भारत-फिजी JWG बैठक: नई दिल्ली में 28 सितंबर को रक्षा सहयोग मजबूत करने पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और फिजी ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक के दौरान अपनी रक्षा साझेदारी को नई ऊँचाई देने की दिशा में ठोस कदम उठाए। बैठक में मौजूदा रक्षा सहयोग की व्यापक समीक्षा के साथ-साथ भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की गई।
बैठक का स्वरूप और नेतृत्व
इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और फिजी की ओर से रक्षा एवं पूर्व सैनिक मामलों के स्थायी सचिव मेसन स्मिथ ने की। रक्षा मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने जारी द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा की और साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
भारत-पोलैंड JWG: संयुक्त कार्य योजना पर जोर
उसी दिन, 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत-पोलैंड संयुक्त कार्य समूह की बैठक भी आयोजित हुई। इसकी सह-अध्यक्षता रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और पोलैंड की राज्य सचिव एवं उप मंत्री मैग्डेलेना सोबकोवियाक-जारनेका ने की। बैठक में संयुक्त कार्य योजना 2024-2028 को लागू करने और संस्थागत, रक्षा एवं रक्षा औद्योगिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
गौरतलब है कि इससे पहले 4 सितंबर को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वारसॉ में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात की थी और संयुक्त कार्य योजना 2024-28 की प्रगति की समीक्षा की थी।
जयशंकर का वारसॉ दौरा: व्यापक एजेंडा
जयशंकर ने उस बैठक के बाद एक्स पर लिखा, 'वारसॉ में पोलैंड के डीपीएम और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात की। हमने व्यापार और निवेश, अंतरिक्ष, डिजिटल, एआई, सेमीकंडक्टर, रक्षा, शिक्षा, शिपिंग, खनन और ऊर्जा, लोगों के बीच आपसी संबंध, संस्कृति और बहुपक्षीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए हमारी संयुक्त कार्य योजना 2024-28 की प्रगति की समीक्षा की।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत-ईयू सहयोग को गहरा करने में पोलैंड के समर्थन का सम्मान करते हैं और एफटीए के लागू होने से द्विपक्षीय संबंध और घनिष्ठ होंगे।
इसी यात्रा के दौरान जयशंकर ने पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवारोकी से भी मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नावरोकी से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत हमारी रणनीतिक साझेदारी की सकारात्मक दिशा पर केंद्रित रही। यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया, आईएमईसी और जी20 पर विचारों का आदान-प्रदान किया।'
व्यापक संदर्भ: भारत की बहु-आयामी रक्षा कूटनीति
यह ऐसे समय में आया है जब भारत एक साथ कई देशों के साथ अपनी रक्षा और सामरिक साझेदारी को संस्थागत रूप देने में जुटा है। प्रशांत क्षेत्र में फिजी के साथ JWG और यूरोप में पोलैंड के साथ समन्वित प्रयास यह दर्शाते हैं कि भारत की रक्षा कूटनीति अब केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रही। आलोचकों का कहना है कि इन बैठकों की वास्तविक उपयोगिता तब सिद्ध होगी जब ठोस समझौतों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की घोषणा होगी।
आगे की राह
भारत-फिजी और भारत-पोलैंड, दोनों JWG बैठकों के नतीजे संबंधित द्विपक्षीय रक्षा ढाँचे को और परिपक्व बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों बैठकों में भविष्य के सहयोग के लिए रोडमैप तैयार किया गया है, जिसके क्रियान्वयन पर अगले चरण में नज़र रहेगी।