18 जुलाई 2026
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लाओस के उप-प्रधानमंत्री थोंगसावन फोमविहाने 1-3 जून को भारत दौरे पर, जयशंकर से होगी अहम बैठक

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लाओस के उप-प्रधानमंत्री थोंगसावन फोमविहाने 1-3 जून को भारत दौरे पर, जयशंकर से होगी अहम बैठक

सारांश

लाओस के उप-प्रधानमंत्री थोंगसावन फोमविहाने की तीन दिवसीय भारत यात्रा महज शिष्टाचार नहीं — यह चीन-म्यांमार से घिरे एक रणनीतिक भू-आबद्ध देश के साथ भारत की 'एक्ट ईस्ट' साझेदारी को नई ऊँचाई देने का मौका है। जयशंकर से बैठक और बिजनेस फोरम इस यात्रा को कूटनीतिक से आर्थिक धरातल पर भी उतारते हैं।

मुख्य बातें

लाओस के उप-प्रधानमंत्री थोंगसावन फोमविहाने 1 से 3 जून 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
3 जून को हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस.
जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है।
भारत-लाओस बिजनेस फोरम 3 जून, दोपहर 2 बजे आयोजित होगा, जिसमें दोनों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।
फोमविहाने भारत की राष्ट्रपति से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे।
भारत-लाओस राजनयिक संबंध फरवरी 1956 से चले आ रहे हैं; लाओस UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थक रहा है।
लाओस राम मंदिर उद्घाटन पर डाक टिकट जारी करने वाला दुनिया का पहला देश था।

लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने अपनी पत्नी वाडसाना फोमविहाने के साथ 1 से 3 जून 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई गति देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।

आगमन और स्वागत

सोमवार, 1 जून की रात 9:50 बजे फोमविहाने नई दिल्ली पहुँचे। उनका औपचारिक स्वागत इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 स्थित सेरेमोनियल लाउंज में किया गया। यह स्वागत-समारोह दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक शिष्टाचार का प्रतीक है।

आगरा में कार्यक्रम

मंगलवार, 2 जून को लाओसी प्रतिनिधिमंडल आगरा में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। विदेश मंत्रालय ने इन कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है। माना जा रहा है कि यह दौरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों से परिचय का अवसर भी देगा।

मुख्य बैठकें और भारत-लाओस बिजनेस फोरम

यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण दिन बुधवार, 3 जून रहेगा। सुबह 11 बजे फोमविहाने हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

दोपहर 2 बजे भारत-लाओस बिजनेस फोरम का आयोजन होगा, जिसमें दोनों देशों के व्यापारिक और औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस मंच का उद्देश्य आर्थिक सहयोग और निवेश के नए अवसरों को प्रोत्साहन देना है। शाम 5 बजे फोमविहाने भारत की राष्ट्रपति से शिष्टाचार भेंट करेंगे, जो दोनों देशों के पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों की पुष्टि करेगी। सभी कार्यक्रमों के समापन के बाद वे बुधवार रात 11:30 बजे नई दिल्ली से स्वदेश रवाना होंगे।

भारत-लाओस संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत ने फरवरी 1956 में लाओस के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए — लाओस की स्वतंत्रता के महज तीन वर्ष बाद। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में लाओस का दौरा किया था और प्रथम राष्ट्रपति ने 1956 में वहाँ की यात्रा की थी।

दक्षिण-पूर्व एशिया का यह भू-आबद्ध (लैंडलॉक) देश रणनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह चीन और म्यांमार जैसे देशों से घिरा हुआ है। व्यापारिक और भू-राजनीतिक दोनों दृष्टिकोणों से लाओस भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के लिए प्रासंगिक साझेदार है।

हालिया सहयोग और आगे की राह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में लाओस की राजधानी वियनतियाने में आयोजित ईस्ट एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लिया था, जिसके दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। गौरतलब है कि राम मंदिर उद्घाटन के अवसर पर लाओस ने राम लला पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया था — ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारत ने लाओस को सहायता प्रदान की थी। लाओस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करता रहा है। यह यात्रा उन दीर्घकालिक संबंधों को और सुदृढ़ करने की कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यापार के आँकड़े अभी तक इस संभावना के अनुरूप नहीं हैं। बिजनेस फोरम का आयोजन सही दिशा में कदम है, पर असली परीक्षा यह होगी कि इस बार बैठकें किसी ठोस निवेश या कनेक्टिविटी समझौते में बदलती हैं या नहीं। सांस्कृतिक सद्भावना — जैसे राम लला पर डाक टिकट — महत्वपूर्ण है, पर दीर्घकालिक साझेदारी के लिए व्यापार और बुनियादी ढाँचे की नींव अनिवार्य है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाओस के उप-प्रधानमंत्री थोंगसावन फोमविहाने की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या है?
यह 1 से 3 जून 2026 तक की आधिकारिक यात्रा है, जिसका उद्देश्य भारत और लाओस के बीच द्विपक्षीय राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है। यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर से बैठक और भारत-लाओस बिजनेस फोरम प्रमुख कार्यक्रम हैं।
फोमविहाने भारत में किन नेताओं से मिलेंगे?
3 जून को वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हैदराबाद हाउस में मिलेंगे और शाम को भारत की राष्ट्रपति से शिष्टाचार भेंट करेंगे। इसके अलावा भारत-लाओस बिजनेस फोरम में दोनों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
भारत और लाओस के बीच राजनयिक संबंध कब से हैं?
भारत ने फरवरी 1956 में लाओस के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए थे — लाओस की स्वतंत्रता के तीन वर्ष बाद। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में लाओस का दौरा किया था।
लाओस भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
लाओस एक भू-आबद्ध (लैंडलॉक) देश है जो चीन और म्यांमार से घिरा है, जिससे यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया में पहुँच के लिए महत्वपूर्ण है। लाओस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का भी समर्थन करता रहा है।
हाल के वर्षों में भारत-लाओस संबंधों में क्या उल्लेखनीय घटनाएँ रही हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में वियनतियाने में आयोजित ईस्ट एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लिया और कई समझौते किए। लाओस ने राम मंदिर उद्घाटन के अवसर पर राम लला पर डाक टिकट जारी किया, जो ऐसा करने वाला विश्व का पहला देश बना। कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारत ने लाओस को सहायता प्रदान की थी।
राष्ट्र प्रेस
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