IIT गुवाहाटी का '4D एंटी-काउंटरफिटिंग' कवच: नकली करेंसी व दस्तावेज़ पहचानना होगा आसान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक प्रकाश-उत्सर्जक पेरोव्स्काइट नैनोमैटेरियल विकसित किया है, जो नकली करेंसी नोट, फर्जी दस्तावेज़ और ब्रांडेड उत्पादों की नकल को पहचानने में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। इस तकनीक से बने सुरक्षा पैटर्न को सामान्य प्रिंटिंग या इमेजिंग तकनीकों से कॉपी करना लगभग असंभव होगा। शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल एडवांस्ड ऑप्टिकल मैटेरियल्स में प्रकाशित हुए हैं।
क्यों ज़रूरी थी यह तकनीक
नकली उत्पादों की समस्या आज दवा उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैंकिंग और पहचान दस्तावेज़ों सहित कई क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। आधुनिक तकनीकों की मदद से अपराधियों ने बारकोड, क्यूआर कोड, होलोग्राम और वॉटरमार्क जैसी पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों की सटीक नकल करने के तरीके खोज लिए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जालसाजी से वित्तीय धोखाधड़ी, अवैध गतिविधियाँ और सुरक्षा उल्लंघन लगातार बढ़ रहे हैं — जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
पेरोव्स्काइट नैनोक्रिस्टल: तकनीक की नींव
शोध टीम ने प्रकाश उत्सर्जित करने वाले पेरोव्स्काइट नैनोक्रिस्टल विकसित किए हैं। ये क्रिस्टलीय पदार्थ अपने विशेष प्रकाशीय और इलेक्ट्रॉनिक गुणों के लिए जाने जाते हैं और इनका आकार नैनोमीटर स्तर का होता है — मानव बाल की चौड़ाई से लगभग एक लाख गुना छोटा।
इनमें अत्यधिक शुद्ध तथा तीव्र रंगों को अत्यंत संकीर्ण उत्सर्जन सीमा में उत्पन्न करने की क्षमता होती है। यह गुण सटीक ऑप्टिकल सिग्नेचर प्रदान करता है और पारंपरिक फ्लोरोसेंट पदार्थों की तुलना में अधिक रंग विविधता उपलब्ध कराता है — जिससे यह सुरक्षित प्रमाणीकरण के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
डबल-लेयर कोटिंग और लेजर पैटर्निंग
पेरोव्स्काइट नैनोक्रिस्टल की एक बड़ी चुनौती यह थी कि नमी, गर्मी और पर्यावरणीय परिस्थितियों के संपर्क में आने पर ये आसानी से खराब हो जाते हैं। इसे हल करने के लिए शोध टीम ने नैनोक्रिस्टल के चारों ओर डबल-लेयर कोटिंग विकसित की, जिससे वे गर्मी और रसायनों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बने और उनकी प्रकाश उत्सर्जन क्षमता भी बनी रही।
इसके बाद डायरेक्ट लेजर राइटिंग तकनीक की सहायता से इन पदार्थों से सूक्ष्म पैटर्न तैयार किए गए। पारंपरिक लिथोग्राफिक मास्क के बिना 10 से 40 माइक्रोमीटर तक की उच्च रिज़ॉल्यूशन प्राप्त हुई, जिससे अत्यंत जटिल पैटर्न और सूचना को एनकोड करना संभव हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विकसित तकनीक के बारे में सहायक प्रोफेसर प्रो. सैकत भौमिक ने कहा, 'इस पेरोव्स्काइट सामग्री की एक अनूठी विशेषता यह है कि सामान्य सुरक्षा लेबलों की तरह यह हमेशा एक जैसा संकेत नहीं देती। इसमें अत्यंत संकीर्ण उत्सर्जन स्पेक्ट्रा होता है। इसकी उत्सर्जन तीव्रता पर्यावरण के अनुसार बदलती है। उदाहरण के लिए, एक अदृश्य फ्लोरोसेंट पैटर्न को गर्म करके मिटाया जा सकता है और फिर रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से पुनः उत्पन्न किया जा सकता है।'
उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई जालसाज इसकी नकल करना चाहता है, तो उसे केवल दृश्य पैटर्न ही नहीं बल्कि नैनोक्रिस्टल की गर्मी और रसायनों के प्रति प्रतिक्रिया को भी दोहराना होगा — जो पारंपरिक तकनीकों से अत्यंत कठिन है। शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को '4D एंटी-काउंटरफिटिंग' नाम दिया है।
उपयोग के क्षेत्र और आगे की संभावनाएँ
यह तकनीक करेंसी नोट, पासपोर्ट, पहचान पत्र, कानूनी दस्तावेज़, लक्जरी वस्तुओं और उपभोक्ता उत्पादों की सुरक्षा में व्यापक उपयोग की क्षमता रखती है। इसमें कंपनी उत्पादों और बैंक नोटों में सुरक्षित सूचना भंडारण और पुनर्प्राप्ति की भी क्षमता है।
गौरतलब है कि IIT गुवाहाटी द्वारा विकसित यह लेजर पैटर्निंग तकनीक भविष्य में स्मार्टफोन, पहनने योग्य उपकरणों (वियरेबल्स) और ऑगमेंटेड रियलिटी प्रणालियों के लिए उन्नत माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले विकसित करने में भी काम आ सकती है। यह शोध-पत्र प्रो. सैकत भौमिक, प्रो. पी. के. गिरी तथा शोधार्थी लतिका जुनेजा और गरिमा चौधरी ने तैयार किया है।