भारत-कनाडा शिक्षा सहयोग: NEP 2020 के तहत कनाडाई विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खोलने पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर और व्यापार आयुक्त एमी एंटोनिनी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देने, शोध-आधारित साझेदारी का विस्तार करने और विद्यार्थियों के आपसी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-कनाडा संबंध शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में एक नई करवट ले रहे हैं।
बैठक के प्रमुख बिंदु
शिक्षा मंत्री जोशी ने बताया कि बैठक में चर्चा का केंद्रबिंदु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बातचीत के दौरान घोषित समझौता ज्ञापनों (MoU) को जमीनी स्तर पर लागू करना रहा। इसके साथ ही दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों के बीच सक्रिय सहयोग बढ़ाने और विद्यार्थियों तथा शोधकर्ताओं के लिए नए मार्ग प्रशस्त करने पर जोर दिया गया।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के ढाँचे के अंतर्गत कनाडाई विश्वविद्यालयों के भारत में प्रवेश और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार को सुगम बनाने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया। यह प्रावधान भारत को एक वैश्विक उच्च शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
शोध और नवाचार को प्राथमिकता
दोनों पक्षों ने संयुक्त शोध परियोजनाओं के विस्तार पर भी विचार किया। अधिकारियों के अनुसार, भारत और कनाडा के विश्वविद्यालयों व शोधकर्ताओं के बीच सहयोग बढ़ने से ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के व्यापक अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उच्च-कौशल क्षेत्रों में यह साझेदारी दोनों देशों के युवाओं के लिए करियर के नए द्वार खोल सकती है।
गौरतलब है कि यह पहल केवल द्विपक्षीय वार्ता तक सीमित नहीं है — यह NEP 2020 के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य से जुड़ी है जिसमें विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने की अनुमति दी गई है।
विद्यार्थियों की आवाजाही पर जोर
बैठक में विद्यार्थियों की दोनों देशों के बीच सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने को भी प्राथमिकता दी गई। जोशी ने कहा कि दोनों देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग को और गहरा करने तथा विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए अवसर बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। इस पहल से भारतीय विद्यार्थियों को विश्व स्तरीय शिक्षा घर बैठे उपलब्ध हो सकती है, वहीं कनाडाई विद्यार्थियों के लिए भी भारत के शैक्षणिक संस्थानों में अवसर बढ़ सकते हैं।
फ्रांस के बाद अब कनाडा — भारत की वैश्विक शिक्षा रणनीति
यह बैठक एक व्यापक कूटनीतिक पैटर्न का हिस्सा है। बीते महीने केंद्रीय शिक्षा मंत्री जोशी ने फ्रांस के उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतरिक्ष मंत्री फिलिप बैपटिस्ट के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी, जिसमें फ्रांसीसी उच्च शिक्षण संस्थानों को भारत में कैंपस खोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। उस वार्ता में भी संस्थागत संबंधों को सुदृढ़ करने और छात्रों, शिक्षकों व शोधकर्ताओं की आवाजाही पर केंद्रित चर्चा हुई थी।
यह Nवीं ऐसी पहल है जो भारत को एक वैश्विक शिक्षा गंतव्य के रूप में उभारने की सरकार की महत्वाकांक्षा को रेखांकित करती है। अब देखना होगा कि घोषित समझौता ज्ञापन कितनी जल्दी ठोस कार्यक्रमों और परिणामों में तब्दील होते हैं।