इब्सामार-9: भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं करेंगी नौवां त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल युद्धपोत आईएनएस तरकश दक्षिण अफ्रीका की समुद्री यात्रा पर रवाना हो चुका है, जहाँ वह भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाओं के बीच आयोजित होने वाले नौवें त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास 'इब्सामार-9' में भाग लेगा। इस संयुक्त अभ्यास में समुद्री युद्धकला से लेकर समुद्री डकैती रोकने तक की रणनीतियों का व्यापक अभ्यास किया जाएगा। यह अभ्यास तीनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और परिचालन तालमेल को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इब्सामार अभ्यास की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि वर्ष 2008 से ही भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं हर दो साल में यह त्रिपक्षीय अभ्यास आयोजित करती आ रही हैं। पिछले डेढ़ दशक में यह अभ्यास केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं रहा — यह तीनों देशों की नौसेनाओं के लिए संयुक्त प्रशिक्षण, अनुभव साझा करने और समुद्री अभियानों के उत्तम तरीकों को समझने का एक स्थायी मंच बन चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
अभ्यास में क्या-क्या होगा
'इब्सामार-9' के दौरान समुद्र में कई प्रकार के जटिल सैन्य अभियानों का अभ्यास किया जाएगा। इनमें सतह पर तैनात युद्धपोतों के बीच युद्ध, हवाई हमलों से बचाव की रणनीतियाँ और पनडुब्बियों से निपटने के तरीके शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नौसैनिक विमानों का संचालन, संदिग्ध जहाजों की जाँच, समुद्री डकैती का मुकाबला, खोज एवं बचाव अभियान, तथा युद्धपोतों में आग लगने या तकनीकी नुकसान की आपात स्थिति से निपटने का अभ्यास भी एजेंडे में है।
अभ्यास के दौरान तीनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच पेशेवर संवाद भी आयोजित किया जाएगा, जिससे वे एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को गहराई से समझ सकेंगे और संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल स्थापित कर सकेंगे।
कौन-से युद्धपोत लेंगे भाग
दक्षिण अफ्रीकी नौसेना इस अभ्यास में युद्धपोत एसएएस अमातोला और एसएएस किंग सेखुखुने प्रथम के साथ उतरेगी। इनके अलावा एसएएस एडम कोक तृतीय और पनडुब्बी एसएएस मंथातिसी भी इसमें शामिल होंगे। ब्राजील की नौसेना युद्धपोत बीएनएस बारोसो के साथ भाग लेगी, जिस पर एक लिंक्स हेलीकॉप्टर भी तैनात होगा। भारतीय नौसेना की ओर से आईएनएस तरकश के साथ एक चेतक हेलीकॉप्टर भी अभ्यास का हिस्सा बनेगा।
रक्षा सचिव की साइप्रस में अहम मुलाकात
इस बीच, भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के प्रमुख आर. खस्सिम डियाग्ने से भेंट की। दोनों अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में भारत के योगदान पर विशेष जोर दिया गया।
रक्षा सचिव सिंह ने निकोसिया स्थित राष्ट्रमंडल युद्ध स्मारक पर द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
रणनीतिक महत्त्व और आगे की राह
इब्सामार अभ्यास का दीर्घकालिक उद्देश्य तीनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना और साझा समुद्री चुनौतियों से मिलकर निपटने की तैयारी को परिष्कृत करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभ्यास हिंद-प्रशांत और दक्षिण अटलांटिक में बढ़ते समुद्री तनाव के मद्देनजर और भी प्रासंगिक हो गया है। इस अभ्यास की सफलता तीनों देशों की नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता को एक नया आयाम दे सकती है।