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इब्सामार-9: भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं करेंगी नौवां त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास

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इब्सामार-9: भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं करेंगी नौवां त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास

सारांश

आईएनएस तरकश की दक्षिण अफ्रीका यात्रा महज एक नौसैनिक दौरा नहीं — यह भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाओं के बीच 2008 से चले आ रहे इब्सामार अभ्यास की नौवीं कड़ी है। हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के बदलते समीकरणों के बीच यह त्रिपक्षीय तालमेल तीनों देशों की सामरिक साझेदारी को नई धार दे रहा है।

मुख्य बातें

आईएनएस तरकश नौवें त्रिपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'इब्सामार-9' में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका रवाना हुआ।
यह अभ्यास वर्ष 2008 से हर दो साल में आयोजित हो रहा है; इसमें भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं शामिल हैं।
अभ्यास में सतह युद्ध, हवाई हमलों से बचाव, पनडुब्बी रोधी रणनीति, समुद्री डकैती रोकना और खोज-बचाव अभियान शामिल होंगे।
दक्षिण अफ्रीका के 4 जलपोत (एसएएस अमातोला, किंग सेखुखुने प्रथम, एडम कोक तृतीय, पनडुब्बी मंथातिसी) और ब्राजील का बीएनएस बारोसो भाग लेंगे।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना प्रमुख आर.
खस्सिम डियाग्ने से मुलाकात कर शांति अभियानों में भारत के योगदान पर चर्चा की।

भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल युद्धपोत आईएनएस तरकश दक्षिण अफ्रीका की समुद्री यात्रा पर रवाना हो चुका है, जहाँ वह भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाओं के बीच आयोजित होने वाले नौवें त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास 'इब्सामार-9' में भाग लेगा। इस संयुक्त अभ्यास में समुद्री युद्धकला से लेकर समुद्री डकैती रोकने तक की रणनीतियों का व्यापक अभ्यास किया जाएगा। यह अभ्यास तीनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और परिचालन तालमेल को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इब्सामार अभ्यास की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वर्ष 2008 से ही भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं हर दो साल में यह त्रिपक्षीय अभ्यास आयोजित करती आ रही हैं। पिछले डेढ़ दशक में यह अभ्यास केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं रहा — यह तीनों देशों की नौसेनाओं के लिए संयुक्त प्रशिक्षण, अनुभव साझा करने और समुद्री अभियानों के उत्तम तरीकों को समझने का एक स्थायी मंच बन चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।

अभ्यास में क्या-क्या होगा

'इब्सामार-9' के दौरान समुद्र में कई प्रकार के जटिल सैन्य अभियानों का अभ्यास किया जाएगा। इनमें सतह पर तैनात युद्धपोतों के बीच युद्ध, हवाई हमलों से बचाव की रणनीतियाँ और पनडुब्बियों से निपटने के तरीके शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नौसैनिक विमानों का संचालन, संदिग्ध जहाजों की जाँच, समुद्री डकैती का मुकाबला, खोज एवं बचाव अभियान, तथा युद्धपोतों में आग लगने या तकनीकी नुकसान की आपात स्थिति से निपटने का अभ्यास भी एजेंडे में है।

अभ्यास के दौरान तीनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच पेशेवर संवाद भी आयोजित किया जाएगा, जिससे वे एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को गहराई से समझ सकेंगे और संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल स्थापित कर सकेंगे।

कौन-से युद्धपोत लेंगे भाग

दक्षिण अफ्रीकी नौसेना इस अभ्यास में युद्धपोत एसएएस अमातोला और एसएएस किंग सेखुखुने प्रथम के साथ उतरेगी। इनके अलावा एसएएस एडम कोक तृतीय और पनडुब्बी एसएएस मंथातिसी भी इसमें शामिल होंगे। ब्राजील की नौसेना युद्धपोत बीएनएस बारोसो के साथ भाग लेगी, जिस पर एक लिंक्स हेलीकॉप्टर भी तैनात होगा। भारतीय नौसेना की ओर से आईएनएस तरकश के साथ एक चेतक हेलीकॉप्टर भी अभ्यास का हिस्सा बनेगा।

