भारत-पापुआ न्यू गिनी दूसरी एफओसी बैठक: 12 जून को वर्चुअल संवाद, द्विपक्षीय सहयोग और इंडो-पैसिफिक एजेंडे पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच दूसरी विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) बैठक 12 जून 2026 को वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुई, जिसमें दोनों देशों ने विकास साझेदारी, आर्थिक सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि यह बैठक दोनों देशों के बीच संस्थागत राजनयिक संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रतिनिधिमंडल और नेतृत्व
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (ओशिनिया) विश्वेश नेगी ने किया। पापुआ न्यू गिनी की ओर से विदेश सचिव इलियास वोहेन्गु ने प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की। उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच पहली एफओसी बैठक वर्ष 2022 में पोर्ट मोरेस्बी में आयोजित हुई थी।
मुख्य घटनाक्रम और एजेंडा
बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न आयामों की समीक्षा की — इनमें विकास साझेदारी, राजनीतिक संपर्क, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संबंध केंद्र में रहे। इसके साथ ही बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय तथा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की सकारात्मक प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। यह भी तय किया गया कि एफओसी का अगला दौर पोर्ट मोरेस्बी में आपसी सहमति से निर्धारित तिथि पर आयोजित होगा।
भारत-पापुआ न्यू गिनी संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच राजनयिक संबंध 1975 में पापुआ न्यू गिनी की स्वतंत्रता के बाद से ही सौहार्दपूर्ण और सहयोगात्मक रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत ने अपनी 'एक्ट ईस्ट नीति' के तहत प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों को विशेष प्राथमिकता दी है, और इस संदर्भ में पापुआ न्यू गिनी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है।
गौरतलब है कि मई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पापुआ न्यू गिनी की ऐतिहासिक यात्रा की थी — किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस द्वीपीय देश की यह पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मरापे के साथ फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) के तीसरे शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की थी।
आर्थिक और संसाधन सहयोग
विदेश मंत्रालय के अनुसार, आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध लगातार विस्तार पा रहे हैं। पापुआ न्यू गिनी सोना, तांबा और प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध देश है। भारत वहाँ से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करता है, जबकि भारतीय कंपनियाँ खनन और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर तलाश रही हैं।
इसके अतिरिक्त, भारत विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी सहायता और विकास परियोजनाओं के माध्यम से पापुआ न्यू गिनी की मानव संसाधन क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान दे रहा है। दोनों देशों के बीच नई दिल्ली और पोर्ट मोरेस्बी में उच्चायोग कार्यरत हैं, जो नियमित संवाद को संस्थागत आधार प्रदान करते हैं।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को व्यापक बनाने में जुटा है। अगली एफओसी बैठक पोर्ट मोरेस्बी में होने से संकेत मिलता है कि दोनों देश इस संस्थागत संवाद-तंत्र को नियमित और द्विपक्षीय रूप से सक्रिय रखने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।