13 अक्टूबर 2026
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IMF का भारत के लिए 7% विकास दर अनुमान: विशेषज्ञों ने बताया 1.5 अरब की आबादी और खपत को सबसे बड़ी ताकत

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IMF का भारत के लिए 7% विकास दर अनुमान: विशेषज्ञों ने बताया 1.5 अरब की आबादी और खपत को सबसे बड़ी ताकत

सारांश

IMF ने भारत को 7% वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1.5 अरब की आबादी, मज़बूत घरेलू खपत और डिजिटलीकरण यह भरोसा जगाते हैं — लेकिन असली कसौटी रोज़गार सृजन और महंगाई पर काबू पाना होगी।

मुख्य बातें

IMF ने भारत की विकास दर 2026 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा देता है।
अर्थशास्त्री विजय सरदाना ने 1.5 अरब से अधिक आबादी और खपत-आधारित ढाँचे को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया।
सीए योगेंद्र कपूर के अनुसार, आयकर और GST संग्रह में बढ़ोतरी भारत के अनौपचारिक से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने का संकेत है।
बाज़ार विशेषज्ञ एपी शुक्ला ने कहा कि 2014 के बाद से वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास गति बनी रही।
विशेषज्ञ विनोद रावल ने ₹12 लाख तक की आय पर आयकर राहत और सेमीकंडक्टर सेक्टर को अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत बताया।
विशेषज्ञों ने आगाह किया कि लगातार ऊँची मुद्रास्फीति और कच्चे तेल की कीमतें विकास की राह में बड़ी चुनौतियाँ हैं।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने का अनुमान जताया है, जिसे अर्थशास्त्रियों और बाज़ार विशेषज्ञों ने 13 अक्टूबर 2026 को भारत की आर्थिक क्षमता पर वैश्विक भरोसे का प्रमाण बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, 1.5 अरब से अधिक की आबादी, मज़बूत खपत-आधारित ढाँचा और बढ़ता निवेश माहौल इस विश्वास की बुनियाद है। हालाँकि, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि GDP वृद्धि दर के साथ-साथ रोज़गार और प्रति व्यक्ति आय में सुधार भी उतना ही ज़रूरी है।

भारत की खपत-आधारित अर्थव्यवस्था — मुख्य ताकत

अर्थशास्त्री विजय सरदाना ने कहा कि 1.5 अरब से अधिक आबादी वाले भारत में विकास की संभावनाएँ अभी भी बहुत व्यापक हैं। उनके अनुसार, 'दुनिया को भारत के बाज़ार को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यहाँ निवेश और कारोबार के विशाल अवसर मौजूद हैं।'

सरदाना ने आगे कहा, 'भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी मज़बूत खपत-आधारित अर्थव्यवस्था है। जब 1.5 अरब लोग रोज़मर्रा की ज़रूरतों पर खर्च करते हैं, तो उससे कृषि, उद्योग, सेवाओं और तकनीक जैसे सभी क्षेत्रों को बल मिलता है।' उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक पुनर्संतुलन के दौर में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डिजिटलीकरण और औपचारिक अर्थव्यवस्था में बदलाव

कपूर एंड एसोसिएट्स के अर्थशास्त्री और कर विशेषज्ञ सीए योगेंद्र कपूर ने कहा कि भारत के पास 7 प्रतिशत या उससे अधिक की विकास दर बनाए रखने की पूरी क्षमता है। उनके अनुसार, सरकार का डिजिटलीकरण, बुनियादी ढाँचे के विकास और पारदर्शी आर्थिक व्यवस्था पर फ़ोकस निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है।

कपूर ने कहा, 'आयकर और GST संग्रह में लगातार बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से अनौपचारिक ढाँचे से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है।' गौरतलब है कि इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मज़बूत हुआ है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भी विकास की गति बरकरार

बाज़ार विशेषज्ञ एपी शुक्ला ने कहा कि 2014 के बाद से भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी कई चुनौतियों के बावजूद अपनी विकास गति बनाए रखी है। उनके शब्दों में, 'बहुत सारी वैश्विक चुनौतियाँ आईं, लेकिन उसके बावजूद हमारा विकास दर कम नहीं हुआ।'

शुक्ला ने कहा कि सरकार की नीतियों, बेहतर कारोबारी माहौल और बढ़ते निजी निवेश ने अर्थव्यवस्था को मज़बूत किया है। उन्होंने भारत के युवा जनसांख्यिकीय आधार को वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बताया।

विशेषज्ञों की चेतावनियाँ और आगे की राह

अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ विनोद रावल ने IMF के अनुमान को गर्व की बात बताया और कहा कि सरकार द्वारा ₹12 लाख तक की आय पर आयकर में राहत देने के फ़ैसले से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है, जिसका सकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है। रावल ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेज़ी का भी उल्लेख किया और कहा कि इसका लाभ आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।

हालाँकि, कपूर ने आगाह किया कि लगातार ऊँची मुद्रास्फीति और पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव विकास यात्रा के लिए एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। सरदाना ने भी रेखांकित किया कि केवल GDP वृद्धि दर से आम आदमी का जीवन नहीं बदलता — वास्तविक प्रगति का आकलन रोज़गार सृजन और लोगों की आय में सुधार से होना चाहिए। आने वाले महीनों में पेट्रोल की कीमतों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है, यद्यपि इस पर आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह नया नहीं है — भारत इस पट्टी पर पिछले कई वर्षों से चल रहा है, फिर भी प्रति व्यक्ति आय और रोज़गार की गुणवत्ता में वह छलाँग नहीं दिखती जो इतनी ऊँची विकास दर से अपेक्षित है। GDP और आम आदमी की आय के बीच की खाई अभी भी गहरी है। विशेषज्ञों का यह कहना सही है कि खपत-आधारित अर्थव्यवस्था एक ताकत है, लेकिन जब तक रोज़गार सृजन और मज़दूरी में वृद्धि के ठोस आँकड़े नहीं आते, तब तक 'वैश्विक भरोसा' एक अभिजात वर्गीय उत्सव बना रहेगा जिसमें आम भारतीय की भागीदारी सीमित होगी।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IMF ने भारत की विकास दर के बारे में क्या अनुमान लगाया है?
IMF ने भारत की वार्षिक GDP विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। यह अनुमान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुस्ती और महंगाई की चिंताएँ बनी हुई हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, 1.5 अरब से अधिक की आबादी और उससे उपजी मज़बूत घरेलू खपत भारत की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है। यह खपत कृषि, उद्योग, सेवा और तकनीक जैसे सभी क्षेत्रों को एक साथ गति देती है।
भारत की आर्थिक विकास यात्रा में कौन-सी प्रमुख चुनौतियाँ हैं?
विशेषज्ञों ने लगातार ऊँची मुद्रास्फीति और पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को प्रमुख चुनौतियाँ बताया है। इसके साथ ही, रोज़गार सृजन और प्रति व्यक्ति आय में सुधार को वास्तविक प्रगति की कसौटी बताया गया है।
₹12 लाख तक आयकर राहत का अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ विनोद रावल के अनुसार, ₹12 लाख तक की आय पर आयकर में राहत से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे घरेलू माँग को बल मिलने और समग्र आर्थिक गतिविधि में तेज़ी आने की उम्मीद जताई गई है।
भारत की अर्थव्यवस्था औपचारिक ढाँचे की ओर कैसे बढ़ रही है?
सीए योगेंद्र कपूर के अनुसार, आयकर और GST संग्रह में लगातार बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से अनौपचारिक ढाँचे से औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर जा रही है। इस बदलाव ने विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मज़बूत किया है।
राष्ट्र प्रेस
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