोलैंड को हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) में शामिल होने का निमंत्रण दिया; V4+भारत प्रारूप को मजबूत करने पर सहमति बनी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़ी निंदा की तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों और उसके पूरे ढाँचे को ध्वस्त करने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रखने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा नामित आतंकियों और आतंकी संगठनों के विरुद्ध ठोस एवं समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

पहलगाम हमले की संयुक्त निंदा

वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट शब्दों में भर्त्सना की। संयुक्त बयान में कहा गया, 'आतंकवाद का किसी भी रूप में कोई औचित्य नहीं हो सकता और इसके विरुद्ध वैश्विक सहयोग को और मजबूत किया जाना चाहिए।' यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव का दौर जारी है।

दोनों पक्षों ने आतंकवाद के वित्तपोषण के नेटवर्क को तोड़ने और पनाहगाहों को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में तेज़ी लाने पर सहमति जताई। गौरतलब है कि यूएनएससी की 1267 समिति का सीधा संदर्भ भारत के उस दीर्घकालिक रुख को रेखांकित करता है जिसमें वह पाकिस्तान-आधारित आतंकी समूहों के नेताओं को वैश्विक रूप से प्रतिबंधित करवाने की माँग करता रहा है।

CCIT और आतंकवाद-रोधी सहयोग

संयुक्त वक्तव्य में दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन' (CCIT) को शीघ्र अपनाए जाने की माँग की। यह सम्मेलन भारत की वह पुरानी प्राथमिकता है जो दो दशकों से संयुक्त राष्ट्र में लंबित है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय स्तर पर आतंकवाद-रोधी मुद्दों पर नियमित संवाद जारी रखने पर भी सहमति जताई।

UNSC सुधार में पोलैंड का समर्थन

बहुपक्षवाद के संदर्भ में दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर को केंद्र में रखते हुए यूएन संरचना में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया। संयुक्त बयान के अनुसार, पोलैंड ने एक अधिक समावेशी और विस्तारित UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। इसके साथ ही, 2028-29 के लिए यूएनएससी में भारत की अस्थायी सीट की उम्मीदवारी का भी पोलैंड ने समर्थन दोहराया।

हिंद-प्रशांत और V4+भारत सहयोग

मोदी और टस्क ने एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर सहमति जताई। 1982 के UNCLOS सहित अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के सम्मान और नौवहन की स्वतंत्रता को बनाए रखने पर दोनों देशों ने जोर दिया। भारत ने पोलैंड को 'हिंद-प्रशांत महासागर पहल' (IPOI) में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

दोनों नेताओं ने भारत और 'विशेग्राद समूह' (V4) — जिसमें पोलैंड, हंगरी, चेक गणराज्य और स्लोवाक गणराज्य शामिल हैं — के बीच विदेश मंत्रियों की पहली बैठक का भी स्वागत किया और 'V4+भारत' प्रारूप के माध्यम से सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही दोनों पक्षों ने G20 में सहयोग जारी रखने की इच्छाशक्ति भी व्यक्त की।

आगे क्या

इस वार्ता के नतीजे भारत की उस कूटनीतिक रणनीति की एक और कड़ी हैं जिसमें वह यूरोपीय देशों को अपने आतंकवाद-विरोधी रुख का समर्थक बनाने में जुटा है। CCIT की स्वीकृति और UNSC विस्तार पर पोलैंड जैसे यूरोपीय देशों का समर्थन भारत को संयुक्त राष्ट्र में अपनी प्राथमिकताएँ आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। आने वाले महीनों में V4+भारत प्रारूप की गतिविधियाँ और IPOI में पोलैंड की भूमिका भारत-यूरोप संबंधों की नई दिशा तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पर्याप्त नहीं। V4+भारत प्रारूप की पहली विदेश मंत्री बैठक एक संरचनात्मक कदम जरूर है, परंतु इसकी वास्तविक परीक्षा यूरोपीय नीति-निर्माण में भारत के हितों की वकालत से होगी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदी-टस्क वार्ता में आतंकवाद पर क्या सहमति बनी?
दोनों नेताओं ने UNSC की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा नामित आतंकियों और संगठनों के विरुद्ध कड़ी एवं समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया। साथ ही आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क को तोड़ने और सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने पर भी सहमति जताई।
पहलगाम आतंकी हमले का इस वार्ता में क्या संदर्भ था?
संयुक्त वक्तव्य में दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट शब्दों में भर्त्सना की। यह भारत की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें वह यूरोपीय साझेदारों से पहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय निंदा करवाना चाहता है।
UNSC में भारत की सदस्यता पर पोलैंड का क्या रुख है?
पोलैंड ने एक विस्तारित UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। इसके अलावा 2028-29 के लिए UNSC में भारत की अस्थायी सीट की उम्मीदवारी का भी पोलैंड ने समर्थन दोहराया।
CCIT क्या है और इसे लेकर भारत-पोलैंड की माँग क्यों महत्वपूर्ण है?
CCIT यानी 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन' एक प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र संधि है जो दो दशकों से लंबित है। भारत इसका प्रमुख समर्थक रहा है क्योंकि यह आतंकवाद की एकीकृत परिभाषा और अभियोजन ढाँचा तैयार करेगा; पोलैंड का समर्थन इस एजेंडे को यूरोपीय मंचों पर मजबूती देता है।
V4+भारत प्रारूप क्या है और इसका क्या महत्व है?
विशेग्राद समूह (V4) में पोलैंड, हंगरी, चेक गणराज्य और स्लोवाक गणराज्य शामिल हैं। V4+भारत प्रारूप के तहत भारत और इन चार मध्य-यूरोपीय देशों के बीच पहली विदेश मंत्री बैठक हो चुकी है, जो भारत-यूरोप संबंधों में एक नए बहुपक्षीय सहयोग चैनल की शुरुआत है।
राष्ट्र प्रेस
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