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आईसीजीएस मीरा बेन डी-कमीशन: ओखा में दो दशकों की सेवा के बाद पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ विदाई

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आईसीजीएस मीरा बेन डी-कमीशन: ओखा में दो दशकों की सेवा के बाद पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ विदाई

सारांश

दो दशकों से अधिक समय तक अरब सागर की निगरानी करने वाले आईसीजीएस मीरा बेन को 22 अगस्त को ओखा में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। सूर्यास्त के साथ तटरक्षक ध्वज उतरा और एक गौरवशाली अध्याय का अंत हुआ।

मुख्य बातें

आईसीजीएस मीरा बेन को 22 अगस्त 2025 को ओखा बंदरगाह पर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ औपचारिक रूप से सेवामुक्त किया गया।
पोत को 25 जुलाई 2006 को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित कर भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया था।
समारोह की अध्यक्षता डीआईजी मनजीत सिंह गिल ने की; कमांडिंग अधिकारी कमांडेंट (जेजी) थिंकल थाराकन ने अंतिम प्रतिवेदन सौंपा।
पोत का नाम महात्मा गांधी की शिष्या और स्वतंत्रता सेनानी मीरा बेन के सम्मान में रखा गया था।
यह पोत जल-प्रणोदित एक्स्ट्रा फास्ट पेट्रोल वेसल श्रृंखला का हिस्सा था और दो दशकों तक समुद्री सुरक्षा, निगरानी व बचाव अभियानों में सक्रिय रहा।

भारतीय तटरक्षक बल का एक गौरवशाली अध्याय 22 अगस्त 2025 को उस समय समाप्त हुआ, जब आईसीजीएस मीरा बेन को ओखा बंदरगाह पर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ औपचारिक रूप से सेवामुक्त कर दिया गया। 25 जुलाई 2006 को कमीशन हुए इस पोत ने दो दशकों से अधिक समय तक भारत की समुद्री सीमाओं की अटूट निगरानी की। सूर्यास्त के समय तटरक्षक ध्वज उतरते ही इस ऐतिहासिक पोत की सक्रिय सेवा का औपचारिक अंत हो गया।

समारोह का आयोजन

डी-कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता कोस्ट गार्ड जिला मुख्यालय संख्या-15, ओखा के कमांडर उप महानिरीक्षक मनजीत सिंह गिल ने की। इस गरिमामय अवसर पर नागरिक एवं सैन्य गणमान्य व्यक्ति, पोत के कमांडिंग अधिकारी कमांडेंट (जेजी) थिंकल थाराकन, चालक दल के सदस्य तथा ओखा में तैनात विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत एक प्रभावशाली गार्ड ऑफ ऑनर परेड से हुई।

परंपरा के अनुसार, कमांडेंट थाराकन ने अपना अंतिम डी-कमीशनिंग प्रतिवेदन डीआईजी गिल को सौंपा, जिसके साथ ही पोत की सक्रिय सेवा औपचारिक रूप से समाप्त घोषित की गई। इसके बाद डी-कमीशनिंग पेनेंट को भी उतारा गया — एक भावुक क्षण जो उपस्थित सभी के लिए अविस्मरणीय रहा।

मीरा बेन: नाम के पीछे की विरासत

आईसीजीएस मीरा बेन का नामकरण महात्मा गांधी की समर्पित शिष्या और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख हस्ती मीरा बेन के सम्मान में किया गया था। गांधीवादी विचारों से प्रेरित मीरा बेन ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित किया था। उनकी निष्ठा और त्याग-भावना से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने उन्हें महान संत-कवयित्री मीराबाई के नाम पर 'मीरा' की उपाधि दी थी।

पोत की तकनीकी विशेषताएँ और सेवाकाल

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह पोत जल-प्रणोदित एक्स्ट्रा फास्ट पेट्रोल वेसल श्रृंखला का हिस्सा था, जो अपनी उच्च गति और परिचालन दक्षता के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। 25 जुलाई 2006 को कमीशन होने के बाद से इस पोत ने समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों तथा राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में उल्लेखनीय योगदान दिया।

