हावड़ा बमबाजी-फायरिंग मामला: मास्टरमाइंड समेत तीन फरार आरोपी मुंबई के देवनार से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-6 ने 21 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के शिवपुर थाना क्षेत्र में हुई बमबाजी और फायरिंग की घटना में फरार चल रहे तीन आरोपियों को मुंबई के देवनार इलाके से गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता भी शामिल है, जो वारदात के बाद से फरार था।
कैसे हुई गिरफ्तारी
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, हावड़ा पुलिस से मिली गुप्त सूचना के आधार पर यूनिट-6 ने जाल बिछाया। तीनों आरोपी पश्चिम बंगाल में वारदात को अंजाम देने के बाद अपनी पहचान छिपाकर देवनार स्थित एकता एसआरए बिल्डिंग के एक कमरे में रह रहे थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि शिवपुर बमबाजी मामले के आरोपी मुंबई में छिपे हुए हैं, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई की गई।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान शमीम अहमद अब्दुल रशीद (40), जमील अख्तर अली (43) और अफताब अनवर खुर्शीद अनवर (44) के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान तीनों ने शिवपुर बमबाजी और फायरिंग मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। जाँच में यह भी सामने आया है कि तीनों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है।
ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया जारी
पुलिस ने बताया कि हावड़ा के शिवपुर पुलिस स्टेशन की एक टीम मुंबई पहुँच चुकी है और आरोपियों को हिरासत में लेने की प्रक्रिया जारी है। कागजी कार्रवाई पूरी होते ही तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल पुलिस को सौंप दिया जाएगा। मामले में आगे की जाँच शिवपुर पुलिस द्वारा की जाएगी।
मुर्शिदाबाद मामले से जुड़ा संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पहले मुंबई क्राइम ब्रांच की एक अन्य यूनिट ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से जुड़े एक अलग मामले में भी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कथित तौर पर वे दोनों एक आश्रम के बाहर बम फेंकने की घटना में शामिल थे और घटना के बाद बचने के लिए मुंबई आ गए थे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में हिंसक घटनाओं से जुड़े फरार आरोपियों के मुंबई में छिपने के एकाधिक मामले सामने आ रहे हैं।
आगे क्या होगा
तीनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस उन्हें हावड़ा ले जाएगी, जहाँ शिवपुर थाने में दर्ज मामले में विस्तृत जाँच होगी। आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए जाँचकर्ता अन्य मामलों में भी इनकी संलिप्तता की जाँच कर सकते हैं।