रक्षा सचिव की साइप्रस में अहम मुलाकात

इस बीच, भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के प्रमुख आर. खस्सिम डियाग्ने से भेंट की। दोनों अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में भारत के योगदान पर विशेष जोर दिया गया।

रक्षा सचिव सिंह ने निकोसिया स्थित राष्ट्रमंडल युद्ध स्मारक पर द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

रणनीतिक महत्त्व और आगे की राह

इब्सामार अभ्यास का दीर्घकालिक उद्देश्य तीनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना और साझा समुद्री चुनौतियों से मिलकर निपटने की तैयारी को परिष्कृत करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभ्यास हिंद-प्रशांत और दक्षिण अटलांटिक में बढ़ते समुद्री तनाव के मद्देनजर और भी प्रासंगिक हो गया है। इस अभ्यास की सफलता तीनों देशों की नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता को एक नया आयाम दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वैश्विक दक्षिण के साथ सामरिक साझेदारी को व्यावहारिक जमीन पर उतारने में गंभीर है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि द्विवार्षिक अभ्यास की रफ्तार हिंद महासागर में तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों के मुकाबले धीमी है। रक्षा सचिव की साइप्रस यात्रा और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत की बढ़ती भूमिका मिलकर एक स्पष्ट संदेश देती है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय सुरक्षा ढाँचों में अधिक सक्रिय भूमिका के लिए तैयार है। असली परीक्षण यह होगा कि क्या ये अभ्यास स्थायी परिचालन प्रोटोकॉल और सूचना-साझाकरण व्यवस्थाओं में तब्दील होते हैं, या केवल कूटनीतिक कैलेंडर का हिस्सा बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इब्सामार-9 नौसैनिक अभ्यास क्या है?
इब्सामार-9 भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाओं के बीच होने वाला नौवाँ त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास है, जिसमें आईएनएस तरकश भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। यह अभ्यास 2008 से हर दो साल में आयोजित होता है और समुद्री सहयोग व परिचालन तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जाता है।
इब्सामार अभ्यास की शुरुआत कब हुई और इसका उद्देश्य क्या है?
इब्सामार अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी और तब से यह हर दो साल में आयोजित होता है। इसका मुख्य उद्देश्य तीनों देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना, संयुक्त प्रशिक्षण करना और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने की तैयारी करना है।
इब्सामार-9 में कौन-कौन से युद्धपोत और देश भाग ले रहे हैं?
भारत की ओर से आईएनएस तरकश (साथ में चेतक हेलीकॉप्टर), दक्षिण अफ्रीका की ओर से एसएएस अमातोला, एसएएस किंग सेखुखुने प्रथम, एसएएस एडम कोक तृतीय और पनडुब्बी एसएएस मंथातिसी, तथा ब्राजील की ओर से बीएनएस बारोसो (साथ में लिंक्स हेलीकॉप्टर) भाग ले रहे हैं।
इस अभ्यास में किस प्रकार के सैन्य अभियानों का अभ्यास होगा?
अभ्यास में सतह युद्ध, हवाई हमलों से बचाव, पनडुब्बी रोधी रणनीतियाँ, नौसैनिक विमानों का संचालन, संदिग्ध जहाजों की जाँच, समुद्री डकैती रोकना, खोज एवं बचाव अभियान और युद्धपोतों में आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण शामिल है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की साइप्रस यात्रा का क्या महत्त्व है?
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना प्रमुख आर. खस्सिम डियाग्ने से मुलाकात कर संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण योगदान पर चर्चा की। उन्होंने निकोसिया स्थित राष्ट्रमंडल युद्ध स्मारक पर द्वितीय विश्व युद्ध के भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
राष्ट्र प्रेस
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