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भारत ईएफटीए टेपा को एक साल पूरे, व्यापार अड़चनें दूर करने को विशेष समूह गठित होगा: सिबी जॉर्ज

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भारत ईएफटीए टेपा को एक साल पूरे, व्यापार अड़चनें दूर करने को विशेष समूह गठित होगा: सिबी जॉर्ज

सारांश

भारत ईएफटीए टेपा के एक साल पूरे होने पर दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश की राह में आ रही रुकावटें दूर करने के लिए एक विशेष कार्य समूह बनाने का फैसला किया है। स्विस राष्ट्रपति परमेलिन की भारत यात्रा के दौरान 7 अक्टूबर को प्रॉस्पेरिटी समिट भी होगा।

मुख्य बातें

भारत ईएफटीए टीईपीए 1 अक्टूबर 2025 को लागू हुआ था और अब उसे एक वर्ष पूरा हो गया है।
दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश की अड़चनें दूर करने के लिए विशेष कार्य समूह गठित करने पर सहमति जताई।
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन 7 अक्टूबर 2026 को प्रॉस्पेरिटी समिट में भाग लेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और परमेलिन के बीच टीईपीए के सहयोग के पूरे दायरे पर द्विपक्षीय बातचीत हुई।
दोनों देशों ने माइग्रेशन, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग सहित कई क्षेत्रों में समझौते आगे बढ़ाए।
ईएफटीए में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।

भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को लागू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश को और गति देने के लिए एक विशेष कार्य समूह गठित करने पर सहमति जताई है, जो द्विपक्षीय कारोबार में आ रही रुकावटों की पहचान कर उनके समाधान पर केंद्रित रहेगा। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी।

मुख्य घटनाक्रम

टीईपीए पर मार्च 2024 में हस्ताक्षर हुए थे और यह 1 अक्टूबर 2025 को प्रभाव में आया। ईएफटीए में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। सिबी जॉर्ज ने बताया कि पिछले एक वर्ष में समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों ने एक विशेष समूह गठित करने पर सहमति जताई है, जो व्यापार और निवेश को और बढ़ावा देने तथा दोनों देशों के बीच मौजूद किसी भी अड़चन को दूर करने से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा करेगा।"

मोदी परमेलिन वार्ता और प्रॉस्पेरिटी समिट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत में टीईपीए के तहत जारी सहयोग के पूरे दायरे पर विस्तार से चर्चा की गई। सिबी जॉर्ज ने बताया कि इस वार्ता से समझौते में शामिल प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया को और बल मिलेगा।

राष्ट्रपति परमेलिन 7 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले प्रॉस्पेरिटी समिट में भी भाग लेंगे। यह सम्मेलन भारत ईएफटीए टेपा के लागू होने की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। सचिव जॉर्ज के अनुसार, "प्रॉस्पेरिटी समिट भारत और ईएफटीए देशों के नीति निर्माताओं तथा कारोबार जगत को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।" गौरतलब है कि परमेलिन ने स्विट्जरलैंड के फेडरल काउंसलर फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स, एजुकेशन एंड रिसर्च के रूप में टीईपीए की वार्ता और उसे अंतिम रूप देने में व्यक्तिगत भूमिका निभाई थी।

विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार में सहयोग

व्यापार से परे, भारत और स्विट्जरलैंड के बीच विज्ञान एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग का दीर्घकालिक इतिहास रहा है। सिबी जॉर्ज ने बताया कि स्विट्जरलैंड यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के कार्यक्रमों का हिस्सा है और द्विपक्षीय स्तर पर भी सहयोग आगे बढ़ाया गया है। उल्लेखनीय है कि स्विट्जरलैंड के शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार राज्य सचिव ने 2024 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का दौरा किया था।

परमेलिन की भारत यात्रा के व्यापक परिणाम

राष्ट्रपति परमेलिन की मौजूदा भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों और व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाया है। इनमें माइग्रेशन और मोबिलिटी, युवा पेशेवरों के आदान प्रदान, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग प्रमुख हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने व्यापार साझेदारों के साथ आर्थिक संबंधों को केवल वस्तु व्यापार से आगे बढ़ाकर तकनीक, नवाचार और मानव संसाधन आदान प्रदान तक विस्तारित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

आगे की राह

नवगठित विशेष कार्य समूह के जरिए भारत और ईएफटीए देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को व्यवस्थित रूप से चिह्नित कर दूर करने की कोशिश की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार टेपा की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह समूह निवेश के वास्तविक प्रवाह और रोज़गार सृजन में कितना कारगर साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके नतीजों में होगी — क्या यह समूह निवेश के ठोस प्रवाह में तब्दील होगा या महज एक और परामर्श तंत्र बनकर रह जाएगा। ईएफटीए देशों, विशेषकर स्विट्जरलैंड, का भारत के साथ विज्ञान और नवाचार में सहयोग का इतिहास उत्साहजनक है, लेकिन व्यापार घाटे और बाज़ार पहुँच की व्यावहारिक बाधाएँ अभी भी बनी हुई हैं। प्रॉस्पेरिटी समिट का असली महत्व इस बात में होगा कि नीति निर्माता और उद्योग जगत मिलकर उन्हें कितनी तेज़ी से सुलझाते हैं।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ईएफटीए टीईपीए क्या है और यह कब लागू हुआ?
भारत ईएफटीए टीईपीए (व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता) भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच मार्च 2024 में हस्ताक्षरित हुआ और 1 अक्टूबर 2025 को प्रभाव में आया। ईएफटीए में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।
विशेष कार्य समूह का क्या काम होगा?
यह विशेष समूह भारत और ईएफटीए देशों के बीच व्यापार तथा निवेश को बाधित करने वाली अड़चनों की पहचान कर उन्हें दूर करने के उपायों पर चर्चा करेगा। इसकी घोषणा विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 5 अक्टूबर 2026 को की।
प्रॉस्पेरिटी समिट क्या है और इसका महत्व क्या है?
प्रॉस्पेरिटी समिट 7 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाला एक द्विपक्षीय सम्मेलन है, जो भारत ईएफटीए टेपा की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत और ईएफटीए देशों के नीति निर्माता तथा कारोबार जगत एक मंच पर आएंगे।
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति परमेलिन की भारत यात्रा में क्या हासिल हुआ?
राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने माइग्रेशन और मोबिलिटी, युवा पेशेवरों के आदान प्रदान, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग सहित कई क्षेत्रों में समझौतों को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत में टीईपीए के सहयोग के पूरे दायरे पर चर्चा हुई।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग कैसा है?
स्विट्जरलैंड यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का हिस्सा है और द्विपक्षीय स्तर पर भी भारत के साथ अंतरिक्ष सहयोग जारी है। स्विट्जरलैंड के शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार राज्य सचिव ने 2024 में इसरो का दौरा किया था।
राष्ट्र प्रेस
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