गौरतलब है कि यह पोत अरब सागर के संवेदनशील जलक्षेत्र में तैनात रहा, जहाँ तस्करी-रोधी अभियानों से लेकर मछुआरों के बचाव तक अनेक महत्वपूर्ण अभियानों में इसने अग्रणी भूमिका निभाई।

वरिष्ठ अधिकारी का संबोधन

डीआईजी मनजीत सिंह गिल ने अपने संबोधन में आईसीजीएस मीरा बेन की उल्लेखनीय सेवाओं को याद करते हुए कहा कि यह पोत भारतीय तटरक्षक बल की क्षमता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा है। उन्होंने जहाज पर वर्षों तक सेवा देने वाले सभी अधिकारियों एवं नाविकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि मीरा बेन ने दो दशकों तक राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा में उत्कृष्ट और अनुकरणीय भूमिका निभाई है।

आगे की राह

यह डी-कमीशनिंग केवल एक पोत की विदाई नहीं, बल्कि उन सैकड़ों अधिकारियों और नाविकों की निष्ठा को सलाम है जिन्होंने इस जहाज की कमान संभाली। भारतीय तटरक्षक बल अपने बेड़े के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में नए और उन्नत पोतों को शामिल करता रहा है, और आईसीजीएस मीरा बेन की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें पुराने पेट्रोल वेसल्स को चरणबद्ध तरीके से हटाकर अधिक उन्नत प्लेटफॉर्म लाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि अरब सागर में तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं — ऐसे में पुराने पोतों की जगह लेने वाले नए जहाजों की तैनाती की समयसीमा और संख्या पर ध्यान देना ज़रूरी है। मीरा बेन जैसे पोतों की सेवानिवृत्ति के साथ-साथ प्रतिस्थापन क्षमता का सार्वजनिक ब्यौरा न होना, तटरक्षक बल की परिचालन तैयारी पर वैध सवाल उठाता है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईसीजीएस मीरा बेन क्या है और इसे क्यों सेवामुक्त किया गया?
आईसीजीएस मीरा बेन भारतीय तटरक्षक बल का एक जल-प्रणोदित एक्स्ट्रा फास्ट पेट्रोल वेसल था, जिसे 25 जुलाई 2006 को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने निर्मित कर सेवा में उतारा था। दो दशकों से अधिक की सेवा पूर्ण होने के बाद 22 अगस्त 2025 को इसे ओखा में औपचारिक रूप से डी-कमीशन किया गया।
डी-कमीशनिंग समारोह कहाँ और किसकी अध्यक्षता में हुआ?
यह समारोह गुजरात के ओखा बंदरगाह स्थित कोस्ट गार्ड जिला मुख्यालय संख्या-15 में आयोजित हुआ। इसकी अध्यक्षता उप महानिरीक्षक मनजीत सिंह गिल ने की और कमांडिंग अधिकारी कमांडेंट (जेजी) थिंकल थाराकन ने अंतिम डी-कमीशनिंग प्रतिवेदन सौंपा।
मीरा बेन नाम किसके सम्मान में रखा गया था?
पोत का नाम महात्मा गांधी की समर्पित शिष्या और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख हस्ती मीरा बेन के सम्मान में रखा गया था। महात्मा गांधी ने उन्हें संत-कवयित्री मीराबाई के नाम पर 'मीरा' नाम दिया था।
आईसीजीएस मीरा बेन ने अपनी सेवा के दौरान क्या भूमिका निभाई?
इस पोत ने समुद्री सुरक्षा, तटीय निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों तथा राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में दो दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह अरब सागर के संवेदनशील जलक्षेत्र में तैनात रहा।
डी-कमीशनिंग समारोह में क्या हुआ?
समारोह की शुरुआत गार्ड ऑफ ऑनर परेड से हुई। सूर्यास्त के समय पोत से भारतीय तटरक्षक ध्वज और डी-कमीशनिंग पेनेंट को अंतिम बार उतारा गया, जो पोत के गौरवशाली सेवाकाल की औपचारिक समाप्ति का प्रतीक बना।
राष्ट्र प्रेस
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