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भारत-पापुआ न्यू गिनी दूसरी एफओसी बैठक: 12 जून को वर्चुअल संवाद, द्विपक्षीय सहयोग और इंडो-पैसिफिक एजेंडे पर चर्चा

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भारत-पापुआ न्यू गिनी दूसरी एफओसी बैठक: 12 जून को वर्चुअल संवाद, द्विपक्षीय सहयोग और इंडो-पैसिफिक एजेंडे पर चर्चा

सारांश

भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच 12 जून 2026 को दूसरी एफओसी बैठक वर्चुअल माध्यम से हुई। विकास साझेदारी, एलएनजी व्यापार और इंडो-पैसिफिक एजेंडे पर चर्चा हुई। अगली बैठक पोर्ट मोरेस्बी में होगी — 2023 में मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद से दोनों देशों के संबंध नई गति पकड़ चुके हैं।

मुख्य बातें

भारत-पापुआ न्यू गिनी की दूसरी विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) बैठक 12 जून 2026 को वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुई।
भारतीय पक्ष का नेतृत्व संयुक्त सचिव (ओशिनिया) विश्वेश नेगी ने और पापुआ न्यू गिनी का नेतृत्व विदेश सचिव इलियास वोहेन्गु ने किया।
बैठक में विकास साझेदारी , आर्थिक सहयोग , सांस्कृतिक संबंध और इंडो-पैसिफिक मुद्दों पर चर्चा हुई।
पहली एफओसी बैठक 2022 में पोर्ट मोरेस्बी में हुई थी; अगली बैठक भी वहीं आयोजित होगी।
मई 2023 में PM मोदी की पापुआ न्यू गिनी यात्रा और एफआईपीआईसी-III शिखर सम्मेलन के बाद से दोनों देशों के संबंध नई ऊँचाई पर हैं।
भारत पापुआ न्यू गिनी से एलएनजी आयात करता है और खनन-ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर तलाश रहा है।

भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच दूसरी विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) बैठक 12 जून 2026 को वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुई, जिसमें दोनों देशों ने विकास साझेदारी, आर्थिक सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि यह बैठक दोनों देशों के बीच संस्थागत राजनयिक संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रतिनिधिमंडल और नेतृत्व

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (ओशिनिया) विश्वेश नेगी ने किया। पापुआ न्यू गिनी की ओर से विदेश सचिव इलियास वोहेन्गु ने प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की। उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच पहली एफओसी बैठक वर्ष 2022 में पोर्ट मोरेस्बी में आयोजित हुई थी।

मुख्य घटनाक्रम और एजेंडा

बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न आयामों की समीक्षा की — इनमें विकास साझेदारी, राजनीतिक संपर्क, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संबंध केंद्र में रहे। इसके साथ ही बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय तथा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की सकारात्मक प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। यह भी तय किया गया कि एफओसी का अगला दौर पोर्ट मोरेस्बी में आपसी सहमति से निर्धारित तिथि पर आयोजित होगा।

भारत-पापुआ न्यू गिनी संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच राजनयिक संबंध 1975 में पापुआ न्यू गिनी की स्वतंत्रता के बाद से ही सौहार्दपूर्ण और सहयोगात्मक रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत ने अपनी 'एक्ट ईस्ट नीति' के तहत प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों को विशेष प्राथमिकता दी है, और इस संदर्भ में पापुआ न्यू गिनी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है।

गौरतलब है कि मई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पापुआ न्यू गिनी की ऐतिहासिक यात्रा की थी — किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस द्वीपीय देश की यह पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मरापे के साथ फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) के तीसरे शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की थी।

आर्थिक और संसाधन सहयोग

विदेश मंत्रालय के अनुसार, आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध लगातार विस्तार पा रहे हैं। पापुआ न्यू गिनी सोना, तांबा और प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध देश है। भारत वहाँ से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करता है, जबकि भारतीय कंपनियाँ खनन और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर तलाश रही हैं।

इसके अतिरिक्त, भारत विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी सहायता और विकास परियोजनाओं के माध्यम से पापुआ न्यू गिनी की मानव संसाधन क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान दे रहा है। दोनों देशों के बीच नई दिल्ली और पोर्ट मोरेस्बी में उच्चायोग कार्यरत हैं, जो नियमित संवाद को संस्थागत आधार प्रदान करते हैं।

आगे की राह

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को व्यापक बनाने में जुटा है। अगली एफओसी बैठक पोर्ट मोरेस्बी में होने से संकेत मिलता है कि दोनों देश इस संस्थागत संवाद-तंत्र को नियमित और द्विपक्षीय रूप से सक्रिय रखने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस परिणामों के मामले में अभी भी अस्पष्टता बनी हुई है — बयान में 'सहमति' और 'संतोष' जैसे शब्द हैं, मगर कोई संख्यात्मक लक्ष्य या समयसीमा नहीं। 'एक्ट ईस्ट नीति' के तहत प्रशांत देशों को प्राथमिकता देने का दावा वर्षों से होता रहा है, पर एलएनजी आयात और खनन निवेश की वास्तविक मात्रा सार्वजनिक नहीं की गई है। मोदी की 2023 की ऐतिहासिक यात्रा के तीन साल बाद भी यदि बैठकें वर्चुअल हो रही हैं और अगले दौर की तारीख अनिश्चित है, तो यह साझेदारी की गहराई पर सवाल उठाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-पापुआ न्यू गिनी दूसरी एफओसी बैठक कब और कैसे हुई?
यह बैठक 12 जून 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। पहली एफओसी बैठक 2022 में पोर्ट मोरेस्बी में हुई थी।
इस बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई?
दोनों देशों ने विकास साझेदारी, राजनीतिक संपर्क, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक संबंध और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
भारत और पापुआ न्यू गिनी के आर्थिक संबंध कैसे हैं?
पापुआ न्यू गिनी सोना, तांबा और प्राकृतिक गैस जैसे खनिजों से समृद्ध है। भारत वहाँ से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात करता है और भारतीय कंपनियाँ खनन व ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर तलाश रही हैं।
PM मोदी की पापुआ न्यू गिनी यात्रा का क्या महत्व था?
मई 2023 में PM नरेंद्र मोदी ने पापुआ न्यू गिनी की यात्रा की थी, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने PM जेम्स मरापे के साथ एफआईपीआईसी के तीसरे शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की, जिसने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी।
अगली एफओसी बैठक कहाँ होगी?
दोनों देशों ने सहमति जताई है कि अगला विदेश कार्यालय परामर्श पोर्ट मोरेस्बी में आयोजित किया जाएगा। तिथि आपसी सहमति से तय की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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